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हिन्दू चाहत ने मुस्लिम अरबाज से प्रेम किया

अरबाज ने चाहत का सर काट कर प्रेम किया

मामला मुज़फ्फरनगर का है जहाँ इंस्टाग्राम से अरबाज ने चाहत को अपने लव जिहाद में फंसाया, कुछ ही दिन में कोटद्वार की रहने वाली चाहत कुमारी कबाड़ी अरबाज के पास भाग आई, अरबाज ने शुरुआती 5 महीने चाहत को जमकर रगड़ा, फिर उसे चाहत में मज़ा आना खत्म हो गया तो उसने मांस काटने वाले हथियार से चाहत के चार टुकड़े किये, और बोरे में भरकर नदी में फेंकने जा रहा था कि पुलिस की नज़र पड़ी शक हुआ तो पुलिस ने बोरा खुलवाया, अंदर चाहत की चाहत मुस्कुराती हुईं चार टुकड़ों में मिली ✍️

कहानी खत्म.... आज नई चाहत की कहानी आएगी तब उसे लिखूंगा ✍️ क्यूंकि ये तो अब हर रोज़ की कहानी है...

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जब इनसे पुलिस वाले भी नहीं सुरक्षित तो सोचिए की आम जनता के साथ क्या क्या करते होंगे 😳

असम के ढिंग में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने पुलिस कर्मियों पर बेरहमी से हमला किया!

पुलिस वहां उनके ही समुदाय के एक सदस्य द्वारा किए गए अपराध के बारे में पूछताछ करने के लिए गई थी।

साधू संतों ने कहा अखिलेश और अवधेश को अयोध्या में घुसने नहीं देंगे।

अखिलेश द्वारा “अयोध्या के राजा अवधेश” कहने पर देश भर में भारी गुस्सा है...

सपा का अहंकार सिर चढ़कर बोल रहा है...

क्या आपकी बेटी
को कोई मुस्लिम टीचर पढ़ाता है तो ये खबर आपके लिए है

Repost करें ताकि शायद कोई बाप बच सके

कानपुर में नौशाद आलम (34) कक्षा 10 की स्वाती (14) को ट्यूशन पढ़ाने घर जाता था, और दो दिन पहले वो उसे लेकर फुर्र हो गया, मामला खुला तो पुलिस में शिकायत हुईं, हिन्दू वादी संघठनों ने आवाज उठाई व तलाश शुरू की तो कानपुर के ही कल्याणपुर स्टेशन से मुस्लिम नौशाद व स्वाती बरामद हो गए, नौशाद ने स्वाती को बुरखा पहना रखा था ताकि पहचान न हो सके, दो दिन में 14 साल की स्वाती का क्या भर्ता बनाया होगा 34 साल के हवस के मौलवी ने सिर्फ सोचा जा सकता है

सावधान हो जाइये.. स्कूल.. कॉलेज, कोचिंग ट्यूशन में यदि आपकी भी बेटी को कोई मुस्लिम पढ़ा रहा है तो समझ लीजिये उसकी कामुकता बढ़ा रहा है ✍️

आज की दूसरी कहानी समाप्त...

तीसरी लेकर जल्द आ रहा हूँ तबतक इस सन्देश को आगे बढ़ाइए ✍️

2 سنوات - ترجم

मुकेश अंबानी और अनंत अंबानी ने डॉ मोहन भागवत के छुए पैर।

पैर छूकर लिया डॉ मोहन भागवत का आशीर्वाद।

विवाह से पूर्व अनंत अंबानी को आशीर्वाद देने एंटीलिया पहुंचे थे डॉ मोहन भागवत।

तस्लीमा नसरीन को सत्य घटनाओं पर आधारित जिस 'लज्जा' उपन्यास के कारण अपने वतन से निर्वासित होना पड़ा, उसका यह अंश जरूर पढ़ें……

