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अदृश्य विवाद पर मेरे विचार
नारी सम्मान सर्वदा अनिवार्य है..
हमारे सनातन धर्म में स्त्रियों को विशेष स्थान प्राप्त है, स्त्री को लक्ष्मी माना गया है, बीतते समय के साथ स्त्री के अनेकों रूप देखे गए है, अच्छे कर्म करने वाली स्त्री को लक्ष्मी और कुकर्म में लिप्त औरत को कुलक्ष्णी कहा गया है...
फिर भी सभ्य पुरुष वर्ग सभी का सम्मान करता है।। स्त्री अच्छे व्यवहार और सुंदर विचारों वाली है तो उससे संबंध रखिए, यदि वह किसी भी प्रकार से आपके सामाजिक मापदंडों पर खरी नहीं है तो उससे दूरी बनाएं,
जो भी स्त्री आपके अनुसार दुष्चरित्र है उससे किसी भी प्रकार का लाभ न लेवे, अपने लाभ हेतु आप उससे संबंध रखें, और बाद में विवाद उत्पन्न होने उसके मान की हानि करें तो, इसमें गलत वो नही आप है।।
यदि किसी स्त्री को रक्षित नही कर सकते तो सम्मान को ठेस पहुंचाने के अधिकारी भी आप नही है...
जब खुद के घर में पत्नी बेटी बहन है, जैसा व्यवहार आप अपने परिवार के लिए चाहते है, उसी प्रकार सभी स्त्री को सम्मान दें, या फिर दूर रहें
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।
अर्थात्- जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नही होती है, उनका सम्मान नही होता है वहाँ किये गये समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं।
नारी का हनन करने वाला सदा ही दुख पाता है।।
सभ्य पुरुष इस बात को समझेंगे...!! किनारा कर बात खत्म कीजिए 🙏
नोट____ हम किसी भी पक्ष से नही है (तटस्थ)
@everyone