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भगवान राम , रावण से ही 32 दिन तक युद्ध किये।
जब युद्ध कर रहे थे तो देवता भी संशय में थे परिणाम क्या होगा।
ऐसे भयानक युद्ध को जीतने के बाद , मिली हुई लँका विभीषण को दे दिये।
गोस्वामी जी लिखते है। भगवान बहुत सकुचा कर देते है कि यह तो इसी की है।
उधर बाली जो अपने भाई की भार्या को बलात रख लिया , राज्य से बाहर कर दिया, किष्किंधा में जाकर सुग्रीव न छिपता तो बाली मार देता।
लेकिन जब भगवान उसको मारे तो पूछ रहा है।
क्यों मारे है , दोष मेरा क्या है।
यह कोई पूछने बात है। इतने बड़े अपराध के बाद भी इसका आभास नहीं है कि तुमने क्या किया।
यह प्रश्न ही क्रुद्ध करने वाला है।
मैं ईक्वांक्षवंशी राम हूँ , यह समस्त धरती मेरे पूर्वजो कि है। मुझे अधिकार है कि तुम्हारे पाप के लिये मैं दंड दूं।
बाली ऐसा प्रश्न न करता तो मृदुभाषी , करुणानिधि भगवान ऐसा उत्तर कभी न देते।
योगी से लेकर पीठ तक का परिहास करने वाले , जब ऐसे ही प्रश्न कर रहे है तो ,वैसा ही उत्तर देना ही उचित है।
पूरे पश्चिमी उत्तरप्रदेश में नामी दंगाईयों , माफियों , पलायन के लिये जिम्मेदार लोगों को टिकट दिया जा रहा है। वह सभी धमकी दे रहे है। एक विपक्षी पार्टी का श्लोगन है ' सबका हिसाब होगा '।
फिर यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी यह कह रहे है कि, सबकी गर्मी 10 मार्च के बाद उतार देंगें तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
हमनें बूढ़ा होने का राज खोज लिया है।
हम उदास है ! फिर भी जीना चाहते है।
यह रहस्य भारत में खोजा गया है।
धन हाथ कि मैल है
हमनें तिजोरिया भर रखी है।
प्रेम के बिना जीवन संभव नहीं है
हमनें समाज को नैतिक बंधनो से बांध दिया है।
मनुष्य कर्म से महान बनता है
हमनें जन्म से भेदभाव बनाया है।
विचारों में यह द्वंद्व , स्मृतियों का बोझ ही तो बूढ़ा बना देता है।
यह रहस्य हमनें ही खोजा है।।