बेटियों के बलात्कारियों से जब माँ ने कहा "अब्दुल अली, एक-एक करके करो,,, नहीं तो वो मर जाएंगी "

यह सच्ची घटना घटित हुई थी 8 अक्टूबर 2001 को बांग्लादेश में।

अनिल चंद्र और उनका परिवार 2 बेटियों 14 वर्षीय पूर्णिमा व 6 वर्षीय छोटी बेटी के साथ बांग्लादेश के सिराजगंज में रहता था। उनके पास जीने, खाने और रहने के लिए पर्याप्त जमीन थी।

बस एक गलती उनसे हो गयी, और ये गलती थी कि एक हिंदू होकर 14 साल व 6 साल की बेटी के साथ बांग्लादेश में रहना!!

एक क़ाफिर के पास इतनी जमीन कैसे रह सकती है..? यही सवाल था बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिद ज़िया के पार्टी से सम्बंधित कुछ उन्मादी लोगों का।

8 अक्टूबर के दिन……..

अब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली, अब्दुर रउफ, यासीन अली, लिटन शेख और 5 अन्य लोगों ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया, अनिल चंद्र को मारकर डंडो से बाँध दिया, और उनको काफ़िर कहकर गालियां देने लगे।

इसके बाद ये शैतान माँ के सामने ही उस 14 साल की निर्दोष बच्ची पर टूट पड़े और उस वक्त जो शब्द उस बेबस व लाचार मां के मुँह से निकले वो पूरी इंसानियत को झंकझोर देने वाले हैं।

अपनी बेटी के साथ होते इस अत्याचार को देखकर उसने कहा "….. अब्दुल अली,, एक एक करके करो, नहीं तो मर जाएगी, वो सिर्फ 14 साल की है।"

वो यहीं नहीं रुके,,,,,,,!! उन माँ बाप के सामने उनकी छोटी 6 वर्षीय बेटी का भी सभी ने मिलकर ब#लात्कार किया ....उनलोगों को वहीं मरने के लिए छोडकर जाते जाते आस पड़ौस के लोगों को धमकी देकर गए की कोई इनकी मदद नहीं करेगा।

ये पूरी घटना बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी अपनी किताब “लज्जा” में लिखी, जिसके बाद से उनको अपना ही देश छोड़ना पड़ा

ये पूरी घटना इतनी हैवानियत से भरी है परन्तु आज तक भारत में किसी बुद्धिजीवी ने इसके खिलाफ बोलने की हैसियत तक नहीं दिखाई है, ना ही किसी मीडिया हाउस ने इसपर कोई कार्यक्रम करने की हिम्मत जुटाई है।

ये होता है किसी शांतिदूत देश में हिन्दू या कोई अन्य अल्पसंख्यक होने का, चाहे वो बांग्लादेश हो या पाकिस्तान।

पता नहीं कितनी पूर्णिमाओं की ऐसी आहुति दी गयी होगी बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसँख्या को 22 प्रतिशत से 8 प्रतिशत और पाकिस्तान में 15 प्रतिशत से 1 प्रतिशत पहुँचाने में।

और हिंदुस्तान में जावेद अख्तर, आमिर खान, नसीरुद्दीन शाह व हामिद अंसारी जैसे हर…….लोग कहते है कि हमें डर लगता है,,, जहाँ उनकी आबादी आज़ादी के बाद से लगातार बढ़ रही है।

अगर आप भी सेक्युलर हिंदु (स्वघोषित बुद्धिजीवी) हैं और आपको भी लगता है कि भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं,, तो कभी बांग्लादेश या पाकिस्तान की किसी पूर्णिमा को इन्टरनेट पर ढूंढ कर देखिये !!!

मूर्खतापूर्ण ढंग से केवल संविधान की दुहाई देते हुए रूदाली रूदन करने की बजाय इन लोगों के बारे में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की राय भी पढियेगा।

मर्जी आपकी !

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