पिता ने जमीन बेची दोनों बेटों को पता चला तो पीट-पीटकर मार डाला
#rajasthan #gumanpura
बहुत ही दुखद😥😢
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📰 ताज़ा खबर | इनकमिंग कॉल बंद होने पर सड़कों पर उठा सवाल
शहर की व्यस्त सड़क पर एक युवती द्वारा उठाया गया पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्टर में लिखा है कि “सिम कार्ड मेरा, मोबाइल मेरा, फिर इनकमिंग कॉल पर ताला क्यों?”
इस मुद्दे को लेकर युवा नेता राकेश पाल का बयान भी चर्चा में है। उनका कहना है कि बैलेंस खत्म होने पर आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल बंद करना गरीब और आम उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
पोस्टर में साफ संदेश दिया गया है कि कंपनियों द्वारा इनकमिंग बंद कर देना लोगों से जबरन रिचार्ज करवाने जैसा है। खासकर गांव और छोटे शहरों के लोगों के लिए यह नियम बड़ी परेशानी बन सकता है।
📌 यह मामला अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। लोग कमेंट कर अपनी राय दे रहे हैं — “Yes”, “No” या अपनी प्रतिक्रिया टाइप कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और टेलीकॉम कंपनियां इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती हैं।
👉 आप क्या सोचते हैं? क्या इनकमिंग कॉल बंद करना सही है?
📰 बड़ी राजनीतिक बहस | क्या मतदाताओं को मिले जनप्रतिनिधियों को हटाने का अधिकार?
नई दिल्ली: हाल ही में मतदाताओं के अधिकारों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। युवा नेता राकेश पाल ने बयान दिया है कि लोकतंत्र को और मजबूत बनाने के लिए मतदाताओं को अपने विधायक और सांसद को कार्यकाल के दौरान हटाने का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, इसलिए यदि कोई जनप्रतिनिधि उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो मतदाताओं के पास उसे वापस बुलाने (राइट टू रिकॉल) का विकल्प होना चाहिए। उनका मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और राजनीति में पारदर्शिता आएगी।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
📌 फिलहाल यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में है और राजनीतिक गलियारों में भी इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
👉 क्या आप भी चाहते हैं कि मतदाताओं को अपने विधायक और सांसद को हटाने का अधिकार मिले? अपनी राय जरूर दें।
ब्रेकिंग न्यूज़ | आध्यात्मिक गुरु का बड़ा बयान
“प्रहार की उम्मीद थी, लेकिन इतना नीच प्रहार होगा, इसकी कल्पना नहीं थी”
प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु राकेश पाल ने हाल ही में एक बयान जारी कर कहा कि उन्हें विरोध और आलोचना की आशंका थी, लेकिन जिस स्तर का हमला हुआ, वह उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक नीचे था। उनके इस बयान के बाद समर्थकों में आक्रोश और चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
राकेश पाल ने कहा कि वे हमेशा सकारात्मक संवाद और सामाजिक समरसता के पक्षधर रहे हैं, लेकिन हाल की घटनाओं ने उन्हें आहत किया है। उन्होंने अपने अनुयायियों से शांति बनाए रखने और सत्य के मार्ग पर चलने की अपील की।
सोशल मीडिया पर उनका यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थक इसे “सत्य की आवाज़” बता रहे हैं, जबकि कुछ आलोचक इसे राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल, पूरे मामले पर आगे की प्रतिक्रिया और संभावित कदमों को लेकर सभी की निगाहें राकेश पाल और उनकी टीम पर टिकी हैं
दिन दहाड़े ऑटो में युवती से छेड़छाड़, वीडियो वायरल!
शहर की सड़कों पर सुरक्षा पर फिर उठे सवाल।
दिनदहाड़े एक ऑटो में बैठी युवती के साथ एक युवक द्वारा अभद्र हरकत करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि युवक बाइक से ऑटो के पास आया और युवती को परेशान करने लगा।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
📢 लोगों की मांग:
• आरोपी की तुरंत पहचान कर गिरफ्तारी हो
• महिलाओं की सुरक्षा के लिए सड़कों पर गश्त बढ़े
• सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी निगरानी मजबूत हो
👉 सवाल ये है कि आखिर सड़कों पर महिलाएं कब सुरक्षित महसूस करेंगी?
सनसनीखेज खबर | ट्रेन में दिखी अनोखी सोच! 🔥
ट्रेन में सबने लिया चाय–समोसा, लड़की ने चुना मिट्टी का दिया — बोली “रोशनी साथ ले जाऊंगी”
एक सामान्य सी ट्रेन यात्रा उस वक्त खास बन गई जब एक युवती ने भीड़ से अलग सोच दिखाते हुए चाय-सामोसे की जगह मिट्टी का कुल्हड़ चुना। जहां बाकी यात्री सिर्फ सफर का आनंद ले रहे थे, वहीं इस लड़की ने परंपरा और पर्यावरण का संदेश दे दिया।
बताया जा रहा है कि युवती ने कहा –
👉 “मैं सिर्फ चाय नहीं, रोशनी और अपनी संस्कृति की खुशबू साथ लेकर जा रही हूं।”
इस छोटी सी सोच ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। लोग कह रहे हैं कि आज के दौर में जहां प्लास्टिक और दिखावे का चलन बढ़ रहा है, वहां मिट्टी के कुल्हड़ और दीये जैसी चीज़ें हमारी जड़ों से जुड़ाव दिखाती हैं।
🌿 पर्यावरण प्रेम या भावनात्मक संदेश?
कुछ लोग इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़ रहे हैं, तो कुछ इसे भारतीय परंपरा का सम्मान बता रहे हैं।
💬 सोशल मीडिया पर यूज़र्स के कमेंट:
• “ऐसी सोच ही देश को आगे बढ़ाती है।”
• “छोटी चीज़, लेकिन बड़ा संदेश!”
• “परंपरा से प्यार करने वाली नई पीढ़ी।”
यह घटना अब तेजी से वायरल हो रही है और लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है —
क्या हम भी अपने रोजमर्रा के फैसलों में कुछ अलग और सकारात्मक चुन सकते हैं?
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प्रत्येक खिलाड़ी अपना सम्मान जनक रिटायरमेंट लेता है।
ठीक उसी तरह से मोदी जी को भी अपने सम्मानजनक रिटायरमेंट के बारे में सोचना चाहिये।
कल मेरठ की रैली में उनका निष्तेज और खीझा चेहरा और नदारद भीड़ इस ओर स्पष्ट इशारा कर रहा है।
मीडिया और IT Cell की पॉलिशिंग से अब इस राजनीतिक चेहरे की झुर्रियाँ जाने वाली नहीं हैं। जनता भी अब इनको विक्टिम कार्ड खेलने देने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है।
मुश्किल से 5-6 हज़ार की भीड़ मोदी जी की लोकप्रियता में भारी गिरावट का स्पष्ट संकेत दे रही है। इसमें UGC Act का बहुत बड़ा योगदान है।
अभी भी बहुत कुछ बिगड़ा नहीं है, मोदी जी को साफ़ मन से UGC के विभेदकारी कानून को वापस ले लेना चाहिये।
मेरा यह सुझाव मोदी जी को 3 बार लोकसभा में चुनकर भेजने वाले वोटर और शुभचिंतक के रूप में है।