3 jr - Vertalen

आकर चारि लाख चौरासी । जाति जीव जल थल नभ बासी ॥
सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी ॥
भावार्थ:-चौरासी लाख योनियों में चार प्रकार के (स्वेदज, अण्डज, उद्भिज्ज, जरायुज) जीव जल, पृथ्वी और आकाश में रहते हैं, उन सबसे भरे हुए इस सारे जगत को श्री सीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।॥
🙏🏻जय जय सियाराम🙏🏻

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Manoj KU Sunda
सर, मैं एक सिविल सेवा की तैयारी करने वाला एस्पिरेंट हूँ। मुझे बीते दिनों आपकी किताब 'एक देश बारह दुनिया' पढ़ने का मौका मिला।
अगर मैं किसी एक विशेष किताब के संदर्भ में कहूँ तो जो ज्ञान बारह वर्षों में अर्जित करता वह इस एक किताब को पढ़ कर कर लिया।
सर, आप ऐसे ही और भी रचनाएँ लिखते रहिए। देश के युवाओं में बौद्धिकता बढ़ाने का आपका यह योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

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