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जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ।। पोस्ट३१०।। बालकाण्ड दोहा ५९/५-८, दक्ष प्रजापति के यज्ञ का समाचार।
लगे कहन हरि कथा रसाला।
दच्छ प्रजेस भए तेहि काला।।
देखा बिधि बिचारि सब लायक।
दच्छहि कीन्ह प्रजापति नायक।।
बड अधिकार दच्छ जब पावा।
अति अभिमानु हृदय तब आवा।।
नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं।
प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं।
भावार्थ:- शिवजी सती भगवान हरि की रसमयी कथाएं कहने लगे। उसी समय दक्ष प्रजापति हुए। ब्रम्हा जी ने सब सब प्रकार से योग्य देख - समझकर दक्ष को प्रजापतियों का नायक बना दिया। जब दक्ष ने इतना बड़ा अधिकार पाया तब उनके हृदय में अत्यन्त अभिमान आ गया। जगत में ऐसा कोई नहीं पैदा हुआ जिसको प्रभुता पाकर मद न हो।