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किन्नर का रोल निभाकर बॉलीवुड पर छा गए थे ये सितारे, एक तो आज बन गया है सुपरस्टार!
हिंदी सिनेमा के दमदार एक्टर आशुतोष राणा के बिना तो ये लिस्ट अधूरी है. एक्टर ने फिल्म ‘संघर्ष’ में किन्नर का ऐसा किरदार निभाया था. जिसे देख आज भी दर्शकों की रूह कांप जाती है. इस रोल के जरिए आशुतोष इंडस्ट्री पर छा गए थे. बता दें कि इस रोल के लिए एक्टर ने बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता था.
आपको जानकर हैरानी होगी कि आज हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार बन चुके राजकुमार राव भी इस लिस्ट में शामिल है. एक्टर ने ‘एमी साइरा बानो’ में एक किन्नर का रोल निभा चुके हैं. इस फिल्म में उनके किरदार की खूब प्रशंसा हुई थी. यही से एक्टर को पहचान मिलनी भी शुरू हो गई थी.
कई सुपरहिट फिल्मों में नेगेटिव रोल निभा चुके सदाशिव भी किन्नर के रोल में नजर आ चुके हैं. एक्टर सड़क फिल्म में किन्नर बने थे. इस रोल के जरिए उन्होंने बड़े पर्जे पर दमदार छाप छोड़ी थी. इसके लिए उन्हें बेस्ट विलेन का अवॉर्ड भी मिला था.
फिल्मों में विलेन और कॉमेडीयन का किरदार निभा चुके एक्टर परेश रावल का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है. एक्टर ने साल 1998 में ‘तमन्ना’ फिल्म में किन्नर का दमदार रोल निभाया था. जिसे देखकर आज भी लोग उनकी तारीफ करते हुए नजर आते हैं.
इस लिस्ट में रवि किशन का है. जिन्होंने फिल्म ‘रज्जो’ में किन्नर का रोल निभाया था. इस फिल्म में एक्टर के रोल को दर्शकों ने काफी ज्यादा पसंद किया था और उनका करियर को भी अलग पहचान मिली थी.
बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता महेश मांजरेकर का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है और महेश मांजरेकर ने फिल्मो में ज्यादातर नेगेटिव रोल निभाकर खूब सुर्खियाँ बटोरे है और साल 2013 में आई फिल्म ‘रज्जो’ में महेश मांजरेकर एक किन्नर के किरदार में नजर आये थे और इस फिल्म में महेश मांजरेकर के एक्टिंग को खूब सराहना मिली थी |
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ये कोई मामूली आदमी नही है। आज केंद्र में मोदी इसी आदमी की वजह से सरकार बना पाने में सक्षम हुए हैं क्योंकि इस आदमी ने दो बहुत ही महत्वपूर्ण काम किये ।
पहला आंध्र प्रदेश में टीडीपी और भाजपा को करीब लाना और दोनों में गठबंधन करवाना और दूसरा तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों में भाजपा के साथ मिलकर "कोंग्रेस हटाओ देश बचाओ" का नारा देकर जनता के बीच जाना।
इस आदमी का कितना प्रभाव पड़ा इस चुनाव में इसका आप इसी से अंदाजा लगा लो कि तेलंगाना की 17 में से 8 सीट भाजपा जीत गई और आंध्र प्रदेश की 25 में से 3 सीट भाजपा जीती। वहीं इस आदमी ने 16 सीटें टीडीपी को दिलवाने में मदद की।
जबकि ये आदमी ना तो भाजपा से है ना टीडीपी से है बल्कि इसका अलग राजनीतिक दल है जनसेना नाम से।
सोचिए, एक आदमी जिस का खुद का एक अलग राजनीतिक दल है जनसेना नाम से लेकिन वो आदमी कांग्रेस को दक्षिण में रोकने के लिए भाजपा और टीडीपी को करीब लाकर ना सिर्फ गठबंधन करवाता है बल्कि भाजपा की तेलंगाना में मदद भी करता है, जहां भाजपा का जनाधार बहुत ही कम था।
इस की वजह से आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को इस बार अच्छी खासी सफलता प्राप्त हुई है। जहां विधानसभा की 175 में से टीडीपी को 135 तो भाजपा को 8 सीटें मिलीं और जनसेना को 21 सीटें मिलीं ।
अगर ये न होता तो आज भाजपा को लोकसभा में 240 सीट भी ना मिलतीं।
नाम पवन कल्याण