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भारत ने कनाडा में भारतीय नागरिकों और छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की
"कनाडा में बढ़ती भारत विरोधी गतिविधियों और राजनीतिक रूप से लंदन में नफरत के अपराध और आपराधिक हिंसा को देखते हुए, सभी भारतीय नागरिकों और यात्रा पर चिंतन करने वालों से आग्रह है कि वह अत्यधिक सावधानी बरतें। हाल ही में, धमकियों ने विशेष रूप से भारतीय राजनयिकों और भारतीय समुदाय के वर्गों को निशाना बनाया है जो भारत विरोधी एजेंडे का विरोध करते हैं। इसलिए भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि कनाडा में क्षेत्रों और संभावित स्थानों की यात्रा से बचने की कोशिश करें जिन्होंने इस तरह की घटनाएं देखी हैं": विदेश मंत्रालय
कांग्रेस महिला आरक्षण बिल का श्रेय चाहती है क्योंकि वह नेहरू-गाँधी परिवार का दिमाग था।
कांग्रेस भी चन्द्रयान तृतीय का श्रेय चाहती है क्योंकि इसरो की स्थापना नेहरू-गाँधी परिवार के तहत हुई थी।
हालांकि, कांग्रेस पाकिस्तान के साथ कश्मीर संघर्ष, चीन के साथ सीमा के मुद्दे, और खालिस्तानी अलगाववाद के मुद्दे का श्रेय नहीं लेना चाहती है, जो सभी नेहरू-गाँधी परिवार के तहत शुरू हुए थे और उनकी नीतियों और खराब निपटने से सीधे जुड़े थे।
मुसलमानो को पंचरवाला कहना बस अपनी कमजोरी छिपाने का एक तरीका है।
फर्नीचर बरेली और सहारनपुर का , पीतल मुरादाबाद , चीनी मिट्टी खुर्जा , चमड़ा कानपुर और आगरा का , चूड़ी फिरोजाबाद , कालीन भदोही का लगभग सारे कुटीर उद्योग पर उसका कब्जा है।
ऑटोमोबाइल, बिजली मिस्त्री, कपड़ा, फुटवियर, कंस्ट्रक्शन, कांट्रेक्टर, हथियार की फैक्ट्री, केमिकल, एसिड, पटाखा की फैक्ट्री, वर्कशॉप, लोहा, लकड़ी, कबाड़ी, डेरी, फल सब्जी की मंडी, सिलाई कढाई और नाई से ले कर कसाई तक के सारे पुश्तैनी काम पर कब्जा कर लिया है ।
पहले किसी भी तरह से ज्यादा बच्चे पैदा कर संसाधनों पर कब्जा किया, लोकतंत्र और समाज मे दबदबा बनाया।
अब तो मदरसों की पढ़ाई से वो IAS/PCS/ वकील / पुलिस की जॉब पर भी कब्जा कर रहे ।
पढ़ाई में भी History, Social, की book पर कब्जा किया और आपके धार्मिक ग्रंथों को शिक्षा से बाहर कर दिया। पत्रकारिता पर कब्जा किया, सरकारी ठेके लेना, सभी तरह के आयोग पर कब्जा किया।
और तुम लोगों ने क्या किया ?
25 लाख खर्च कर engg. के नाम पर छोटी मोटी सुपरविजन की ₹10,000 वाली नौकरी, BA, MA कर झक मारो, कॉल सेंटर में लोन लोगे वाली गाली खाने वाली नोकरी, गार्ड, चपरासी, कंप्युटर ऑपरेटर, क्लर्क, ठेकेदारों के पास temporary जॉब, सफाईकर्मी मतलब कोई भी छोटा मोटा काम मिल जाये बस। फिर उसके बाद औकात से बहुत ज्यादा शान का दिखावा, आडंबर, 1-2 बच्चे पैदा करना, बेटी को लव जिहाद में फँसाना, अल्लाह हु अकबर करना, बहन बेटियों का हलाला करवाना और अपने वंश का विनाश करवाना, अपनों को जाति में बाट लेना....
