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जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ।। पोस्ट१९६।। बालकाण्ड दोहा ३०/१३,१४, श्रीराम कथा शंकर जी को प्रिय है।
सिवप्रिय मेकल सैल सुता सी।
सकल सिद्ध सुख संपत्ति रासी।।
सदगुन सुरगन अंब अदिति सी।
रघुबर भगति प्रेम परमिति सी।।
भावार्थ:- यह श्रीराम कथा शिवजी को नर्मदा के समान प्यारी है, यह सब सिद्धियों की तथा सुख-सम्पत्ति कि राशि है। सदगुण रुपी देवताओं के उत्पन्न और पालन पोषण करने के लिए अदिति के समान है। श्रीरघुनाथ जी की भक्ति और प्रेम की परम सीमा सी है।