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हनुमान चालीसा भाव यात्रा के गतांक में हमने हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै चौपाई का भाव समझा था। हमने जाना कि श्रीहनुमानजी के हाथ में ध्वजा केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और प्रभु कार्य के लिए समर्पित जीवन का संदेश है। साथ ही “मूंज जनेऊ” के माध्यम से तुलसीदासजी ने हमें संस्कार, संकल्प और आत्मनियंत्रण का महत्व समझाया।

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