वाह रे गहलोत साहब, कितना गिरते जाओगे, खेर विवेकहीन गिरता है तो गिरता ही जाता है और एक दिन रसातल पहुँचता है गणेश जी और दुर्गा जी मुर्तिया तीन फ़ीट ऊँची होंगी क्यों? जरा यह नियम अन्य किसी के लिए बना सकते हो नहीं बना सकते हो 😥शेम शेम @ashokgehlot51
क्रोध किया यह महत्वपूर्ण नहीं, अपितु क्रोध क्यों किया यह महत्वपूर्ण है। लोकहित, लोकमंगल और धर्म को ग्लानि से बचाने के लिए किया गया क्रोध भी कल्याणकारी होता है। सामर्थ्यवान होकर अन्याय और अनीति को सहते रहना अन्याय को बढ़ावा देने जैसा ही है। ☝️
जब तक हमारे मन में क्रोध, शोक, दुःख और विषाद होता है, तब तक हमारे स्वभाव में दोष है...सर्वप्रथम इन दोषों को मिटाने की चेष्टा करके स्वभाव को विशुद्ध करना चाहिये..!