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सेवा भारती समिति, काशी प्रांत द्वारा अप्रतिम शौर्य के महानायक, कुशल नेतृत्वकर्ता एवं अपनी संगठन शक्ति से सबको विस्मित कर देने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित विश्व प्रसिद्ध महानाट्य जाणता राजा (दूरदर्शी राजा) का मंचन एम्फीथिएटर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में दिनांक 21 से 26 नवंबर प्रतिदिन सायंकाल 5:30 बजे से 80 बजे तक किया जाएगा।
इस आयोजन का उद्देश्य छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के माध्यम से जनमानस में राष्ट्र प्रेम जगाना, अपनी संस्कृति, संस्कार एवं गौरवशाली इतिहास को जनमानस तक पहुंचाना है, जिससे आज की युवा पीढ़ी प्रेरित हो सके तथा एक कुशल शासक के गुणों से अवगत हो सके। इससे प्राप्त सहयोग धनराशि से सेवा भारती द्वारा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर हॉस्पिटल, सुंदरपुर, वाराणसी के समीप रोगियों एवं उनके परिचारकों के आवास व भोजन के लिए भवन निर्माण कराना एवं विभिन्न सेवा प्रकल्पों का संचालन करना है।
काशी की पावन धरा पर प्रथम बार आयोजित होने वाले इस महान नाटक के द्वारा अपने गौरवशाली अतीत के पुनः स्मरण एवं राष्ट्र जागरण की इस महायज्ञ में आप सब परिवार उपस्थित होकर हमारा उत्साहवर्धन करें।
कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए कृपया निम्नलिखित नंबर पर संपर्क करें।
दुर्गाकुण्ड स्थित, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की तपोस्थली श्री मणि मंदिर [धर्मसंघ, दुर्गाकुंड] में श्रीराम दरबार, द्वादश स्फटिक ज्योतिर्लिंग, पारदेश्वर शिवलिंग, भगवान गणेश, माता अन्नपूर्णा, माँ दुर्गा, राधा कृष्ण, भगवान सूर्य, दस महाविद्या, भगवान परशुराम जी, अर्द्धनारीश्वर जी, हनुमान जी, शिव परिवार, लक्ष्मीनारायण जी , बटुक भैरव, काल भैरव, नवग्रह के साथ साथ 151 नर्मदेश्वर शिवलिंग भी स्थापित है।
यहाँ स्थापित 5 फ़ीट ऊँचा विशाल नर्वदेश्वर शिवलिंग भी आस्था का केंद्र है, जो महाकाल की छवि के साथ दर्शन के लिए सुलभ रहता है।
काशी में अवश्य जाने लायक स्थानों में से एक।
दुर्गाकुण्ड स्थित, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की तपोस्थली श्री मणि मंदिर [धर्मसंघ, दुर्गाकुंड] में श्रीराम दरबार, द्वादश स्फटिक ज्योतिर्लिंग, पारदेश्वर शिवलिंग, भगवान गणेश, माता अन्नपूर्णा, माँ दुर्गा, राधा कृष्ण, भगवान सूर्य, दस महाविद्या, भगवान परशुराम जी, अर्द्धनारीश्वर जी, हनुमान जी, शिव परिवार, लक्ष्मीनारायण जी , बटुक भैरव, काल भैरव, नवग्रह के साथ साथ 151 नर्मदेश्वर शिवलिंग भी स्थापित है।
यहाँ स्थापित 5 फ़ीट ऊँचा विशाल नर्वदेश्वर शिवलिंग भी आस्था का केंद्र है, जो महाकाल की छवि के साथ दर्शन के लिए सुलभ रहता है।
काशी में अवश्य जाने लायक स्थानों में से एक।
दुर्गाकुण्ड स्थित, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की तपोस्थली श्री मणि मंदिर [धर्मसंघ, दुर्गाकुंड] में श्रीराम दरबार, द्वादश स्फटिक ज्योतिर्लिंग, पारदेश्वर शिवलिंग, भगवान गणेश, माता अन्नपूर्णा, माँ दुर्गा, राधा कृष्ण, भगवान सूर्य, दस महाविद्या, भगवान परशुराम जी, अर्द्धनारीश्वर जी, हनुमान जी, शिव परिवार, लक्ष्मीनारायण जी , बटुक भैरव, काल भैरव, नवग्रह के साथ साथ 151 नर्मदेश्वर शिवलिंग भी स्थापित है।
यहाँ स्थापित 5 फ़ीट ऊँचा विशाल नर्वदेश्वर शिवलिंग भी आस्था का केंद्र है, जो महाकाल की छवि के साथ दर्शन के लिए सुलभ रहता है।
काशी में अवश्य जाने लायक स्थानों में से एक।