तुम लोगों ने 1-2 बच्चे पैदा कर खुद को कमजोर किया।
बिना लड़े दूसरे को शासक बना दिया
याद रखो लोकतंत्र संख्याबल पर चलता है और जल्दी ही संख्या बल मुस्लिम का होगा और फिर अंबेडकर का संविधान हटा कर शरिया लागु होगा
आप काफ़िर हो जाओगे आपका सिर कलम कर दिया जाएगा, आपकी बहन बेटियाँ उनकी गुलाम और बच्चा पैदा करने की मशीन सोच कर रखना।।
जस्टिन ट्रूडो की हालात किसी पाकिस्तानी पीएम की तरह हो गया है। मोदी ने दिल्ली में शपथ के पहले दिन से अपने आज तक के कार्यकाल में किसी को भी अपना दुश्मन नहीं बनाया। ट्रूडो में इतना सामर्थ भी नहीं कि मोदी का दुश्मन बन सके। मोदी का दुश्मन कोई जॉर्ज सोरोस लेवल का होना चाहिए। जस्टिन ट्रूडो तो जॉर्ज सोरोस का कृपा पात्र है। सत्ता में बने रहने के लिए जॉर्ज सोरोस से ट्रूडो की मुलाकात छिपी बात नहीं है।
भारत के राजनईक को कनाडा से बाहर निकालने का ट्रूडो का फैसला सेल्फ गोल साबित हो गया। जैसे ही कनाडा हाई कमिश्नर को आज भारत में तलब किया गया और कनाडा के राजनईक को भारत छोड़ने की हिदायत दी गई, पांच दिनों की मोहलत के साथ, तब तक ट्रूडो ने भारत के प्रति अपना बयान बदल लिया। इतनी जल्दी स्टैंड की अदला बदली करते कभी पाकिस्तान का पीएम भी मुझे नजर नहीं आया।
कनाडा का इसमें दोष भी नहीं। भारत विश्व भर में जैसी अपनी साख बनाए हुए था, ट्रूडो वही आज भी भारत से अपेक्षा कर रहे हैं। उन्हें क्या मालूम 9 वर्षों में भारत कितना बदल गया है? यदि निज्जर खालिस्तानी आतंकवादी कनाडा में पनाह पाए हुए था, तो कायदे से पुराना भारत इसकी जांच करता। कनाडा की सरकार से बात करता। तमाम डोजियर दिए जाते। और यह चलता रहता। अथवा तो कोई खालिस्तान आतंकवादी किसी विदेशी धरती पर पनाह पाए हुए हो, भारत को इससे क्या ही फर्क पड़ता?
अंग्रेजी समाचार वेबसाइट मिन्ट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह खबर पब्लिश किया गया है कि भारत से जिस कनाडाई राजनयिक को निकाला गया है, वह कनाडा की खुफिया एजेंसी के भारत में चीफ हैं। यह एक तरह से सर्जिकल जवाब है, कनाडा के इस टिप्पणी का, जिसमें भारत के राजनयिक को रॉ का एजेंट बताया गया। इसका मतलब डिप्लोमेसी के टेबल पर मामला बिल्कुल बैलेंस्ड चल रहा है। और निज्जर की हत्या को कनाडा के पीएम कनाडा की संप्रभुता पर हमला मानते हैं तो यह भारत के लिए एक नया एहसास है। कनाडा की संप्रभुता पर हमला कहने के पीछे सच्चाई है। क्योंकि खालिस्तानी आतंकी जस्टिन ट्रूडो की सरकार का एक बड़ा स्पॉन्सर है। तो निज्जर की हत्या कनाडा की संप्रभुता पर हमला ही माना जाएगा। और यह भारत का एक नया सर्जिकल स्ट्राइक ट्रेंड है।
शुभ, एक बड़ा म्यूज़िक कॉन्सर्ट भारत में होने वाला था। गायक के वेश में छिपे खालीस्तानी किसी शुभमन नाम से था। जिसने उसकी शो को स्पांसर किया था, उसने एन वक्त पर अपना डील कैंसिल कर दिया है। तो एक वह भारत था जोकि रेलवे की प्लेटफार्म पर बम से सचेत करने के लिए भारत की जनता को डराता रहता था। एक आज का भारत है जो किसी प्लेटफार्म पर बम लगाने वाला मस्तिष्क यदि कनाडा में बैठा है, तो उसको वही खत्म कर दिया जाता है। यह कितना नया एहसास है, नए भारत का।
बड़ी खबर….
कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद आज कनाडा में भारत के विरोधी आतंकी व गैंगस्टर सुखदूल सिंह गिल उर्फ सुक्खा दुनेके को भी विनीपिग में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया है।
विदित हो कि सुक्खा 41 आतंकियों व गैंगस्टरों की सूची में शामिल था, जिसे NIA ने भी जारी किया था। कनाड़ा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद यह दूसरी बड़ी वारदात है। वह पंजाब से साल 2017 में जाली पासपोर्ट तैयार करवाकर कनाडा फरार हुआ था। सुक्खा दुनेके मूलतः पंजाब के मोगा जिले का रहने वाला था। गैंगस्टर सुक्खा दुन्नेके भारत के A कैटेगरी गैंगस्टर लिस्ट में शामिल था।
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मेजर आर.के.शर्मा.
युद्धक्षेत्र में शहीद सैनिक साथी के शव को बाजू में लेकर 40 घंटे तक दुश्मन से लडता बहादुर सैनिक.
शोर्य पर्व - 20 सितंबर सन 1965 ई. तरन तारन, पंजाब.
तरन-तारन इलाके में दुश्मन की 7 बलूच कंपनी आ
पहुंची थी. वे 30 जयमल सिंह एरिया के दो डिवीजन के बीच के क्षेत्र को बांटना चाहते थे. उन्हें खदेडऩे के लिए स्पेशल टास्क 19 मराठा रेजिमेंट की सी-कंपनी को दिया गया था. इसे मेजर एम ए जाकी कमांड कर रहे थे. इस कंपनी में भोपाल के किशन शर्मा प्लाटून कमांडर थे. शर्मा कहते हैं कि दो दिन पहले ही गांव के लोगों से पता चला था कि पाकिस्तानी रेंजर्स भारतीय इलाके में आ पहुंचे हैं. खुफिया सूचना थी कि इस इलाके से जो घुसपैठ हुई है उसका लक्ष्य अमृतसर पहुंचने का है. 20 सितंबर सन 1965 ई. सुबह के 6.30 बजे थे, रात में ठीक से नींद नहीं होने और अलसाए दुश्मन पर हमला बोलने के लिए यह समय सटीक था. गन्ने के खेतों से छुपते हुए हम करीब एक घंटे ही आगे चले थे कि दुश्मन ने फायरिंग शुरू कर दी. हमारे टैंक कीचड़ में फंस गए. उन्हें निकालने में यूनिट के एक मेजर और अफसर शहीद हो गए. जंग की खबरें धक्का पहुंचाने वाली थी. ऐसे में हमें आदेश मिला था दुश्मन से भिड़ जाने का. दुश्मन गड्ढों में छिपकर फायर कर रहे थे. मेजर जाकी की दायीं बांह में गोली लगी फिर भी हम लड़ते रहे. पाकिस्तानी फौज को ग्रेनेड, बैनट, जवानों के शव, नक्शे और बारूद से भरे ट्रक छोड़कर भागना पड़ा. हमारी टास्क फोर्स को कमांड किया मिलिट्री क्रॉस, वीर चक्र से सम्मानित ब्रिगेडियर प्यारा सिंह ने, बटालियन कमांडर थे लेफ्टिनेंट एसजी परब. 22 सितंबर की सुबह उन्होंने फिर जोरदार हमला किया. मुकाबला करने के लिए हमारे पास आरसीएल गन, सेंचुरियन टैंक थे. देर रात तक फायरिंग हुई लेकिन हमने दुश्मन को अपने इलाकों में दोबारा घुसने का कोई मौका नहीं दिया. रात 3.30 बजे सीज फायर की घोषणा हुई. तीन दिन में तीन अफसरों समेत 14 फौजी शहीद हुए. कई जख्मी हुए, मेजर जाकी को वीर चक्र प्रदान किया गया. मैं कभी भूल नहीं सकता जब 40 घंटे तक मेरे बाजू में एक शहीद साथी का शव था.
