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ਸਵੇਰੇ ਆਰਤੀ ਦੇ ਵੇਲੇ ਪਵਿੱਤਰ ਸ਼੍ਰੀ ਅਮਰਨਾਥ ਗੁਫਾ ਦੇ ਵਿੱਚ ਹੋਏ ਅਮਰ ਕਬੂਤਰ ਦੇ ਦੀਦਾਰ
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर में कल क्या कहा जरा जान लीजिए! उन्होंने कहा, यह कैसे हो सकता है कि शिवस्वरूप भगवान शंकर बाबा अमरनाथ के रूप में हमारे पास हों और शक्तिस्वरूपा भगवती मां शारदा बॉर्डर के उस पार पीओके में हों? हमने 370 यूं ही नहीं हटाई, मां शारदा को बाबा अमरनाथ के करीब लाने का वायदा हमने इस देश की जनता से किया है! शक्तिपीठ मां शारदा और मार्तंड तीर्थ कश्मीर की नहीं, पूरे भारतवर्ष की आत्मा हैं!
कश्मीर की धरती पर पीओके स्थित मां शारदा पीठ को वापस लाने का एलान क्या यूं ही कर दिया रक्षा मंत्री ने? हम ऐसा नहीं मानते। याद कीजिए370 हटाते हुए अमित शाह ने संसद में दहाड़ते हुए कहा था कि पीओके हमारा है, मां शारदा हमारी हैं और एक दिन हम पीओके लेकर रहेंगे। तो क्या कश्मीर की धरती पर शारदा पीठ लेने की ललकार पाकिस्तान को बड़ी धमकी है? क्या यह मोदी 2 के आखिरी वर्षों का पूर्व से तयशुदा एजेंडा है? राजनाथसिंह का कद मोदी मंत्रिमंडल में मोदी के बाद दूसरा है। तो जाहिर है शारदा और बाबा अमरनाथ को जोड़ने की बात उन्होंने यूं ही नहीं कह दी?
माना जा सकता है कि अगले आम चुनाव से पहले भारत सरकार कश्मीर वापस लेने का यह एजेंडा भी पूरा कर लेना चाहती हो। यह सबको पता है कि इस देश में यह काम केवल मोदी के जमाने में ही संभव है। मोदी के मुकाबले विपक्ष के जितने नेता अगला पीएम बनने का ख़्वाब देख रहे हों, उनमें से किसी में भी ऐसा माद्दा नहीं है कि पीओके ले सकें।
आजादी के बाद लोगों ने आधा कश्मीर पाकिस्तान को कब्जाने तो दिया परंतु उसे वापस लाने की बात किसी ने नहीं की। पीओके की बात तो दूर किसी ने 370 जैसी अमानवीय और असंवेधानिक धारा को हटाने का ख्वाब तक नहीं देखा। कश्मीर में पंडितों के पचास हजार मंदिर आजाद भारत में तोड़े गए। इन्हें आक्रांताओं ने नहीं, हमारे अपने देश के कश्मीरी आतंकियों ने तोड़ा।
राजनाथ सिंह यदि शारदापीठ यानीशक्ति को अमरनाथ यानी शिव से जोड़ने की बात श्रावण के महीने में कर रहे हैं तो अर्थ समझिए। सब जानते हैं कि कांवड़ यात्रा चल रही है। हरिद्वार से ही अब तक करीब तीन करोड़ कांवड़ यात्री देश के विभिन्न राज्यों की ओर निकल पड़े हैं। कल्पना कीजिए अगली कांवड़ यात्रा का जलाभिषेक यदि कश्मीर के शिवालयों में हो जाए तो?
वैसे यह महज एक भाव है, योजना नहीं। हम जानते हैं कि दुनिया में सबसे बहादुर हमारी फौजें पीओके वापस लेने में पूरी तरह सक्षम हैं। यह भी जानते हैं कि पीओके उसी तरह वापस आएगा जिस तरह बांग्लादेश बनाया गया है। अब सावन के महीने में यदि शिवशक्तिकी बात चल ही पड़ी है तो यकीन मानिए, जल्द ही अंजाम तक पहुंचेगी भी जरूर। शायद काफी जल्दी ही। देश के 140 करोड़ लोगों का स्वप्न कभी तो पूरा होना ही है। भगवान भोलेनाथ एक दिन यह भी जरूर कराएंगे।