3 yrs - Translate

महाराणा प्रताप को महान माना जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी वीरता, धैर्य, और देशभक्ति के प्रतीक रूप में अपनी जीवनगाथा में महान कार्य किया। यहां कुछ मुख्य कारण हैं जिनके चलते महाराणा प्रताप को महानता का दर्जा प्राप्त हुआ:
Follow My page 📃
1. हल्दीघाटी का युद्ध: हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप के बहादुराना स्वरूप को प्रकट करता है। वे अकेले ही अपनी चुनौती के बावजूद मुग़ल सेना के खिलाफ लड़े और चारों ओर के विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लड़ाई को कठिनाइयों के बावजूद लड़ते रहे। इस युद्ध में उनकी सेना हारी हुई, लेकिन वे स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रशंसा प्राप्त करते हैं।
2. राष्ट्रीय अभिमान: महाराणा प्रताप ने अपनी राष्ट्रीय अभिमान की रक्षा के लिए संकट का सामना किया। वे अकबर के साम्राज्य के साम्राज्यिक दबाव के बावजूद अपने स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए लड़े। उन्होंने अपने पूरे जीवन में मेवाड़ की आजादी के लिए संघर्ष किया और यह दृढ़ता और देशभक्ति की अद्वितीय उदाहरण के रूप में मानी जाती है।
3. शौर्य और धैर्य: महाराणा प्रताप को उनके शौर्य और धैर्य के लिए भी प्रशंसा मिलती है। वे संघर्ष के दौरान अपने सैनिकों के साथ हमेशा आगे रहे और निर्णय स्थायित्व के साथ संघर्ष किया। उनका अद्भुत धैर्य और साहस उन्हें महानता का दर्जा प्राप्त करते हैं।
Follow My page 📃
4. जनसेवा: महाराणा प्रताप ने अपने जनता के लिए गहरी प्रेम और सेवा की भावना प्रदर्शित की। वे अपनी प्रजा के कल्याण के लिए प्रयासरत रहे और न्याय को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत की। उनकी जनसेवा और उनकी जनता के प्रति प्रेम ने उन्हें एक महान नेता के रूप में प्रसिद्ध किया।
इन सभी कारणों से संगठित रूप से, महाराणा प्रताप को महानता का दर्जा प्राप्त है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में वीरता, देशभक्ति, और राष्ट्रीय अभिमान की उच्चतम गुणवत्ता को प्रदर्शित किया।

image
3 yrs - Translate

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवन्त खालरा के जीवन पर फिल्म सेंसर बोर्ड के नीचे आ चुकी है। निर्माता ने अब इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट ले लिया है
#diljitdosanjh #jaswantsinghkhalra

image

image

3 yrs - Translate

झांसी की रानी, रानी लक्ष्मीबाई, 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण योद्धा थीं। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़कर अपनी प्रशंसा प्राप्त की।
रानी लक्ष्मीबाई की लड़ाई अंग्रेजों के ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साम्राज्य के खिलाफ थी। उन्होंने झांसी की राजधानी की सुरक्षा की और उसका प्रशासन किया था, लेकिन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने झांसी को अपने अधीन करने का प्रयास किया। जब रानी लक्ष्मीबाई को पता चला कि उन्हें झांसी से बाहर निकाला जा रहा है, तो उन्होंने योग्यता और आदर्शों को ध्यान में रखते हुए खुद को स्वतंत्र करने के लिए लड़ने का फैसला किया।
1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान, झांसी की रानी ने अपने सैनिकों के साथ मुख्य रूप से बूंदेलखंड के युवा सिपाहियों की सहायता से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने शौर्य, साहस और योग्यता के बल पर कई लड़ाइयों में ब्रिटिश सेना को परास्त किया। उनकी लड़ाई झांसी में एक गुहार में स्थित रेड फोर्ट नामक किले के आसपास भी घरेलू गुट योद्धाओं द्वारा जारी रखी गई।
लाखों लोग रानी लक्ष्मीबाई के शौर्यपूर्ण साहस के बारे में जानते हैं और उन्हें एक महान योद्धा के रूप में माना जाता है। उन्होंने अपनी प्राणों की आहुति देकर लड़ाई को जारी रखा और अंग्रेजों के खिलाफ एक दृढ़ संकल्प दिखाया। ये उनकी लड़ाई थी, जो उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के मशहूर नामों में से एक बनाती है।

image
3 yrs - Translate

ये ज़र्मनी मेँ एक जगह है..
जहाँ जिनके पास ज़रूरत से ज़्यादा खाने पीने की चीज होती है, वो यहाँ छोड़ जाता है और जिनके पास खाने को नहीं होता वो यहाँ से ले जाता है..
कितनी अच्छी सोच है न जिनके पास ज़्यादा है उनका बर्बाद भी ना हो, और जिनके पास नहीं है वो भूखे भी ना रहे

image

image

image

image