#किस्मत से ज्यादा " उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला पहलवान गोरखपुर की बेटी माडापार निवासिनी पुष्पा यादव ने ओमान में आयोजित अंडर 23 एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में 59 किग्रा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास बनाया बहुत बहुत बधाई
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#किस्मत से ज्यादा " उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला पहलवान गोरखपुर की बेटी माडापार निवासिनी पुष्पा यादव ने ओमान में आयोजित अंडर 23 एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में 59 किग्रा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास बनाया बहुत बहुत बधाई
मिर्जापुर के डायरेक्टर कालीन भैया को डैंक दिखाने के चक्कर में इतना गंदा हगे है इस अंतिम सीन में ककड़ी के कि दिमाग का दही हो गया
पेन छू, जिस जगह पूर्वांचल और पश्चिम के 15, 16 बाहुबली बैठे हों वहां 5 ठुल्लों की टीम सब साफ कर देती है
हर बाहुबली जो मीटिंग करने आया था वो अपने साथ कम से कम खुद की मिला के 3 गाड़ी भर के सिक्योरिटी लेकर तो आया ही होगा सुरक्षा में
हर बाहुबली के साथ मिनिमम 15 आदमी भी मान लो तो 225 आदमी वो भी हथियारों के साथ बाकी उस जगह के बाहुबली की तो पूरी फौज रही होगी
जब कालीन भैया की अंत मे एंट्री होती है तब भी बाहर मेन एंट्रेंस पर कम से कम 10 से ज्यादा आदमी हथियारों से लैस खड़े थे और 10 आदमी अंदर
बेंचु 5 ठुल्लों की टीम पहली मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर आ रही है, ये ससुरे जरूर हेलीकाप्टर से छत पर उतरे होंगे, गॉथम शहर के बैटमैन की तरह
पर असल मुद्दे की बात ये है कि कालीन भैया के गोली चलाने से पहले एक भी गोली नही चली पर जैसे ही गोली चली पुलिस पहले फ्लोर पर हरकत में नजर आयी
इसका मतलब है कि बाहर खड़े 200, 250 शशस्त्र गुंडों को पुल्स ने पहले ही लोरी गा कर या जहरीली चाय पिला कर मौत की नींद सुला दिया होगा और फिर रस्सियों की मदद से पहले माले पर चली गयी होगी क्योंकि सामने के रास्ते से आते तो कालीन भैया की शान में गुस्ताखी हो जाती
बेंचु मिर्जापुर के रॉयटर्स और डायरेक्टर्स ने इस सीन में हगने की हर हद पार कर दी है BTS
नमक सूंघ कर डायरेक्टर्स ने कालीन भैया का आइकॉनिक कमबैक दिखाने के चक्कर में लॉजिक नामक शब्द के साथ जो चमत्कार किया है जनता उसकी जन्म जन्मांतर तक ऋणी रहेगी
'पैसों के लिए बुरे काम किए', हीरोइन बनने के लिए एक्ट्रेस ने झेली मुश्किलें, बोली- भगवान से प्रार्थना...
नीना गुप्ता बॉलीवुड की मोस्ट टैलेंटेड और बिंदास एक्ट्रेस में शुमार हैं. 64 साल की उम्र में भी नीना अपने फैशन सेंस से कहर ढाती हैं.
एक लेटेस्ट इंटरव्यू में नीना गुप्ता ने अपनी जिंदगी से जुड़े कई खुलासे किए हैं.
एक्ट्रेस ने बताया कि करियर की शुरुआत में पैसों की खातिर उन्हें काफी मुश्किल फैसले लेने पड़े थे. पैसों के लिए उन्होंने बुरे काम भी किए, जिन्हें वो नहीं करना चाहती थीं.
एक्ट्रेस बोलीं- जरूरत के हिसाब से ये बदल गया है. पहले जरूरत थी पैसे की ज्यादा, तो पैसों के लिए बहुत बुरे-बुरे काम करने पड़ते थे.
कई बार मैं भगवान से प्रार्थना करती थी कि ये पिक्चर रिलीज ही ना हो.
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि वक्त के साथ और करियर में सफलता मिलने के बाद वो अब प्रोजेक्ट्स को अपनी मर्जी के मुताबिक रिजेक्ट कर पाती हैं. लेकिन पहले ऐसा नहीं था.
नीना गुप्ता ने कहा- अब मैं ना कह सकती हूं. पहले कभी ना नहीं कह सकती थी. जो स्क्रिप्ट मुझे बहुत अच्छी लगती है, रोल बहुत अच्छा लगता है वो हां करती हूं, जो नहीं अच्छा लगता वो नहीं करती हूं.
एक्ट्रेस ने बताया कि वो दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं. करियर की शुरुआत में काम के लिए जब मुंबई गईं तो वहां एडजस्ट होना उनके लिए काफी मुश्किल था.
