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बिहार के बेगूसराय से गंगा नदी में हुए नाव हादसे की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल भावुक हो सकता है। बुधवार शाम चमथा रजौली दियारा से लौट रही एक नाव अचानक नदी में डूब गई। इस हादसे में लापता दो लोगों के शव गुरुवार को बरामद किए गए। मृतकों में 50 वर्षीय सोगारथ महतो और 12 वर्षीय रीना कुमारी उर्फ रावो शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि नाव की क्षमता करीब 15 लोगों की थी, लेकिन उस पर इससे कहीं अधिक लोग सवार थे। नाव कुछ दूर आगे बढ़ी ही थी कि एक युवक के पानी में कूदने के बाद उसका संतुलन बिगड़ गया। नाव एक तरफ झुक गई और धीरे-धीरे उसमें पानी भरने लगा। देखते ही देखते नाव नदी में डूब गई।

इस हादसे में सबसे दर्दनाक कहानी मन्नुता देवी की सामने आई है। उन्होंने बताया कि वह अपने पति और बेटी के साथ दियारा से घर लौट रही थीं। नाव पर अधिक लोगों को बैठाने को लेकर उन्होंने पहले ही आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। हादसे के दौरान उनके पति नाव के नीचे फंस गए। वह उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ना चाहती थीं, लेकिन दूसरे यात्रियों ने उन्हें रोक लिया। इस घटना में उनके पति की जान चली गई, जबकि उनकी बेटी किसी तरह तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रही।

दूसरी ओर, बबीता देवी की कहानी भी बेहद दुखद है। वह अपनी बेटी के साथ नाव पर सवार थीं। नाव का संतुलन बिगड़ने पर उन्होंने बेटी को बचाने की कोशिश की, लेकिन दूसरे लोगों ने उन्हें अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी। अगले दिन उनकी बेटी का शव बरामद हुआ।

हालांकि इस हादसे में कुछ लोगों ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत से जान बचाई। नाव पर सवार करीना नाम की बच्ची ने बताया कि जब नाव डूबने लगी तो उसने भी नदी में छलांग लगा दी। तैरते हुए वह कम गहराई वाले हिस्से तक पहुंची और एक खंभे का सहारा लेकर सुरक्षित बच गई।

इस घटना के बाद गांव के लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि चमथा रजौली के लोगों को खेती और मजदूरी के लिए रोजाना गंगा पार दियारा जाना पड़ता है। लेकिन सुरक्षित आवागमन के लिए अब तक पक्के पुल की व्यवस्था नहीं हो सकी है। चुनाव के दौरान पुल बनाने के वादे जरूर किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक उनकी समस्या आज भी बनी हुई है।

ग्रामीणों ने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और दियारा क्षेत्र में पुल निर्माण कराने की मांग की है।

NDRF-SDRF के अभियान में मिले दोनों शव

हादसे के बाद बुधवार शाम SDRF की टीम ने तलाश अभियान शुरू किया था। अंधेरा होने के कारण पहले दिन दोनों लापता लोगों का पता नहीं चल सका। गुरुवार सुबह NDRF की टीम भी पहुंची। इसके बाद संयुक्त अभियान चलाकर दोनों के शव बरामद किए गए।

यह घटना सिर्फ एक नाव हादसा नहीं, बल्कि उन लोगों की रोजमर्रा की परेशानी भी सामने लाती है, जिन्हें अपनी रोजी-रोटी के लिए हर दिन नदी पार करनी पड़ती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे के बाद दियारा के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल पाएगी?

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