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#उत्तर_प्रदेश के महाराजगंज में एक #बेटी की वजह से पूरा #परिवार_तबाह होने से #बच गया 👇

इस लड़की ने #पुलिस थाने में #लाइसेंसी बंदूक लेकर पहुंच गई, #बंदूक देखते ही सब #पुलिसकर्मी इधर-उधर #भागने लगे/

तभी एक #दरोगा जी ने #हिम्मत दिखाई और लड़की के पास गए, और लड़की से बंदूक लिए, दरअसल लड़की के #पापा ओर #चाचा में 3 फुट #जमीन के लिए रोज #झगड़ा होता था/ लड़की के पापा कई बार लाइसेंसी बंदूक लेकर चाचा पर #टूट पड़ते थे/

बेटी को डर था कि किसी दिन चाचा को पापा #गोली न मार दे/ लड़की ने कहा — सर ये बंदूक #थाने में रख लीजिए,नहीं तो पापा चाचा को मार देंगे ,पुलिस ने परिवार के बीच चल रहे विवाद की #जांच शुरू कर दी/

कभी-कभी परिवार को बचाने के लिए बड़ा #फैसला लेना पड़ता है… इस बेटी ने भी शायद वही किया.

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#news #newsupdate #newsfeed

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रक्षाबंधन मनाकर दिल्ली गया था चार बहनों का इकलौता भाई, 5 मंजिला इमारत में दब गया और हो गई मौत!
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बाढ़ में डूबे घर से सामान लेने गए पिता-पुत्र, बेटे को करंट लगा तो बचाने पहुंचे पिता की भी मौ,त, ग्रामीणों ने सड़क जाम किया बेगूसराय जिले के बीहट में बरौनी रिफाइनरी थाना क्षेत्र की केशावे पंचायत के सिसवा गांव के वार्ड-11 में सोमवार को बाढ़ प्रभावित घर में करंट लगने से पिता और पुत्र की मौ,त हो गयी. मृ,तकों की पहचान 50 वर्षीय कैलाश मोची और उनके 26 वर्षीय पुत्र संतोष कुमार के रूप में हुई है. घ,टना के बाद गांव में कोहराम मच गया. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
सामान निकालने गए थे घर, इसी दौरान चपेट में आए
जानकारी के अनुसार, सिसवा गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश करने के बाद कैलाश मोची का परिवार विस्थापित होकर सुरक्षित स्थान पर रह रहा था. सोमवार की सुबह कैलाश अपने पुत्र संतोष के साथ बाढ़ प्रभावित घर से कुछ जरूरी सामान निकालने गए थे. इसी दौरान घर में जमा पानी अथवा बिजली के उपकरण में उतरे करंट की चपेट में दोनों आ गए.
ग्रामीणों के अनुसार, पहले संतोष करंट की चपेट में आया. उसे बचाने की कोशिश में कैलाश भी बिजली के तेज झटके की चपेट में आ गए. हा,दसे में दोनों की मौके पर ही मौ,त हो गयी.
मुआवजे की मांग पर सड़क जाम
घ,टना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर बीहट-रिफाइनरी रोड जाम कर वि,रोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. सड़क जाम होने से आवागमन प्रभावित हो गया. ग्रामीण मृतकों के परिजनों को तत्काल मुआवजा देने की मांग पर अड़े रहे.
पुलिस और बीडीओ पहुंचे मौके पर
घ,टना की सूचना मिलते ही बरौनी रिफाइनरी थाना की पुलिस मौके पर पहुंची. वहीं, बरौनी बीडीओ अनुरंजन कुमार भी घ,टनास्थल पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया. हालांकि, ग्रामीण मुआवजे की मांग पर अड़े रहे. प्रशासन की ओर से लोगों को उचित का,र्रवाई का भरोसा दिलाया गया.

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने विधानसभा में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक जीत में महिलाओं की अहम भूमिका रही है और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि राजनीतिक आलोचना तीखी हो सकती है, लेकिन महिलाओं का अपमान नहीं होना चाहिए. दरअसल उदयनिधि स्टालिन ने एक्ट्रेस तृषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, उसी पर विजय ने स्टालिन को घेरते हुए यह बयान दिया है.