एक्ट्रेस बोलीं- मैं तो वैसे भी दिल्ली से आई थी, तो बॉम्ब वैसे भी शुरू-शुरू में मुश्किल शहर होता है. हर तीन महीने बाद मैं समान पैक करके दिल्ली लौटने का सोचती थी.
मैं पढ़ी-लिखी थी. मैंने सोचा कि वापस जाकर मैं PhD कर लूंगी. मुझे लगता था कि ये सब मैं हैंडल नहीं कर सकती.
लेकिन बॉम्बे ऐसा शहर है कि जब मैंने सोचा कल जा रही हूं, तो आज रात को लगेगा कि कल कोई काम मिल जाएगा. रोककर रखता है.
नीना गुप्ता के वर्क फ्रंट की बात करें तो एक्ट्रेस ने बधाई हो, ऊंचाई, गुडबाय, लस्ट स्टोरीज 2 जैसी फिल्मों में काम किया है. एक्ट्रेस अब वेब सीरीज 'पंचायत 3' में ग्राम प्रधान मंजू देवी के रोल में दिखेंगी.
Film 'किल'
- एक्शन के नाम पर कितना तांडव झेल सकते हैं आप? अगर आप लगातार हिंसा के दृश्यों को सवा घंटे तक झेल सकें, तो ही यह फिल्म देखने के लिए जाएं।
- यह फिल्म पहले हिंदी में बनी है, और अब हॉलीवुड में इसका रीमेक बन रहा है।
- लगभग पूरी फिल्म स्टूडियो में रेल का डिब्बा बनाकर शूट की गई है।
- धर्मा प्रोडक्शंस वाले कभी रोमांटिक फिल्मों के लिए मशहूर थे, लेकिन अब फिल्म फैक्ट्री चला रहे हैं।
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'किल' फिल्म का नाम होना चाहिए था -'छोटा एनिमल"
कभी रोमांटिक फिल्में बनाने के लिए मशहूर धर्मा प्रोडक्शन की प्योर एक्शन फिल्म है 'किल'। ट्रैन एक्शन थ्रिलर। फिल्म के अधिकांश कलाकार नये हैं। स्थापित कलाकारों में आशीष विद्यार्थी, हर्ष छाया ही हैं।
यह पूरी फिल्म एक रात की, एक ट्रेन यात्रा की, ट्रेन के तीन दो-तीन डिब्बों में तीन घंटे चले घटनाक्रम की कहानी है। यह पहली हिंदी फिल्म है जिसे हॉलीवुड के निर्देशक जॉन क्विक ने अंग्रेज़ी में बनाने का ऐलान किया है।
एकाध को छोड़कर इस फ़िल्म में कोई रोमांटिक सीन, नाच - गाना, डायलॉगबाजी, किसिंग सीन आदि नहीं है। निर्देशक निखिल नागेश भट्ट का कहना है कि 2016 में उन्होंने रांची-पुणे ट्रेन में ऐसी ही एक डकैती देखी थी और उसी से प्रभावित होकर इस फिल्म को बनाया गया है।
यह एक एक्शन फिल्म है तो हीरो को कमांडो के रूप में पेश करना ज़रूरी और मजबूरी थी। हीरो अपने एक कमांडो साथी को लेकर प्रेमिका की पटना से दिल्ली की ट्रेन में, सेकंड ऐसी डिब्बे में चढ़ा है।
ट्रेन में करीब बीस बिहारी- झारखंडी डाकू घुस आये हैं। इनके पास चाकू, खुकरी, कटार जैसे ट्रेडिशनल और पुराने हथियार हैं और उन्होंने ट्रेन के डिब्बों के बीच में लगे शटर को बंद कर ताला लगा दिया है। ट्रेन की सुरक्षा जंजीर को काट दिया है ताकि कोई यात्री ट्रेन को रोकने में कामयाब नहीं हो सके। और साथ ही अपने साथ लाये गये जैमरों से मोबाइल नेटवर्क जाम कर दिया है ताकि निर्बाध होकर लूटपाट कर सकें।
अब ट्रेन में डकैती के दौरान क्या-क्या होता है, इसी पर फ़िल्म है। कमांडो की प्रेमिका का परिवार भी ट्रेन में है और कमांडो भी कोई ऑर्डिनरी कमांडो नहीं है, बल्कि एनएसजी का कमांडो है तो उसकी शक्ति, अक्ल, त्वराबुद्धि, निपुणता डाकुओं से कहीं ज्यादा है।
लेकिन कमांडो केवल दो हैं और डाकुओं की संख्या दस गुनी। डाकू अपने और और साथियों को भी ट्रेन रुकवा कर बुला लेते हैं। अब लड़ाई होती है दो और 40 के बीच। समझ सकते हैं कि भारतीय सेना के कमांडो किसी की जान बचाने पर आये क्या-क्या हो सकता है।