1965 के युद्ध के 50 साल पूरे होने पर युद्ध के वीरों का राष्ट्रपति भवन में सम्मान किया गया. मेजर शर्मा भी उसमें शामिल हुए. इस अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वीरों को सेलयूट किया. एयर मार्शल अर्जन सिंह भी समारोह पहुंचे थे.
साभार : पंकज चौहान
संकलन : दिनेश भंडुला
2008 में बीजिंग ओलंपिक के समय चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने तब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने देश में आमंत्रित नहीं किया। उन्होंने सीधे सोनिया गाँधी को परिवार समेत निमंत्रण भेजा।
इस निमंत्रण के बाद सोनिया गाँधी सपरिवार चीन पहुँच गई और वहाँ पर हू जिन्ताओ ने अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी शी जीनपिंग की मुलाक़ात राहुल गाँधी से कराई।
यात्रा के अगले दिन चाइना की कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ़ से शी जीनपिंग और भारत के कांग्रेस पार्टी की तरफ़ से राहुल गाँधी ने क्रमशः हू जिन्ताओ और सोनिया गाँधी की गवाही में एक ट्रीटी पर साइन किया जिसके अनुसार दोनों पार्टियों के ये उत्तराधिकारी नियमित रूप से एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे और पार्टी टू पार्टी बेसिस पर एक दूसरे को सहायता देंगे।
कनाडा के लिबरल पार्टी के नेता और वर्तमान में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को चीनी राष्ट्रपति शी जीनपिंग ने 2018 में चीन में आमंत्रित किया और आमंत्रित करने से पूर्व ही चाइना एंबेसी ने जस्टिन के ट्रस्ट पियरे ट्रूडो फ़ाउंडेशन को साढ़े पाँच लाख डालर की सहायता भेज दी। इस यात्रा में जस्टिन ट्रूडो अपने परिवार के साथ पहुँचे और चीन ने कांग्रेस जैसा ही समझौता कनाडा के लेबर पार्टी के साथ कर लिया। साथ ही साथ चीन में जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो के कई जीवनियों का चीनी भाषा में अनुवाद कराया और अपने देश में बटवाया ताकि ट्रूडो परिवार को स्पेशल फील कराया जा सके। जस्टिन के भाई को इन किताबों के माध्यम से भारी पैसा चीन की तरफ़ से भेजा गया।
कनाडा का वर्तमान में पूरा नाटक इसी बात से शुरू हुआ कि कनाडा के चुनावों में चीन के भूमिका के सबूत मिले हैं। वहाँ की जनता और विपक्ष दोनों इस बात से बेहद नाराज़ हैं। तमाम सबूतों के बावजूद भी जस्टिन ट्रूडो कनाडा के चुनाव में चीन के भूमिका की जाँच नहीं करना चाहते। इस बात से ध्यान बटाने के लिये उन्होंने वहाँ की संसद में खड़े होकर बिना सबूत के भारत को अपने संप्रभुता का विरोधी बता दिया और एक नए शीतयुद्ध की शुरुआत कर दी।
इन सबके बीच महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में भी चुनाव आ रहा है और चीन किसी भी क़ीमत पर नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदख़ल करना चाहता है। राहुल गांधी भारत में चीनी एजेंट जैसे ही हैं और लगातार संपर्क में भी हैं। वह लद्दाख के मामले पर वहीं बयान दे रहे हैं जो चीन दिलाना चाहता है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि चुनाव में राहुल गांधी को सहायता करने के लिए दिसंबर, जनवरी के आसपास अचानक चीन लद्दाख पर फिर से उसी तरह की स्थिति बना सकता है जैसी की डोकलॉम में हुआ था। इस समय राहुल गाँधी के एक एक चाल और भाषण का ध्यान रखना आवश्यक है, ख़ासकर उन विषयों पर जो वह राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हैं।