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मेवाड़ के महाराणा लाखा के पौत्र सारंगदेव जी के वंशज सारंगदेवोत राजपूतों का ठिकाना - कानोड़
इस ठिकाने के रावत सारंगदेव ने कुँवर संग्रामसिंह (राणा सांगा) के प्राण बचाए थे।
रावत सारंगदेव के पुत्र रावत जोगा खानवा के युद्ध में बाबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
रावत जोगा के पुत्र रावत नरबद सारंगदेवोत ने चित्तौड़गढ़ के तीसरे शाके में अकबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति पाई।
रावत नरबद के पुत्र रावत नेतसिंह सारंगदेवोत ने हल्दीघाटी के प्रसिद्ध युद्ध में अकबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति पाई।
रावत नेतसिंह के पुत्र रावत भाण सारंगदेवोत ने सोम नदी के युद्ध में विजय प्राप्त की व आजीवन महाराणा प्रताप का साथ दिया।
रावत भाण के पौत्र रावत मानसिंह ने महाराणा राजसिंह का साथ देते हुए औरंगज़ेब के विरुद्ध युद्ध लड़े।
रावत मानसिंह के पुत्र रावत महासिंह सारंगदेवोत ने बांदनवाड़ा के युद्ध में मुगल सेनापति रणबाज़ खां को मारने के बाद वीरगति पाई।
रावत महासिंह के पुत्र रावत सारंगदेव द्वितीय ने मंदसौर में पठानों को पराजित किया।
रावत सारंगदेव द्वितीय की अगली 3 पीढ़ियों (रावत पृथ्वीसिंह, रावत जगतसिंह व रावत जालिमसिंह) ने मराठों के विरुद्ध युद्ध लड़े।
इस प्रकार कानोड़ के सारंगदेवोत राजपूतों ने मेवाड़ के लिए हर वक्त तैयार रहकर महाराणाओं का साथ दिया।
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत
मानसी जोशी, एक भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी, अपनी प्रेरणादायक कहानी और खेल में उपलब्धियों के लिए जानी जाती हैं। उनका जन्म 11 जून 1989 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था। मानसी का जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अहमदाबाद से पूरी की और बाद में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की।
2011 में, एक सड़क दुर्घटना के कारण मानसी को अपना एक पैर गंवाना पड़ा। इस दुर्घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने नए जीवन को एक नई दिशा देने का फैसला किया और पैरा-बैडमिंटन में करियर बनाने की ठानी। दुर्घटना के बाद, मानसी ने पैरा-बैडमिंटन को अपनाया और इस खेल में अपनी मेहनत और प्रतिभा से नया मुकाम हासिल किया। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 2015 में उन्होंने इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
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2019 में, मानसी जोशी ने बासेल, स्विट्ज़रलैंड में आयोजित पैरा-बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और वे भारत की प्रमुख पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक बन गईं। मानसी जोशी केवल एक सफल खिलाड़ी ही नहीं हैं, बल्कि वे समाज में प्रेरणा का स्रोत भी हैं। उन्होंने अपने संघर्ष और उपलब्धियों के माध्यम से कई लोगों को प्रेरित किया है। वे विकलांगता के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने और विकलांग लोगों के अधिकारों के लिए भी सक्रिय रूप से काम करती हैं।