जीरा फैक्ट्री बंद होने से लोगों में आक्रोश
सीएम भगवंत मान के नाम पर बोली महिलाओं ने
मिठाई से मुंह मीठा किया

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तिलका माँझी (अंग्रेज़ी: Tilka Manjhi ; जन्म- 11 फ़रवरी, 1750, सुल्तानगंज, बिहार; शहादत- 1785, भागलपुर) 'भारतीय स्वाधीनता संग्राम' के पहले शहीद थे। इन्होंने अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध एक लम्बी लड़ाई छेड़ी थी। संथालों द्वारा किये गए प्रसिद्ध 'संथाल विद्रोह' का नेतृत्त्व भी तिलका माँझी ने किया था। तिलका माँझी का नाम देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्रामी और शहीद के रूप में लिया जाता है। अंग्रेज़ी शासन की बर्बरता के जघन्य कार्यों के विरुद्ध उन्होंने जोरदार तरीके से आवाज़ उठायी थी। इस वीर स्वतंत्रता सेनानी को 1785 में गिरफ़्तार कर लिया गया और फिर फ़ाँसी दे दी गई।
जन्म तथा बाल्यकाल
तिलका माँझी का जन्म 11 फरवरी, 1750 को बिहार के सुल्तानगंज में 'तिलकपुर' नामक गाँव में एक संथाल परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम 'सुंदरा मुर्मू' था। तिलका माँझी को 'जाबरा पहाड़िया' के नाम से भी जाना जाता था। बचपन से ही तिलका माँझी जंगली सभ्यता की छाया में धनुष-बाण चलाते और जंगली जानवरों का शिकार करते। कसरत-कुश्ती करना बड़े-बड़े वृक्षों पर चढ़ना-उतरना, बीहड़ जंगलों, नदियों, भयानक जानवरों से छेड़खानी, घाटियों में घूमना आदि उनका रोजमर्रा का काम था। जंगली जीवन ने उन्हें निडर व वीर बना दिया था।[1]
अंग्रेज़ी अत्याचार
किशोर जीवन से ही अपने परिवार तथा जाति पर उन्होंने अंग्रेज़ी सत्ता का अत्याचार देखा था। अनाचार देखकर उनका रक्त खौल उठता और अंग्रेज़ी सत्ता से टक्कर लेने के लिए उनके मस्तिष्क में विद्रोह की लहर पैदा होती। ग़रीब आदिवासियों की भूमि, खेती, जंगली वृक्षों पर अंग्रेज़ी शासक अपना अधिकार किये हुए थे। जंगली आदिवासियों के बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों को अंग्रेज़ कई प्रकार से प्रताड़ित करते थे। आदिवासियों के पर्वतीय अंचल में पहाड़ी जनजाति का शासन था। वहां पर बसे हुए पर्वतीय सरदार भी अपनी भूमि, खेती की रक्षा के लिए अंग्रेज़ी सरकार से लड़ते थे। पहाड़ों के इर्द-गिर्द बसे हुए ज़मींदार अंग्रेज़ी सरकार को धन के लालच में खुश किये हुए थे। आदिवासियों और पर्वतीय सरदारों की लड़ाई रह-रहकर अंग्रेज़ी सत्ता से हो जाती थी और पर्वतीय ज़मींदार वर्ग अंग्रेज़ी सत्ता का खुलकर साथ देता था।

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1 अप्रैल से सभी सरकारी वाहन स्क्रैप में ट्रांसफर होंगे

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माँ तुझे सलाम!
माँ की ममता अनमोल है!
अपने भूखे बच्चों को खाना खिलाने के लिए अपने बाल 150 रूपये में बेच दिए।
निःशब्द कर दिया इस देवी ने। ऐसा एक माँ ही कर सकती है।

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यु ही कोई राजस्थानी थोड़ी बन जाता है 😄😄
कहते है मारवाड़ी पीछे पड़ते है तो चुन बांध के पड़ते है
अब ग्रामीण इलाको में कई बार डिलीवरबॉय बिच रास्ते से वापस चले जाते है
पर अब इसको Bhikharam के घर तक जाना होगा

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2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने वाली RPS अधिकारी पर सरकार का एक्शन, पहले गिरफ्तारी अब किया सस्पेंड
जयपुर (jaipur). 2 करोड की रिश्वत मांगने वाली आरपीएस अधिकारी दिव्या मित्तल को सरकार ने निलंबित कर दिया है। दिव्या मित्तल ने हरिद्वार के एक कारोबारी को डरा धमका कर उससे 2 करोड रुपए की रिश्वत लेने की कोशिश की थी। बाद में 50 लाख में सौदा तय हुआ था, लेकिन कारोबारी ने इस बारे में भ्रष्टाचार (rajasthan crime news) निरोधक ब्यूरो के अफसरों को जानकारी दी और उसके बाद अफसरों ने ट्रैप प्लान किया।

NCB के ट्रैप की जानकारी हुई लीक
लेकिन ट्रैप की जानकारी लीक हो गई और पैसे लेने आने वाला व्यक्ति फरार हो गया। दरअसल दिव्या मित्तल ने बर्खास्त सिपाही सुमित की मदद से 50 लाख मांगे थे, लेकिन सुमित को टेप के बारे में जानकारी मिल गई थी और वह फरार हो गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिव्या मित्तल को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे 3 दिन के रिमांड पर लिया गया है। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे कल अजमेर में कोर्ट में पेश करने की तैयारी की जा रही है। इस बीच आज शाम गृह विभाग ने दिव्या मित्तल के निलंबन आदेश जारी कर दिए। विभाग के संयुक्त शासन सचिव जगबीर सिंह ने यह निलंबन आदेश जारी किए हैं।

उल्लेखनीय है कि दिव्या मित्तल एसओजी अजमेर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थी । वह करीब 6 से 7 साल उदयपुर में रही। इस दौरान आबकारी विभाग में भी तैनात रही। दिव्या के जयपुर, झुंझुनू ,उदयपुर समेत कई जिलों में एसीबी की टीम ने सर्च की है। इन सर्च के दौरान एसीबी को काफी सारे सबूत मिले हैं। उधर अजमेर की आनासागर झील में भी कुछ सबूत सर्च किए जा रहे हैं। यह सबूत दिव्या मित्तल ने रविवार रात को फेंके थे।

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