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बनारसगिरी 1 की अपार सफलता के बाद आइये, जुड़िए स्वास्थ्य, संस्कृति और मनोरंजन से जुड़े इस कार्यक्रम से।
बनारसगिरी 2.0...
चाहे तो इसमें अपनी सहभागिता करिए, चाहे तो इसे देखने आइये।
आप सभी का स्वागत है।
नेहरू पार्क, छावनी के सामने।
JHV मॉल के बगल में।
रविवार 5 जनवरी, प्रातः 7.30 बजे से।
Ahead of his show in #guwahati, #diljitdosanjh, the global music sensation, visited #kamakhyatemple on Saturday, December 28. Dosanjh will perform at the Sarusajai Stadium as part of Dil-Luminati Tour.
आज नगर निगम देहरादून के वार्ड नंबर-76 #निरंजनपुर से पार्षद पद की उम्मीदवार श्रीमती #शीना_मेहता जी के कार्यालय के उद्घाटन समारोह में प्रतिभाग किया एवं समस्त क्षेत्र वासियों से अपील की कि बेटी शीना एवं मेयर प्रत्याशी श्री विरेन्द्र पोखरियाल जी को अपना अमूल्य वोट देकर उन्हें भारी मतों से विजयी बनाएं।
इस दौरान नगर निगम देहरादून के मेयर प्रत्याशी श्री #विरेन्द्र_पोखरियाल जी सहित अन्य साथी मौजूद रहे।
।।जय कांग्रेस - विजय कांग्रेस।।
हम जंहा के निवासी हैं। वही की एक घटना है जिससे सभी परिचित है। थोड़ा बिलंब से इस पर लिख रहें है।
अतुल ने सोशल पर वीडियो बनाकर आत्महत्या किया था।
पूरा घटनाक्रम पुरुष स्त्री में बंट गया। यह अंतहीन बहस है। जो चलती रही, चलती भी रहेगी।
लेकिन इसमें जो स्पष्ट बात सामने आई है। वह यही है कि एक कठोर कानून अत्याचार का अस्त्र बन गया है।
कोई किसी के साथ नही रहना चाहता तो यह कानून आपको बाध्य करेगा कि आप नर्क भरी जिंदगी जिएं या आत्महत्या कर लें।
हम कभी भाई, पिता, बहन , मित्र किसी के साथ नहीं रहना चाहते हैं। यह रिश्तों की जटिलता है। वैसे पत्नी या पति के साथ नहीं रहना चाहते तो इसके लिये मृत्युदंड जैसे कानून क्यों बनाये गये हैं। पति पत्नी का रिश्ता कोई समुद्र मंथन से निकला है। जो टूट गया तो ब्रह्मांड हिल जायेगा।
जैसे दुनिया के अन्य देशों मे सरल कानून हैं। वैसे ही भारत में क्यों नहीं होना चाहिये। आश्चर्य कि बात है पिछले 15 दिन से मीडिया, सोशल मीडिया, सुप्रीम कोर्ट सब में यह बहस का विषय है। लेकिन कानून बनाने वाली संस्था संसद जो इस समय चल भी रही है। उसमें कोई चर्चा नही है। अब संसद मात्र भाषणबाजी का केंद्र बनकर रह गई है। किसी भी गम्भीर विषय पर वहां बात नहीं होती।
संसद अभी चाहे तो कानून को सरल करके इस कानूनी अत्याचार से लाखों लोगों का जीवन बचा सकती है।।
बहुत बार ऐसा होता है।
हम जानते हैं, जो हम पाना चाहते हैं। उसे पा नहीं सकते हैं। फिर उसे पाने के प्रयास का आनंद लेते हैं। जिसकी अंतिम परिणीति दुख है।
बहुतायत लोग ऐसे हैं। जिनके पैरों में नैतिकता, सही - गलत कि बेड़ियां पड़ी है। वह खोने के दुख से डरते हैं। या इससे डरते हैं कि लोग क्या कहेंगें। जीवन के महान अनुभव से वंचित हो जाते हैं।
वह अनुभव है, वह चाहत जिसे पाना अंसभव है।
हम दुख से डरते हैं, इसके लिये अच्छाइयों का बोझ लाद लेते हैं। यह भी अहंकार ही है। देखो हम कितने अच्छे है। जबकि अंदर मन खंड खंड टूटा है। टूटा हुआ मन, हजार दुखों पर भारी पड़ जाता है।।