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Udhwarthanam Massage in Houston: How It Differs From Abhyangam
An ancient type of Ayurvedic massage, the Udhwarthanam Massage in Houston uses dry or semi-dry herbal powders rather than oils. A therapist applies strong, upward strokes that oppose the movement of hair on the skin during this kind of massage. This process produces friction, which aids in the body's cleansing, circulation, and breakdown of fatty deposits. Read this full blog at: https://www.patanjaliwellness.....us/udhwarthanam-mass

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श्री कृष्ण कहते हैं जो हुआ अच्छा हुआ,
जो हो रहा है वह भी अच्छा है,
और जो होगा वह सबसे अच्छा होगा।

इसलिए चिंता मत करो, मुझ पर विश्वास रखो, मैं तुम्हारे साथ हूँ।

जय श्री कृष्ण || राधे राधे🌿

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महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में शुक्रवार को एक दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। युवक कुणाल चांदगुडे और उनके माता-पिता मुरलीधर और संगीता चांदगुडे पहाड़ी से गहरी खाई में गिरकर मारे गए। पुलिस के अनुसार, घटना की जड़ आईफोन की ईएमआई को लेकर हुआ पारिवारिक विवाद था।

पुलिस ने बताया कि कुणाल ने आईफोन खरीद लिया था, लेकिन उसकी मासिक किस्तें चुकाने में असमर्थ था। वह परिवार से पैसे मांग रहा था। ताजा ईएमआई भुगतान को लेकर पिता से तीखी बहस के बाद गुस्से में कुणाल सुबह करीब 10 बजे घर छोड़कर तिसगांव इलाके की खवल्या (खवाड्या) पहाड़ी पर चढ़ गया और आत्महत्या की धमकी देने लगा। यह इलाका वालुज एमआईडीसी पुलिस स्टेशन की सीमा में आता है।

करीब तीन घंटे तक स्थानीय लोग, पूर्व सरपंच संजय जाधव, पुलिस और फायर ब्रिगेड के जवान उसे समझाने की कोशिश करते रहे। कुछ लोगों ने आईफोन 15 प्रो दिलाने का वादा भी किया। वायरल वीडियो में दिखता है कि लोग कहते हैं कि अपनी मां के लिए जीओ, लेकिन कुणाल का जवाब था, नहीं, मुझे मरना ही है। यही एकमात्र रास्ता बचा है।

इस बीच स्थानीय ग्रामीण, पुलिसकर्मी और दमकल विभाग के अधिकारी भी बचाव के लिए मौके पर एकत्र हो गए। दमकलकर्मियों ने पहाड़ी के नीचे सुरक्षा जाल बिछाने की कोशिश की, लेकिन कुणाल चट्टान के किनारे अपनी जगह बदलता रहा, जिससे उनकी कोशिशें नाकाम हो गईं।

दोपहर करीब एक बजे इस मामले में नया मोड़ तब आ गया, जब मुरलीधर अपने बेटे को समझाने के लिए उसके करीब गए, लेकिन कुणाल खड़ी पहाड़ी से कूद गया। मुरलीधर ने उसे बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन इस दौरान उनका भी संतुलन बिगड़ गया और वे भी पहाड़ी से नीचे गिर गए।

एक अधिकारी ने बताया कि अपने पति और बेटे को गिरकर मरते हुए देखकर संगीता ने भी कुछ ही देर बाद पहाड़ी से छलांग लगा दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने शवों को बरामद कर लिया है।

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51 शक्तिपीठों में मां ज्वाला देवी का मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर भगवान शिव और शक्ति को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से देवी सती के शरीर के 51 हिस्से किए थे, यह सभी अंग जहां-जहां गिरे वहीं पर शक्तिपीठ बन गए।

माना जाता है कि, ज्वाला देवी मंदिर में मां सती की जीव गिरी थी। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी का मंदिर जो प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

ज्वाला देवी मंदिर में सदियों से बिना तेल बाती और ईंधन के प्राकृतिक रूप से नौ ज्वालाएं जल रही हैं। नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला जो चांदी के जाला के बीच में हैं, महालाकी कहा जाता है।

वहीं अन्य 8 ज्योति अन्नपूर्णा, चण्डी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, आम्बिका और अंजी देवी ज्वाला देवी मंदिर में वास करती हैं।

ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा यह कहती है कि, भक्त गोरखनाथ यहां माता की आराधना करते थे। वह माता के परम भक्तों में शामिल थे। एक बार गोरखनाथ को काफी तेज भूख लगी और उन्होंने माता से बोला कि आप आग जलाकर पानी गर्म करो, मैं भिक्षा मांगकर लाता हूं।

माता गोरखनाथ के कहने पर आग जला दी, काफी समय बीत जाने के बाद भी गोरखनाथ नहीं लौटे। कहा जाता है कि, तब से माता अग्नि जलाकर गोरखनाथ का इंतजार कर रही हैं। ऐसी मान्यता है कि सतयुग आने पर ही गोरखनाथ मंदिर लौटेंगे। तब तक यह ज्वाला इसी तरह जलती रहेगी।

ज्वाल देवी शक्तिपीठ मंदिर के आस पास ज्वाला के अलावा एक ऐसा भी चमत्कारी कुआं हैं जिसे गोरख डिब्बी कहा जाता है। इस कुंड को देखने में ऐसा लगता है कि, मानो पानी काफी तेजी से खौल रहा है लेकिन जब पानी को स्पर्श करते हैं, तो पानी ठंडा लगता है।

कहा जाता है कि, मुगल सम्राट अकबर ने एक बार लोहे के ढक्कन से आग को ढककर और पानी की व्यवस्था करके उसे बुझाने की कोशिश की थी, लेकिन वह अपने सभी प्रयासों में बुरी तरह असफल हुआ।

तब अकबर ने मंदिर में सोने का एक छाता भेंट किया। हालांकि देवी की शक्ति के प्रति उनके संदेह के कारण सोना एक अज्ञात धातु में बदल गया। इस घटना के बाद अकबर के मन में देवी के प्रति आस्था और मजबूत हो गई।

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