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मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के कारण आतंकवाद की घटनाओं में आ रही भारी कमी।

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'हम घाटा झेल रहे, हमारा नुकसान कौन भरेगा...', किसान आंदोलन से परेशान व्यापारियों ने जताया दुख
व्यापारियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की संख्या में 75 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, वहीं 15 हजार से ज्यादा व्यवसायिक वाहनों के पहिए दिल्ली में प्रवेश से पहले ही फंस गए हैं और 25 हजार से ज्यादा व्यवसायिक वाहन दिल्ली में ही फंस गए हैं.

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सत्ता के लालची भेड़ियों ने पांच साल पहले आज़ ही के दिन 14 फ़रवरी 2019 को #पुलवामा_हमले में हमारे 40 जवानों को अपनी वोटों की राजनीति की खातिर मरवा दिया था।
#पुलवामा हमले में शहीद CRPF के अमर वीर जवानों को कोटि कोटि नमन- सत्यपाल मलिक (पूर्व गवर्नर) #satyapalmalik
#pulwamaattack #blackdayforindia

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सत्ता के लालची भेड़ियों ने पांच साल पहले आज़ ही के दिन 14 फ़रवरी 2019 को #पुलवामा_हमले में हमारे 40 जवानों को अपनी वोटों की राजनीति की खातिर मरवा दिया था।
#पुलवामा हमले में शहीद CRPF के अमर वीर जवानों को कोटि कोटि नमन- सत्यपाल मलिक (पूर्व गवर्नर) #satyapalmalik
#pulwamaattack #blackdayforindia

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सत्ता के लालची भेड़ियों ने पांच साल पहले आज़ ही के दिन 14 फ़रवरी 2019 को #पुलवामा_हमले में हमारे 40 जवानों को अपनी वोटों की राजनीति की खातिर मरवा दिया था।
#पुलवामा हमले में शहीद CRPF के अमर वीर जवानों को कोटि कोटि नमन- सत्यपाल मलिक (पूर्व गवर्नर) #satyapalmalik
#pulwamaattack #blackdayforindia

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शगुन लॉन, महमूरगंज में आयोजित "शक्ति वन्दन अभियान" में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित होकर मातृशक्ति का किया सम्मान।
"आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत में महिला-विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर तेजी से बदलाव देखा जा रहा है, जहां महिलाएं तेज गति और सतत राष्ट्रीय विकास में समान भागीदार हैं।
भारत वर्तमान में विश्व के उन 15 देशों में से एक है जहां महिला राष्ट्राध्यक्ष हैं।
विश्व स्तर पर, भारत में स्थानीय सरकारों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक है।
भारत में वैश्विक औसत की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक महिला पायलट हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला एयरलाइन पायलट सोसायटी के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 5 प्रतिशत पायलट महिलाएँ हैं। भारत में, महिला पायलटों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा 15 प्रतिशत से अधिक है।
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) लगभग लड़कों के बराबर है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में लड़कियों/महिलाओं की उपस्थिति 43 प्रतिशत है, जो विश्व में सबसे अधिक में से एक है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि जेंडर अनुपात, राष्ट्रीय स्तर पर 918 से बढ़कर 933 हो गया है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (एनएफएचएस 5) में कहा गया है कि आज 88.7 प्रतिशत महिलाएं प्रमुख घरेलू निर्णयों में भाग लेती हैं, जबकि पांच वर्ष पूर्व यह 84 प्रतिशत थी।
भारत सरकार ने विभिन्न व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाबद्ध और सांवधिक कदम उठाए हैं तथा सक्षम प्रावधान बनाए हैं। कौशल भारत मिशन के तहत महिला श्रमिकों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों और क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
महिला सशक्तिकरण और देश के सर्वोच्च राजनीतिक कार्यालयों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए सरकार द्वारा उठाया गया सबसे बड़ा कदम लोक सभा (लोकसभा) और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के लिए 28 सितंबर, 2023 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (संविधान एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 की अधिसूचना है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई पहल की गई हैं।
भारत सरकार "मिशन शक्ति" कार्यान्वित करती है जिसके दो घटक हैं, संबल और सामर्थ्य। "संबल" के अंतर्गत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्प लाइन और नारी अदालत जैसे घटक प्रचालनगत हैं। उप-योजना "सामर्थ्य" के घटक हैं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, शक्ति सदन, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए केंद्र, सखी निवास यानी कामकाजी महिला छात्रावास, पालना, आंगनवाड़ी सह क्रेच।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इत्यादि जैसी किसान कल्याण योजनाएं महिला किसानों के लिए एक सक्षमकारी वातावरण का पोषण कर रही हैं। इन पहलों के माध्यम से सरकार कृषि विस्तार सेवाओं सहित उत्पादक संसाधनों तक कृषक महिलाओं की पहुंच में सुधार कर रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में समग्र सुधार आ रहा है।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम महिला सहकारी समितियों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएँ खाद्यान्न प्रसंस्करण, वृक्षारोपण फसलों, तिलहन प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, डेयरी और पशुधन, कताई मिलों, हथकरघा और पावरलूम बुनाई, एकीकृत सहकारी विकास परियोजनाएँ आदि से संबंधित कार्यकलापों से निपटने वाली सहकारी समितियों के साथ जुड़ी हुई हैं।

