45 साल के मरीज की किडनी से निकलीं 856 पथरियाँ! अल्ट्रासाउंड में दिखीं सिर्फ 2 बड़ी पथरियाँ
भारत में सामने आया किडनी स्टोन का यह मामला डॉक्टरों के लिए भी हैरान करने वाला था। जुलाई 2018 में दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग में डॉक्टरों ने 45 वर्षीय मरीज मुनेश कुमार गुप्ता की बाईं किडनी और मूत्र मार्ग से 856 पथरियाँ निकालीं।
आखिर पूरा मामला क्या था?
रिपोर्ट के मुताबिक, मुनेश कुमार गुप्ता पेशाब में खून आने की शिकायत के बाद अस्पताल पहुँचे थे। उन्हें उस समय किडनी स्टोन से जुड़े दूसरे स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं हो रहे थे। जाँच के दौरान अल्ट्रासाउंड में उनकी किडनी में लगभग 33 मिलीमीटर आकार की दो बड़ी पथरियाँ दिखाई दीं।
लेकिन जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन शुरू किया, तो स्थिति उम्मीद से अलग निकली। उनकी बाईं किडनी और उससे जुड़े मूत्र मार्ग में कुल 856 पथरियाँ मिलीं। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की किडनी में सूजन थी और उसकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हुई थी।
किस तकनीक से निकाली गईं पथरियाँ?
यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. राजिंदर यादव के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने Percutaneous Nephrolithotomy (PCNL) नामक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। इसे आम भाषा में कीहोल सर्जरी भी कहा जाता है।
इस प्रक्रिया में पीठ की ओर लगभग एक सेंटीमीटर का छोटा रास्ता बनाकर विशेष उपकरणों की मदद से पथरियाँ निकाली गईं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रक्रिया दो घंटे से अधिक चली और मरीज को अगले दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मूत्र मार्ग में रुकावट को दूर करने के लिए अस्थायी DJ स्टेंट लगाया गया था। इसके अलावा, रुकावट को ठीक करने के लिए लेजर प्रक्रिया से दूसरे चरण के उपचार की योजना भी बनाई गई थी।
किडनी स्टोन के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
किडनी स्टोन के कुछ सामान्य लक्षण हैं:
* कमर, पीठ या पेट के एक तरफ तेज दर्द
* पेशाब में खून आना
* पेशाब करते समय दर्द या जलन
* बार-बार पेशाब आने की इच्छा
* दर्द के साथ मतली या उल्टी
हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। पेशाब में खून आए तो चिकित्सकीय जाँच करवाएँ। तेज दर्द के साथ बुखार या ठंड लगना, अथवा पेशाब रुकना, तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के संकेत हैं।
बचाव के लिए क्या करें?
पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जाँच करवाना उपयोगी हो सकता है। पानी की सही मात्रा व्यक्ति की सेहत और अन्य बीमारियों पर निर्भर करती है। यदि पहले किडनी स्टोन हो चुका है, तो डॉक्टर से उसके प्रकार और दोबारा होने से बचाव के उपायों के बारे में पूछें।
याद रखें: किडनी स्टोन का इलाज उसकी संख्या, आकार, स्थान और मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। दर्द को नजरअंदाज न करें और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएँ न लें।

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