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इतनी फ़िल्में एक दिन में! बताइए देखूं तो क्या-क्या देखूं?
मेरे शहर इंदौर में कभी अंग्रेजी की फ़िल्में मिल्की वे, स्टारलिट और बेम्बिनो मिनी टॉकीज़ में सबसे पहले लगा करती थीं।
बाद में हिन्दी की नवीनतम फ़िल्में सेन्ट्रल सिने सर्किट होने के कारण पहले दिन लगने लगी थीं। राज, प्रकाश, यशवंत, रीगल, मधुमिलन, अलका, ज्योति, एलोरा, अजंता, सपना, संगीता, देवश्री, अभिनवश्री, अमूलश्री आदि टॉकीज़ में नई-नई फ़िल्में लगती थीं।
अब अनेक मल्टीप्लेक्स भी हैं और एक ही दिन में कई फ़िल्में लगती हैं।
इस शुक्रवार को हिन्दी, अंग्रेजी, तमिल, पंजाबी, सिंधी आदि की ड्रामा, रोमांस, हॉरर, कार्टून, साइंस फिक्शन, एक्शन, थ्रिलर, एडवेंचर, कॉमेडी, बायोपिक, स्पोर्ट्स, एनीमेशन, फेंटेसी फ़िल्में लग रही हैं।
हिन्दी की ही (1) हमारे बारह, (2) जेएनयू - जहांगीर नेशनल युनिवर्सिटी, (3) इश्क विश्क रिबाउंड, (4) तृषा ऑन द रॉक्स, (5 ) पुश्तैनी रिलीज़ हो रही हैं। साथ में (6) कुड़ी हरया (पंजाबी), (7 ) देवलो (सिंधी), (8 ) हाइकू (जापानी), (9) महाराजा (तमिल) भी इसी दिन लग रही है। इसके अलावा 8 /10 विदेशी अंग्रेजी फ़िल्में भी हैं। कुछ पुरानी फिल्में भी चल रहीं हैं और कुछ री-रिलीज़ हुई हैं।