Знакомьтесь сообщенийИзучите увлекательный контент и разнообразные точки зрения на нашей странице «Обнаружение». Находите свежие идеи и участвуйте в содержательных беседах
ये पैदाइशी हिंदू धर्मद्रोही अपने को साइंटिफिक, और वैज्ञानिक बात कहने वाले, हमारे सनातन वैदिक वेद ऋषियों से टक्कर लेंगे-----
बिना किसी सेटेलाइट या बिना किसी दूरबीन के महर्षि पराशर ने आज से 2200 वर्ष पूर्व इन सप्तर्षि तारा मंडल पर सटीक जानकारी अपने ग्रंथ में दी थी। महर्षि पराशर ज्योतिष शास्त्र के महान ऋषि थे।
उन्होंने ही सप्तर्षि तारा मंडल की सभी जानकारी दी है। आज तक नासा या दुनिया की कोई स्पेस एजंसी वहां तक नही पहुच पाई। पराशर मुनि ने अपने ग्रंथ में लिखा है कि सप्तर्षि में कश्यप नाम से एक तारा है जिसमे में हमारा सूर्य उत्पन्न हुआ है। इसलिए आज भी हिन्दू लोग सूर्य को कश्यपनंदन मानते है।
हालांकि आज तक दुनिया की किसी भी वैज्ञानिक संस्था ने इस पर अभी खोज भी शरू नही की। यदि भविष्य में सूर्य के बारे में ऐसी बात सामने आती है तो हम भारतीय सनातनियो को आश्चर्य नही होगा लेकिन आज भी भारत के कश्मीर व हिमाचल प्रदेश में एक सवंत चलती है जिसे लौकिक सवंत कहते है।
जो सप्तर्षि तारा मंडल के आधार पर चलती है। लौकिक सवंत यानी सप्तर्षि तारा मंडल एक नक्षत्र में जाते है। 27 नक्षत्र का एक चक्र पूर्ण करने में 2700 वर्ष लगते है तब यह लौकिक सवंत का एक साल पूरा होता है यानी हमारे पृथ्वी पर 2700 वर्ष निकल जाए तब सप्तर्षियों का एक वर्ष बनता है।
वर्तमान में सप्तर्षि रोहिणी नक्षत्र में है जो 1948 में रोहिणी नक्षत्र में आए थे। अब 19 जनवरी 2048 रविवार को वसंत पंचमी के दिन अश्विन नक्षत्र में आएगे। अभी रोहिणी नक्षत्र में है जो 27 में से चौथा नक्षत्र है।