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When evil has no name anymore ! Who the hell thought making people walking explosives is a good idea ? This is not good !! This is evil 👿 #lebanon #attack #evil #israel When your device becomes ur bomb baby !! Let us embrace for the new world evil !

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When evil has no name anymore ! Who the hell thought making people walking explosives is a good idea ? This is not good !! This is evil 👿 #lebanon #attack #evil #israel When your device becomes ur bomb baby !! Let us embrace for the new world evil !

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आज नौबस्ता में श्री तिरुपति ऑटो महिंद्रा क्यूब में #thar_roxx की लांचिंग के अवसर पर बिठूर विधायक छोटे भाई श्री अभिजीत सिंह सांगा जी के साथ बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित होकर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की, यहां नितिन गुप्ता, मनीष गुप्ता, उमंग गुप्ता, आचार्य लंकेश, प्रशांत जी सहित कंपनी के अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे..

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आज नौबस्ता में श्री तिरुपति ऑटो महिंद्रा क्यूब में #thar_roxx की लांचिंग के अवसर पर बिठूर विधायक छोटे भाई श्री अभिजीत सिंह सांगा जी के साथ बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित होकर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की, यहां नितिन गुप्ता, मनीष गुप्ता, उमंग गुप्ता, आचार्य लंकेश, प्रशांत जी सहित कंपनी के अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे..

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आज नौबस्ता में श्री तिरुपति ऑटो महिंद्रा क्यूब में #thar_roxx की लांचिंग के अवसर पर बिठूर विधायक छोटे भाई श्री अभिजीत सिंह सांगा जी के साथ बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित होकर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की, यहां नितिन गुप्ता, मनीष गुप्ता, उमंग गुप्ता, आचार्य लंकेश, प्रशांत जी सहित कंपनी के अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे..

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पूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती है सत्‍यनारायण व्रत कथा...?

आमतौर पर देखा जाता है किसी शुभ काम से पहले या मनोकामनाएं पूरी होने पर सत्यनारायण व्रत की कथा सुनने का विधान है। सनातन धर्म से जुड़ा शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीसत्यनारायण कथा का नाम न सुना हो। इस कथा को सुनने का फल हजारों सालों तक किए गये यज्ञ के बराबर माना जाता है । शास्त्रों के मुताबिक ऐसा माना गया है कि इस कथा को सुनने वाला व्यक्ति अगर व्रत रखता है तो उसेके जीवन के दुखों को श्री हरि विष्णु खुद ही हर लेते हैं । स्कन्द पुराण के मुताबिक भगवान सत्यनारायण श्री हरि विष्णु का ही दूसरा रूप हैं । इस कथा की महिमा को भगवान सत्यनारायण ने अपने मुख से देवर्षि नारद को बताया है । पूर्णिमा के दिन इस कथा को सुनने का विशेष महत्व है । कलयुग में इस व्रत कथा को सुनना बहुत प्रभावशाली माना गया है ।
जो लोग पूर्णिमा के दिन कथा नहीं सुन पाते हैं वे कम से कम भगवानसत्यनारायण का मन में ध्यान कर लें । विशेष लाभ होगा । पुराणों में ऐसा भी बताया गया है कि जिस स्थान पर भी श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा होती है, वहां गौरी-गणेश, नवग्रह और समस्त दिक्पाल आ जाते हैं। केले के पेड़ के नीचे अथवा घर के ब्रह्म स्थान पर पूजा करना उत्तम फल देता है। भोग में पंजीरी, पंचामृत, केला और तुलसी दल विशेष रूप से शामिल करें।

सिर्फ पूर्णिमा को ही नहीं परिस्थितियों के मुताबिक किसी भी दिन कथा सुनी जा सकती है, बृहस्पतिवार को कथा सुनना विशेष लाभकारी होता है, भगवान तो बस भाव के भूखे हैं । मन में उनके प्रति अगर सच्चा प्रेम है तो कोई भी दिन हो प्रभु की कृपा बरसती रहेगी । इस कथा के प्रभाव से खुशहाल जीवन, दाम्पत्य सुख, मनचाहे वर-वधु, संतान, स्वास्थ्य जैसी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है । अगर पैसों से जुड़ी कोई समस्या है तो ये कथा किसी संजीवनी से कम नहीं है । तो जब भी मौका मिले भगवान की कथा सुने और सुनाएं ।

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कौए का रहस्य और पितृपक्ष .....
कौए के संबंध में पुराणों बहुत ही विचित्र बाते बतलाई गई है मान्यता है की कौआ अतिथि आगमन का सूचक एवं पितरो का आश्रम स्थल माना जाता है।

हमारे धर्म ग्रन्थ की एक कथा के अनुसार इस पक्षी ने देवताओ और राक्षसों के द्वारा समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत का रस चख लिया था. यही कारण है की कौआ की कभी भी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती. यह पक्षी कभी किसी बिमारी अथवा अपने वृद्धा अवस्था के कारण मृत्यु को प्राप्त नहीं होता. इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से होती है।