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शगुन लॉन, महमूरगंज में आयोजित "शक्ति वन्दन अभियान" में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित होकर मातृशक्ति का किया सम्मान।
"आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत में महिला-विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर तेजी से बदलाव देखा जा रहा है, जहां महिलाएं तेज गति और सतत राष्ट्रीय विकास में समान भागीदार हैं।
भारत वर्तमान में विश्व के उन 15 देशों में से एक है जहां महिला राष्ट्राध्यक्ष हैं।
विश्व स्तर पर, भारत में स्थानीय सरकारों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक है।
भारत में वैश्विक औसत की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक महिला पायलट हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला एयरलाइन पायलट सोसायटी के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 5 प्रतिशत पायलट महिलाएँ हैं। भारत में, महिला पायलटों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा 15 प्रतिशत से अधिक है।
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) लगभग लड़कों के बराबर है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में लड़कियों/महिलाओं की उपस्थिति 43 प्रतिशत है, जो विश्व में सबसे अधिक में से एक है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि जेंडर अनुपात, राष्ट्रीय स्तर पर 918 से बढ़कर 933 हो गया है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (एनएफएचएस 5) में कहा गया है कि आज 88.7 प्रतिशत महिलाएं प्रमुख घरेलू निर्णयों में भाग लेती हैं, जबकि पांच वर्ष पूर्व यह 84 प्रतिशत थी।
भारत सरकार ने विभिन्न व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाबद्ध और सांवधिक कदम उठाए हैं तथा सक्षम प्रावधान बनाए हैं। कौशल भारत मिशन के तहत महिला श्रमिकों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों और क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
महिला सशक्तिकरण और देश के सर्वोच्च राजनीतिक कार्यालयों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए सरकार द्वारा उठाया गया सबसे बड़ा कदम लोक सभा (लोकसभा) और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के लिए 28 सितंबर, 2023 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (संविधान एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 की अधिसूचना है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई पहल की गई हैं।
भारत सरकार "मिशन शक्ति" कार्यान्वित करती है जिसके दो घटक हैं, संबल और सामर्थ्य। "संबल" के अंतर्गत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्प लाइन और नारी अदालत जैसे घटक प्रचालनगत हैं। उप-योजना "सामर्थ्य" के घटक हैं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, शक्ति सदन, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए केंद्र, सखी निवास यानी कामकाजी महिला छात्रावास, पालना, आंगनवाड़ी सह क्रेच।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इत्यादि जैसी किसान कल्याण योजनाएं महिला किसानों के लिए एक सक्षमकारी वातावरण का पोषण कर रही हैं। इन पहलों के माध्यम से सरकार कृषि विस्तार सेवाओं सहित उत्पादक संसाधनों तक कृषक महिलाओं की पहुंच में सुधार कर रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में समग्र सुधार आ रहा है।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम महिला सहकारी समितियों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएँ खाद्यान्न प्रसंस्करण, वृक्षारोपण फसलों, तिलहन प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, डेयरी और पशुधन, कताई मिलों, हथकरघा और पावरलूम बुनाई, एकीकृत सहकारी विकास परियोजनाएँ आदि से संबंधित कार्यकलापों से निपटने वाली सहकारी समितियों के साथ जुड़ी हुई हैं।

