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दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने आँख की रेटिना को दोबारा बनाने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है। KAIST संस्थान की टीम ने PROX1 नाम के प्रोटीन की पहचान की है, जो चोट के बाद रेटिना को खुद की मरम्मत करने से रोकता है।

शोधकर्ताओं ने एंटीबॉडी की मदद से इस प्रोटीन को रोका। रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा वाले चूहों पर किए गए प्रयोग में रेटिना दोबारा बनने लगी और नज़र छह महीने से ज़्यादा लौटी रही। 👁️

यह शोध नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में छपा है। अभी यह इलाज सिर्फ चूहों पर आज़माया गया है। इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है।

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