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भारतीय हॉकी टीम ने एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में एंट्री कर ली है भारत ने सेमीफाइनल में कोरिया को हराया l
#hockey
अबू धाबी के एक तेल अरबपति के पास शुद्ध सफेद सोने की मर्सिडीज-बेंज है. जो 18k सफेद सोने से बनी है, जिसमें 1,600 हॉर्सपावर और 2,800 एनएम टॉर्क वाला V10 क्वाड-टर्बो इंजन है। यह कार 0 से 100 किमी/घंटा की गति 2 सेकंड से भी कम समय में पकड़ती है, 6.89 सेकंड में 1/4 मील की दूरी तय करती है, और जैव ईंधन से चलती है।
दरअसल मनीषा कोईराला की शादी 19 जून 2010 को पारंपरिक नेपाली रीति-रिवाजों से बिजनेसमैन सम्राट से शादी की थी। हालांकि दो साल बाद यानी 2012 में इनका तलाक हो गया। लेकिन इन दो सालों में काफी कुछ हुआ। एक्ट्रेस ने अपनी पहली मुलाकात के बारे में बताया था। मनीषा कोइराला के मुताबिक, उन्हें सम्राट के साथ उन्हें एक खास लगाव महसूस हुआ। या यूं कहें कि उनको देखते ही एक्ट्रेस के दिल में प्यार वाली घंटी बज गई थी। और इसी कारण उन्होंने सम्राट से शादी करने का फैसला किया था। दोनों की शादीशुदा जिंदगी एकदम सही चल रही थी। फैन्स भी इस बात के साक्षी थे कि उनकी चहेती एक्ट्रेस ने एक नए जीवन की शुरुआत की है और वह खुश हैं।vrlover
मगर शादी के 6 महीने बाद ही इनके बीच तलाक जैसी नौबत आ गई। एक्ट्रेस ने अपने ऑफिशियल फेसबुक हैंडल पर एक नोट लिखा था, जिसमें उन्होंने खुलकर इस बात को स्वीकार किया था कि वह सम्राट दहल से तलाक चाहती हैं। एक्ट्रेस ने लिखा था, 'मेरा पति मेरा ही दुश्मन बन गया है। एक औरत के लिए इससे बुरी बात और क्या हो सकती है।' हालांकि दोनों ने अपने मसले सुलझाने की कोशिश की लेकिन बात बनी नहीं। और दोनों ने 2012 में तलाक दायर किया और हमेशा के लिए अलग हो गए। और ये साल एक्ट्रेस के लिए और तूफान लेकर आया था। 2012 में ही एक्ट्रेस को अपने कैंसर का पता चला था। उनका लास्ट स्टेज था। मनीषा के पास काम करने के लिए कोई फिल्म नहीं थी और उनकी शादी भी टूट गई थी। वह ईलाज के लिए न्यूयॉर्क चली गई थीं और 2015 में वह कैंसर मुक्त हो गईं।vr
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बलात्कार के ये दो ताजा मामले दो ऐसे राज्यों से हैं , जहाँ लगभग रोज एक नहीं बल्कि कई - कई बलात्कार - दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं , इन दोनों राज्यों में कानून - पुलिस - प्रशासन का डर ख़त्म हो चुका है दुष्कर्मियों व् अपराधियों के बीच से .. इन दोनों राज्यों में सरकार उन्हीं लोगों की है , जो अपने विरोधी पक्ष के द्वारा शासित राज्यों की इक्का - दुक्का घटनाओं पर सबसे ज्यादा छाती पीटते और कोहराम मचाते हैं , मगर अपने शासन में हो रही घटनाओं पर चुप्पी साध अपनी आँखों पर पट्टी बांध लेते हैं ..
एक राज्य में तो कानून के राज का ऐसा आलम है कि बलात्कार के दोषी की सजा माफ़ करने की अनुशंसा सरकार की तरफ से ही होती है और बलात्कारियों के जेल से बाहर आने पर उनका अभिनन्दन - स्वागत सत्ता पक्ष के द्वारा ही किया जाता है .. वहीं दूसरे राज्य में क्राइम से जीरो कॉम्प्रोमाईज का ढोल तो जम कर पीटा जाता है , मगर बेहिसाब हो रहे अपराध पर लगाम लगाने की कवायद समीक्षा - बैठक के कोरम के साथ ही ख़त्म हो जाती है और सूबे का मुखिया ही माफियागिरी के पर्याय के दरवाजे मत्था टेकने पहुँच जाता है ...