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अलीगढ़ रेलवे स्टेशन,जहां सालों तक अपने दोस्तों को स्टेशन छोड़ने आना और जाने वाले दोस्त से सूबेदार की सी ऑफ टी(चाय), ये सिलसिला 1986 तक रहा । फिर ए. एच . वीलर की बरसों पुराना बुक स्टाल पर किताबों को उलटना पलटना और बिना ख़रीदे वापस इमादुल मुल्क रोड, मकान नंबर 36-B लौट जाना.। आज चन्द मिनिटों के लिए उसी दौर की सारी यादें ताज़ा हो गईं
अलीगढ़ रेलवे स्टेशन,जहां सालों तक अपने दोस्तों को स्टेशन छोड़ने आना और जाने वाले दोस्त से सूबेदार की सी ऑफ टी(चाय), ये सिलसिला 1986 तक रहा । फिर ए. एच . वीलर की बरसों पुराना बुक स्टाल पर किताबों को उलटना पलटना और बिना ख़रीदे वापस इमादुल मुल्क रोड, मकान नंबर 36-B लौट जाना.। आज चन्द मिनिटों के लिए उसी दौर की सारी यादें ताज़ा हो गईं
अलीगढ़ रेलवे स्टेशन,जहां सालों तक अपने दोस्तों को स्टेशन छोड़ने आना और जाने वाले दोस्त से सूबेदार की सी ऑफ टी(चाय), ये सिलसिला 1986 तक रहा । फिर ए. एच . वीलर की बरसों पुराना बुक स्टाल पर किताबों को उलटना पलटना और बिना ख़रीदे वापस इमादुल मुल्क रोड, मकान नंबर 36-B लौट जाना.। आज चन्द मिनिटों के लिए उसी दौर की सारी यादें ताज़ा हो गईं