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शगुन लॉन, महमूरगंज में आयोजित "शक्ति वन्दन अभियान" में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित होकर मातृशक्ति का किया सम्मान।
"आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत में महिला-विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर तेजी से बदलाव देखा जा रहा है, जहां महिलाएं तेज गति और सतत राष्ट्रीय विकास में समान भागीदार हैं।
भारत वर्तमान में विश्व के उन 15 देशों में से एक है जहां महिला राष्ट्राध्यक्ष हैं।
विश्व स्तर पर, भारत में स्थानीय सरकारों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक है।
भारत में वैश्विक औसत की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक महिला पायलट हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला एयरलाइन पायलट सोसायटी के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 5 प्रतिशत पायलट महिलाएँ हैं। भारत में, महिला पायलटों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा 15 प्रतिशत से अधिक है।
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) लगभग लड़कों के बराबर है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में लड़कियों/महिलाओं की उपस्थिति 43 प्रतिशत है, जो विश्व में सबसे अधिक में से एक है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि जेंडर अनुपात, राष्ट्रीय स्तर पर 918 से बढ़कर 933 हो गया है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (एनएफएचएस 5) में कहा गया है कि आज 88.7 प्रतिशत महिलाएं प्रमुख घरेलू निर्णयों में भाग लेती हैं, जबकि पांच वर्ष पूर्व यह 84 प्रतिशत थी।
भारत सरकार ने विभिन्न व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाबद्ध और सांवधिक कदम उठाए हैं तथा सक्षम प्रावधान बनाए हैं। कौशल भारत मिशन के तहत महिला श्रमिकों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों और क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
महिला सशक्तिकरण और देश के सर्वोच्च राजनीतिक कार्यालयों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए सरकार द्वारा उठाया गया सबसे बड़ा कदम लोक सभा (लोकसभा) और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के लिए 28 सितंबर, 2023 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (संविधान एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 की अधिसूचना है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई पहल की गई हैं।
भारत सरकार "मिशन शक्ति" कार्यान्वित करती है जिसके दो घटक हैं, संबल और सामर्थ्य। "संबल" के अंतर्गत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्प लाइन और नारी अदालत जैसे घटक प्रचालनगत हैं। उप-योजना "सामर्थ्य" के घटक हैं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, शक्ति सदन, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए केंद्र, सखी निवास यानी कामकाजी महिला छात्रावास, पालना, आंगनवाड़ी सह क्रेच।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इत्यादि जैसी किसान कल्याण योजनाएं महिला किसानों के लिए एक सक्षमकारी वातावरण का पोषण कर रही हैं। इन पहलों के माध्यम से सरकार कृषि विस्तार सेवाओं सहित उत्पादक संसाधनों तक कृषक महिलाओं की पहुंच में सुधार कर रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में समग्र सुधार आ रहा है।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम महिला सहकारी समितियों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएँ खाद्यान्न प्रसंस्करण, वृक्षारोपण फसलों, तिलहन प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, डेयरी और पशुधन, कताई मिलों, हथकरघा और पावरलूम बुनाई, एकीकृत सहकारी विकास परियोजनाएँ आदि से संबंधित कार्यकलापों से निपटने वाली सहकारी समितियों के साथ जुड़ी हुई हैं।

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