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अब यह सीजन चल रहा है ठंडी का इसमें हल्दी और बाजरे की रोटी खाने का आंनद भी कुछ अलग है

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कड़ाके की ठंड और कयामत की राते थी
जबर जुल्म की हद पार करने वाली बातें थी
शहीद होने का उनमें कमाल का जुनून था
कैसे झुक जाते वो जबर जुल्म के आगे
जिनकी रगों में गुरु गोविंद सिंह का खून था

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राजस्थानी देसी खाना खाने का आनंद ही कुछ अलग है खीर रावड़ी गी फिर काचरों की चटनी खाओ और बीमारियों से दूर रहो🙏❤️👇

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