24 ш - перевести

https://southlakesignstampa.co....m/turn-your-floors-i

Your Floors into Art with Unique Graphics
southlakesignstampa.com

Your Floors into Art with Unique Graphics

Did you know that your floors can be a marketing asset? Transform your floors with the help of floor graphics. Here are creative ideas to start with.
24 ш - перевести

https://southlakesignstampa.co....m/discover-the-impac

The Impact of Lobby Signs on Your Business
southlakesignstampa.com

The Impact of Lobby Signs on Your Business

Lobby signs help welcome customers into your space. However, they can do more than that. Find out how the right lobby sign can impact your business today.
24 ш - перевести

https://southlakesignstampa.co....m/discover-the-impac

The Impact of Lobby Signs on Your Business
southlakesignstampa.com

The Impact of Lobby Signs on Your Business

Lobby signs help welcome customers into your space. However, they can do more than that. Find out how the right lobby sign can impact your business today.
24 ш - перевести

नक़्शे पर देश तुम्हारा होता है, झंडा भी तुम्हारा लहराता है, लेकिन ज़मीन के नीचे क्या निकलेगा और उसका मालिक कौन होगा—यह कोई और तय करता है। जैसे ही किसी देश में तेल मिलता है, अचानक वहां लोकतंत्र, मानवाधिकार और सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो जाती है।
कमज़ोर देशों के लिए नियम अलग हैं। उनके संसाधन “वैश्विक हित” बन जाते हैं और उनकी संप्रभुता “शर्तों” के साथ चलती है। जिनके पास ताक़त है, उनके गलत फ़ैसले भी रणनीति कहलाते हैं। और जिनके पास सिर्फ तेल है, उन्हें सुधार, प्रतिबंध और हस्तक्षेप का पाठ पढ़ाया जाता है।
यह व्यंग्य कड़वा है, लेकिन सवाल सच पूछता है—
क्या आज की दुनिया में बिना ताक़त के आज़ादी संभव है,
या फिर ताक़त ही नैतिकता का प्रमाण बन चुकी है?
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट व्यंग्यात्मक और सामान्य राजनीतिक टिप्पणियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी देश, संस्था या व्यक्ति के विरुद्ध घृणा फैलाना नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति की प्रवृत्तियों पर विचार प्रस्तुत करना है।

image
24 ш - перевести

यह तस्वीर किसी छोटे या पिछड़े इलाके की नहीं है, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली के दिल की है। जहाँ रोज़ हजारों लोग आते-जाते हैं, वहीं कुछ गैर-जिम्मेदार लोग पान, गुटखा और तंबाकू खाकर ऐसी जगहों को गंदा कर देते हैं। एस्केलेटर पर कचरा, धूल, और हर तरफ थूके गए गुटखे के लाल निशान सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि हमारी सोच का आईना हैं।

सबसे दुख की बात यह है कि ये वही लोग होते हैं जो साफ-सुथरे कपड़े पहनते हैं, मोबाइल पर ज्ञान की बातें करते हैं, लेकिन सार्वजनिक जगह को अपना थूकदान समझ लेते हैं। क्या यह जगह सिर्फ सरकार की है? क्या इसे साफ रखना केवल कर्मचारियों की जिम्मेदारी है? नहीं। यह जगह हम सबकी है।

गुटखा खाकर दीवारें रंग देना, सीढ़ियाँ गंदी करना और फिर सफाई की उम्मीद करना सरासर गलत है। अगर हमें सच में “विश्वगुरु” बनना है, तो शुरुआत थूकना बंद करने से करनी होगी। वरना राजधानी चमकने की जगह यूँ ही बदनाम होती रहेगी।

image
24 ш - перевести

आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद की ज़मानत याचिका खारिज किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बयान सामने आना पूरी तरह स्वाभाविक और ज़रूरी है। जब देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता का सवाल हो, तब किसी भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का साफ़ और कड़ा रुख अपनाना गलत नहीं कहा जा सकता। गिरिराज सिंह ने वही बात कही है, जो देश का आम नागरिक सोचता है लेकिन खुलकर कह नहीं पाता।
आज देश बार-बार ऐसे लोगों को देख चुका है, जो अभिव्यक्ति की आज़ादी की आड़ में भारत को कमजोर करने वाली सोच को आगे बढ़ाते हैं। अगर अदालत ने ज़मानत से इनकार किया है, तो इसका मतलब है कि आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ऐसे में गिरिराज सिंह का देशहित में आवाज़ उठाना राष्ट्रभक्ति का उदाहरण है। देश के खिलाफ सोच रखने वालों पर सख्ती होना ही चाहिए, तभी आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित भारत देख पाएंगी।
डिस्क्लेमर:
यह पोस्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करती है।

image
24 ш - перевести

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही घटनाएं अब दिल दहला देने वाली बनती जा रही हैं। हाल ही में के झेनैदाह जिले के कलिगंज इलाके में एक 40 वर्षीय हिंदू महिला के साथ जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। महिला को पेड़ से बांधा गया, उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और दरिंदगी की हद पार करते हुए उसके बाल तक काट दिए गए। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि डर फैलाने की साजिश जैसा लगता है।
दुख इस बात का है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ समय से हिंदुओं पर हमले, हत्याएं और उत्पीड़न लगातार सामने आ रहे हैं। हर बार पीड़ित वही और खामोशी भी वही। गुस्सा इसलिए आता है क्योंकि के नेतृत्व वाली सरकार इसे “सामान्य आपराधिक घटना” बताकर पल्ला झाड़ लेती है। क्या किसी समुदाय को निशाना बनाकर की गई हिंसा सामान्य हो सकती है?
यह पोस्ट लिखते हुए दिल भारी है और गुस्सा भी। सवाल यही है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट मीडिया व सोशल मीडिया में उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है। उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं, बल्कि मानवाधिकारों पर चिंता जताना है।

image
24 ш - перевести

Muskaan Power Infrastructure Ltd" is highly recognized for its high-quality range of Compact / Power Substation Transformers.
CONTACT NOW FOR BETTER DEALS -
+91 9915703061
EMAIL: INFOmuskaan power.COM
WEBSITE:WWW.MUSKAANPOWER.COM
#cementplant #tubemills #rollingmills #ricemills #flourmills #riceshellers #foodprocessin****its #transformers #ricemills #voltagecontrolles

image
24 ш - перевести

Muskaan Power Infrastructure Ltd" is highly recognized for its high-quality range of Compact / Power Substation Transformers.
CONTACT NOW FOR BETTER DEALS -
+91 9915703061
EMAIL: INFOmuskaan power.COM
WEBSITE:WWW.MUSKAANPOWER.COM
#cementplant #tubemills #rollingmills #ricemills #flourmills #riceshellers #foodprocessin****its #transformers #ricemills #voltagecontrolles

image

image