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3 jr - Vertalen

एक बस आस्तीन चढ़ाने को छोड़कर ! आदमी मैं अच्छा हूँ

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3 jr - Vertalen

भीड़ में भी एकांत खोजना ही सन्यास है आज के परिदृश्य में
हर जगह कोना तो होता ही है
जंहा अतीत से निकल सकें परंतु उसकी जकड़न ढीली नहीं होती।

हा ! जीवन में आपाधापी है
जंजाल से निकलने का रास्ता भी तो नहीं है कहने को तो हम अनासक्त भी बन सकते है
वह संभव नहीं ! यह पेंडुलम घूमता, घूमता है जैसे ही स्थिर होता है परिस्थितियों का झोंका वेग दे जाता है । हम वही है, पथ भी वही, कभी तेज कभी मद्धिम।।

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