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Success Story: 'ताने नहीं, गर्व की वजह बनूं', इसलिए UPSC चुना, KBC में ₹1Cr विजेता IPS मोहिता शर्मा की कहानी
IPS Mohita Sharma Success Story: माता-पिता की इकलौती संतान होने की वजह से लोग ताने देते थे। लेकिन मोहिता शर्मा ने ठान लिया था कि वे अपने पेरेंट्स के लिए एक दिन गर्व की वजह बनेंगी। कई मुश्किलें आईं, फिर भी वे अपने अटूट हौसले के साथ डटकर खड़ी रहीं और 4 बार असफलताओं के बाद 5वीं बार में यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम क्रैक करके IPS ऑफिसर बनी थीं। इसके बाद, KBC में 1 करोड़ रुपये जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचयKBC 1 Crore Winner: अगर आपका लक्ष्य साफ है और उसे पाने की इच्छाशक्ति दृढ़ है, तो समाज के ताने आपकी राह का रोड़ा नहीं बन सकते हैं। IPS ऑफिसर मोहिता शर्मा की सक्सेस स्टोरी इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। जिन्होंने ठान लिया था कि वे माता-पिता के लिए ताने की वजह नहीं, बल्कि गर्व की वजह बनेंगी। कई मुश्किलें आईं, कई बार निराशा हुई, गलतियों से सीखा, लेकिन कभी हार नहीं मानी। इसीलिए उनकी सफलता देश की अनगिनत बेटियों के लिए मिसाल से कम नहीं है।मोहिता शर्मा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की रहने वाली हैं। लेकिन उनका जन्म दिल्ली में हुआ है। उनके पिता मारुति उद्योग लिमिटेड से रिटार्ड हैं, जबकि मां होम मेकर हैं। मोहिता की स्कूलिंग DPS द्वारका से हुई है। वे पढ़ाई में बचपन से होशियार रही हैं। 10वीं बोर्ड रिजल्ट में उनके 92.20% नंबर और 12वीं में 90.70% नंबर आए थे।अपने माता-पिता की इकलौती संतान होने की वजह से मोहिता और उनके परिवार को कई तरह के सामाजिक ताने और रूढ़िवादिता का सामना करना पड़ता था। उन्होंने बचपन से ही अपने मां-बाप के त्याग को देखा और मन में यह संकल्प लिया कि वह कुछ ऐसा बड़ा करेंगी जिससे उनके माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा हो सके।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'मैंने मन में ठान लिया था कि मैं अपने माता-पिता को गर्व करने का मौका दूंगी, ताकि मेरे जन्म के समय से ही उन्हें जो ताने सुनने पड़ रहे थे, उनके सामने वे हमेशा गर्व से सिर उठाकर जी सकें।'12वीं में 90.70% अंक प्राप्त करने की वजह मोहिता को भारती विद्यापीठ कॉलेज में आसानी से एडमिशन मिल गया। उन्होंने साल 2012 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। लेकिन इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने देश सेवा को चुना। कॉलेज से निकलते ही उन्होंने कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी।

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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बीच 6 साल की बच्ची के जिंदा बचने की खबर ने सभी को हैरान कर दिया। रसुवा जिले के टिमुरे में बच्ची करीब तीन दिनों तक मलबे और मिट्टी के नीचे दबी रही।

भोटेकोशी बाढ़ के बाद तलाश और बचाव अभियान में जुटी सशस्त्र पुलिस टीम को मिट्टी के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। पुलिस ने तुरंत खोज शुरू की और बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बचाव के बाद उसकी हालत कमजोर होने पर काठमांडू ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन रात और खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। शनिवार दोपहर बच्ची को काठमांडू लाया गया, जहां अस्पताल में उसका इलाज जारी है।

तीन दिनों बाद मलबे के नीचे से जिंदगी की यह उम्मीद, बचाव दल की तत्परता की बड़ी मिसाल है।

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