Delhi: मोहम्मद शादाब और मोहम्मद शकील ने पानी टैंकर पर हमला कर दिया।

जान बचाने को ड्राइवर टैंकर लेकर भागा तो मोहम्मद शादाब गाड़ी के नीचे आ गया।

टैंकर पर पत्थर मारने वाले मोहम्मद शादाब की मौके पर ही मौत हो गयी।

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हनुमान मंदिर में जाकर हिंदुओं को फुसलाने वाले वही हैं,
जो अभी कुछ दिन पहले उन्हें हिंसक बोल रहे थे।

मुखौटे बदल-बदल कर, रंग दिखाते हैं,
सियासत की बाज़ी में हिन्दुओ को मोहरे बनाते हैं।

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समुद्री गाय आपने लोगो ने देखी हैं
मैने तो पहली बार देखी हैं
जय गऊ मां

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पैर में बरसाती चप्पल, पत्थर का बेड और अखबार का बिस्तर.. फिर भौकाल में कोई कमी नहीं! यही तो बनारस हौ राजा।🙂

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ओशो ने मांसाहार और शाकाहार पर बहुत सटीक बातें कही हैं।

उन्होंने कहा है कि फल और सब्जियाँ रंगदार और खुशबूदार होती हैं, वो आपको मोहक लगती हैं जबकि मांस देखने में भद्दा और बदबूदार होता है।

किसी फल के बगीचे में चले जायें तो मन खिल जाता है। एक दो फल तोड़ कर खाने का मन करता है, वहीं किसी कत्लगाह में चले जाएँ तो अच्छा खासा स्वस्थ मन भी खराब हो जाए।

फल या सब्ज़ी तोड़ने या काटने पर आपको कोई ग्लानि नहीं होती, उनकी पीड़ा, उनका रोना और चीखना आपको सुनाई या दिखाई नहीं देता, वहीं किसी पश

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अगर आपके पास गांव में 2-4 बीघा जमीन भी है तो कभी उसे भूलकर भी मत बेचना आपकी नौकरी या सर्विस सेक्टर कितना भी अच्छा क्यों ना हो कब ध्वस्त हो जाएगा पता नही चलेगा जिस स्पीड से टेक्नोलॉजी चेंज हो रही है Food Sector को छोड़कर किसी का भी कोई भरोसा नही
हर 15 दिन में कोई नही इनोवेशन होती है और वो हमेशा पुरानी को रिप्लेस करने ही आती है और साथ-साथ पुरानी टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए जो लोग होते है वो या तो बेरोजगार होते है या फिर नही लाइन पकड़ने के लिए भटकते रहते है
आप सिर्फ 10-15 साल का इंतजार करो
क्योंकि जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ रही है उससे खाद्यान्न की डिमांड ओर बढ़ेगी और उसकी सप्लाई कम होगी एक दिन ऐसा समय आएगा जब खूब पैसा देने के बाद भी अनाज नहीं मिलेगा तब सबको किसान नजर आएगा क्योंकि जीना सबसे पहली जरूरत है इंसान की

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पायल मलिक तुमने खुद अपने पति को ला’इसेंस दिया था अपनी दोस्त को घर में बुलाकर।आपने 7 दिन घरमे रखा और खे’ला हो गया।

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ये हैदराबाद नहीं है
ये केरल भी नहीं है
ये बंगाल भी नहीं है

तस्वीरें उत्तराखण्ड के उपचुनाव की हैं

जहाँ मांगलौर विधानसभा उपचुनाव में खातून वोट डालने निकली हैं

हिन्दू पड़ा होगा घरों में, छुट्टियां मनाकर पकौड़े खा रहा होगा

फिर कल को रोयेगा कि उत्तराखण्ड इस्लामखंड बन गया ✍️

मुस्लिम शरणार्थियों/घुसपैठियों/प्रवासियों को स्थान देने का परिणाम कई देशों में तो देखने को मिल रहा है।

परंतु दूर ना जाकर, अपने देश की राजधानी दिल्ली की भी स्थिति कुछ अलग नहीं है।

यहां बसे हुए रोहिंगिया-बांग्लादेशी यहां के मूल निवासियों को भगा रहे हैं।

जहांगीरपुरी, दिल्ली👇