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मासूम बच्चों को ज़िंदगी जीना सिखाने की बजाय मौत के फ़ायदों के लिए तैयार करने वाला ये मदरसा भारत बांग्लादेश सीमा पर है सब बच्चे स्कूली पढ़ाई छोड़ कर मदरसे में हैं इनको 12-14 वर्ष की आयु में भी उर्दू-अरबी के सामान्य शब्दों की जानकारी तो नहीं दी गई है परंतु मौत के बाद के सफ़र की पढ़ाई कराई जा रही है।
बच्चों के विकास के लिए ये ख़तरनाक है,बच्चों को स्कूल में होना चाहिए।
(वीडियो जन जागरण के उद्देश्य से पोस्ट किया गया है)
🙏🙏जय सियाराम जी🙏🙏
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रामसखाँ तेहि समय देखावा।
सैल सिरोमनि सहज सुहावा॥
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जासु समीप सरित पय तीरा।
सीय समेत बसहिं दोउ बीरा॥
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भावार्थ:-गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि रामसखा निषादराज ने उसी समय स्वाभाविक ही सुहावना पर्वतशिरोमणि कामदगिरि दिखलाया, जिसके निकट ही पयस्विनी नदी के तट पर सीताजी समेत दोनों भाई निवास करते हैं।
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देखि करहिं सब दंड प्रनामा।
कहि जय जानकि जीवन रामा॥
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प्रेम मगन अस राज समाजू।
जनु फिरि अवध चले रघुराजू॥
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भावार्थ:-सब लोग उस पर्वत को देखकर 'जानकी जीवन श्री रामचंद्रजी की जय हो।' ऐसा कहकर दण्डवत प्रणाम करते हैं। राजसमाज प्रेम में ऐसा मग्न है मानो श्री रघुनाथजी अयोध्या को लौट चले हों।
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भरत प्रेमु तेहि समय जस
तस कहि सकइ न सेषु।
कबिहि अगम जिमि ब्रह्मसुखु
अह मम मलिन जनेषु॥
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भावार्थ:-भरतजी का उस समय जैसा प्रेम था, वैसा शेषजी भी नहीं कह सकते। कवि के लिए तो वह वैसा ही अगम है, जैसा अहंता और ममता से मलिन मनुष्यों के लिए ब्रह्मानंद है।
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वंदउ राम लखन वैदेही।
जे तुलसी के परम सनेही॥
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अनुज जानकी सहित निरंतर।
बसउ राम नृप मम उर अंतर॥
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🙏🙏जय सियाराम जी🙏🙏
राजस्थान के थार मरुस्थल मे पानी की समस्या ख़त्म करने का सबसे सरल ओर कम खर्च का तरीका है तालाबों का संरक्षण ओर बहाव क्षेत्र में नये तालाबों का निर्माण।जबकि उल्टा हो रहा है सरकार नल से जल लाकर तालाबों की उपगिता ख़त्म कर रही हैं।अच्छा है नल से जल देओ पर तालाब मे जल संरक्षण करके उसी मे मोटर डालकर पूरे गाँव को नियमित सप्लाई दी जा सकती है।अतिरिक्त आवश्यकता होने पर नहर से सप्लाई दी जा सकती हैं।लोग सिर्फ़ शहर से आये जल पर निर्भर हो रहे हैं।क्या आपके गाँव का तालाब पीने योग्य है।