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भारत में दुनिया की दर्ज जैव विविधता का 7-8 प्रतिशत पाया जाता है। लेकिन अगर देश इसका संरक्षण करने में, इसके स्थायी उपयोग को सुनिश्चित करने में या पीढ़ियों से संसाधनों का संरक्षण करने वाले समुदायों के लिए इसके उपयोग से होने वाले लाभों को सुरक्षित करने में असमर्थ है, तो ऐसी विविधता का क्या फायदा?
जैव विविधता के मामले में, देश में किए गए अधिकांश कार्य आंकड़ों और पारदर्शिता की कमी से ग्रस्त हैं।
ऐसे में नई सरकार को क्या करना चाहिए।
इजराइल-गाजा संघर्ष: आम जनता के साथ-साथ पर्यावरण को भी चुकानी पड़ रही भारी कीमत
अनुमान है कि गाजा और इजराइल में इनके पुनर्निर्माण पर करीब 5,000 करोड़ डॉलर का वित्तीय बोझ पड़ेगा। इन बिल्डिंग्स के दोबारा निर्माण और मरम्मत से होने वाले उत्सर्जन को देखें तो वो 6 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर हो सकता है
जंगल के लिए आरक्षित भूमि को दूसरे कार्यों के लिए हस्तांतरण किया जा रहा है। साल 2022-23 में 17,381.88 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली वनभूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए डायवर्ट (बदलाव) किया गया था। जो 2021-22 में डायवर्ट की गई वन भूमि से 3.5 प्रतिशत अधिक है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत डायवर्जन केवल पांच राज्यों-ओडिशा, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ है। डाउन टू अर्थ और सेंटर फॉर साइंस एंंड एनवायरमेंट की सालाना रिपोर्ट स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट इन फिगर्स 2024 में इस पर विस्तार से जानकारी दी गई है