यह बहुत ही रोचक है की जिस दिन कौए की मृत्यु होती है उस दिन उसका साथी भोजन ग्रहण नहीं करता. ये आपने कभी ख्याल किया हो तो यह बात गौर देने वाली है की कौआ कभी भी अकेले में भोजन ग्रहण नहीं करता यह पक्षी अपने किसी साथी के साथ मिलकर ही भोजन करता है।

कौआ की लम्बाई करीब 20 इंच होता है, तथा यह गहरे काले रंग का पक्षी है. जिनमे नर और मादा दोनों एक समान ही दिखाई देते है. यह बगैर थके मिलो उड़ सकता है. कौए के बारे में पुराण में बतलाया गया है की किसी भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास पूर्व ही हो जाता है।

पितरो का आश्रय स्थल श्राद्ध पक्ष में कौए का महत्व बहुत ही अधिक माना गया है . इस पक्ष में यदि कोई भी व्यक्ति कौआ को भोजन कराता है तो यह भोजन कौआ के माध्यम से उसके पीतर ग्रहण करते है। शास्त्रों में यह बात स्पष्ट बतलाई गई है की कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में विचरण कर सकती है।

भादौ महीने के 16 दिन कौआ हर घर की छत का मेहमान बनता है. ये 16 दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं. कौए एवं पीपल को पितृ प्रतीक माना जाता है. इन दिनों कौए को खाना खिलाकर एवं पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है।

कौवे से जुड़े शकुन और अपशकुन ....

यदि आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हो कौआ को भोजन करना चाहिए।
यदि आपके मुंडेर पर कोई कौआ बोले तो मेहमान अवश्य आते है।
यदि कौआ घर की उत्तर दिशा से बोले तो समझे जल्द ही आप पर लक्ष्मी की कृपा होने वाली है।
पश्चिम दिशा से बोले तो घर में मेहमान आते है।
पूर्व में बोले तो शुभ समाचार आता है।
दक्षिण दिशा से बोले तो बुरा समाचार आता है।
कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है।

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*पेड़ो के बारे मे महत्वपूर्ण जानकारी*
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पेड़ धरती पर सबसे पुरानें लिविंग ऑर्गनिज्म हैं, और ये कभी भी ज्यादा उम्र की वजह से नही मरते.
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हर वर्ष ५- ६ अऱब पेड़ लगाए जा रहे है लेकिन हर वर्ष १० अऱब पेड़ काटे भी जा रहे हैं.
एक पेड़ दिन में इतनी ऑक्सीजन देता है कि ४ आदमी जिवित रह सकें.
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देशों की बात करें, तो दुनिया में सबसे ज्यादा पेड़ रूस में है उसके बाद कनाडा में उसके बाद ब्राज़ील में फिर अमेरिका में और उसके बाद भारत में केवल ३५ अऱब पेड़ बचे हैं.
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दुनिया की बात करें, तो १ मनुष्य के लिए ४२२ पेड़ बचे है. लेकिन अगर भारत की बात करें,तो १ हिंदुस्तानी के लिए सिर्फ २८ पेड़ बचे हैं.
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पेड़ो की कतार धूल-मिट्टी के स्तर को ७५% तक कम कर देती है. और ५०% तक शोर को कम करती हैं.
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एक पेड़ इतनी ठंड पैदा करता है जितनी १ A.C १० कमरों में २० घंटो तक चलने पर करता है. जो इलाका पेड़ो से घिरा होता है वह दूसरे इलाकों की तुलना में ९ डिग्री ठंडा रहता हैं.
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पेड़ अपनी १०% खुराक मिट्टी से और ९०% खुराक हवा से लेते है.
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एक एकड़ में लगे हुए पेड़ १ वर्ष में इतनी Co2 सोख लेते है जितनीएक कार ४१,००० किलो मीटर चलने पर छोड़ती हैं.
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दुनिया की २०% oxygen अमेजन के जंगलो द्वारा पैदा की जाती हैं. ये जंगल ८ करोड़ १५ लाख एकड़ में फैले हुए हैं.
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इंसानो की तरह पेड़ो को भी कैंसर होती है.कैंसर होने के बाद पेड़ कम ऑक्सीजन देने लगते हैं.
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पेड़ की जड़े बहुत नीचे तक जा सकती है. दक्षिण अफ्रीका में एक अंजीर के पेड़ की जड़े ४०० फीट नीचे तक पाई गई थी.
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दुनिया का सबसे पुराना पेड़ स्वीडन के डलारना प्रांत में है. टीजिक्को नाम का यह पेड़ ९,५५० वर्ष पुराना है. इसकी लंबाई करीब १३ फीट हैं.
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तुलसी, पीपल, नीम और बरगद दूसरों के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन पैदा करते हैं.
इस बरसात में कम से कम एक पेड़ अवश्य लगायें।
स्वयं जगें लोगों को जगाएं...मिलकर पर्यावरण बचाएँ
*जय प्रकृति....जय वनस्पति।

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