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माँ लक्ष्मी हमेशा करेंगी घर में वास
● हल्दी की एक गांठ लेकर पीले रंग के कपड़े में बांध दें, इसके बाद इसे घर के प्रवेश द्वार में अंदर की ओर टांग दें, ऐसा करने से सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति होती है और मां लक्ष्मी हमेशा प्रसन्न रहती हैं।
● घर के मुख्य द्वार में हल्दी से "ऊँ" और "स्वास्तिक" का चिन्ह बनाएं, इसके बाद गंगाजल छिड़क दें, ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा अधिक उत्पन्न होगी।
● शास्त्रों के अनुसार, प्रतिदिन मुख्य द्वार को साफ-सुथरा करने के साथ पानी में थोड़ी सी हल्दी डालकर मुख्य द्वार को धोना लाभकारी सिद्ध होता है, ऐसा करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं।
● घर के मुख्य द्वार पर सुबह के समय प्रतिदिन रंगोली बनाना शुभ माना जाता है, रंगोली बनाने के लिए आप आटा में थोड़ी सी हल्दी डालकर नियमित रूप से रंगोली बनाएं।
#jyotish #upay #vastu #home #life

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दीपावली आते ही सोनपापड़ी की हालत.!!🤣🤣

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#दीपावली के #पटाखों से #सबसे ज्यादा #समस्या #विदेशी #नस्ल के #कुत्तों को होती है...

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पूरी कहानी पढियेगा...
वो विधवा थी पर श्रृंगार ऐसा कर के रखती थी कि पूछो मत। बिंदी के सिवाय सब कुछ लगाती थी। पूरी कॉलोनी में उनके चर्चे थे। उनका एक बेटा भी था जो अभी नौंवी कक्षा में था । पति रेलवे में थे उनके गुजर जाने के बाद रेलवे ने उन्हें एक छोटी से नौकरी दे दी थी । उनके जलवे अलग ही थे । 1980 के दशक में बॉय कटिंग रखती थी । सभी कालोनी की आंटियां उन्हें 'परकटी' कहती थी । 'गोपाल' भी उस समय नया नया जवान हुआ था । अभी 16 साल का ही था । लेकिन घर बसाने के सपने देखने शुरू कर दिए थे । गोपाल का आधा दिन आईने के सामने गुजरता था और बाकि आधा परकटी आंटी की गली के चक्कर काटने में।
गोपाल का नव व्यस्क मस्तिष्क इस मामले में काम नहीं करता था कि समाज क्या कहेगा ? यदि उसके दिल की बात किसी को मालूम हो गई तो ? उसे किसी की परवाह नहीं थी । परकटी आंटी को दिन में एक बार देखना उसका जूनून था ।
उस दिन बारिश अच्छी हुई थी । गोपाल स्कूल से लौट रहा था । साइकिल पर ख्वाबो में गुम उसे पता ही नहीं लगा कि अगले मोड़ पर कीचड़ की वजह से कितनी फिसलन थी । अगले ही क्षण जैसे ही वह अगले मोड़ पर मुड़ा साइकिल फिसल गई और गोपाल नीचे । उसी वक्त सामने से आ रहे स्कूटर ने भी टक्कर मार दी । गोपाल का सर मानो खुल गया हो । खून का फव्वारा फूटा । गोपाल दर्द से ज्यादा इस घटना के झटके से स्तब्ध था । वह गुम सा हो गया । भीड़ में से कोई उसकी सहायता को आगे नहीं आ रहा था । खून लगातार बह रहा था । तभी एक जानी पहचानी आवाज गोपाल नाम पुकारती है । गोपाल की धुंधली हुई दृष्टि देखती है कि परकटी आंटी भीड़ को चीर पागलों की तरह दौड़ती हुई आ रही थी । परकटी आंटी ने गोपाल का सिर गोद में लेते ही उसका माथा जहाँ से खून बह रहा था उसे अपनी हथेली से दबा लिया । आंटी की रंगीन ड्रेस खून से लथपथ हो गई थी । आंटी चिल्ला रही थी "अरे कोई तो सहायता करो, यह मेरा बेटा है, कोई हॉस्पिटल ले चलो हमें ।"
गोपाल को अभी तक भी याद है । एक तिपहिया वाहन रुकता है । लोग उसमे उन दोनों को बैठाते हैं । आंटी ने अब भी उसका माथा पकड़ा हुआ था । उसे सीने से लगाया हुआ था । गोपाल को टांके लगा कर घर भेज दिया जाता है । परकटी आंटी ही उसे रिक्शा में घर लेकर जाती हैं । गोपाल अब ठीक है । लेकिन एक पहेली उसे समझ नहीं आई कि उसकी वासना कहाँ लुप्त हो गई । जब परकटी आंटी ने उसे सीने से लगाया तो उसे ऐसा क्यों लगा कि उसकी माँ ने उसे गोद में ले लिया हो । वात्सल्य की भावना कहाँ से आई । उसका दृष्टिकोण कैसे एकक्षण में बदल गया । क्यों वह अब मातृत्व के शुद्ध भाव से परकटी आंटी को देखता था ।
(2018) आज गोपाल एक रिटायर्ड अफसर है । समय बिताने के लिए कम्युनिटी पार्क में जाता है । वहां बैठा वो आज सुन्दर औरतों को पार्क में व्यायाम करते देख कर मुस्कुराता है । क्योंकि उसने एक बड़ी पहेली बचपन में हल कर ली थी । वो आज जानता है, मानता है, और कई लेख भी लिख चूका है कि महिलाओं का मूल भाव मातृत्व का है । वो चाहें कितनी भी अप्सरा सी दिखें दिल से हर महिला एक 'माँ' है । वह 'माँ' सिर्फ अपने बच्चे के लिए ही नहीं है । वो हर एक लाचार में अपनी औलाद को देखती है । दुनिया के हर छोटे मोटे दुःख को एक महिला दस गुणा महसूस करती है क्योंकि वह स्वतः ही कल्पना कर बैठती है कि अगर यह मेरे बेटे या बेटी के साथ हो जाता तो ? इस कल्पना मात्र से ही उसकी रूह सिहर उठती है । वो रो पड़ती है । और दुनिया को लगता है कि महिला कमजोर है । गोपाल मुस्कुराता है, मन ही मन कहता है कि
"हे, विश्व के भ्रमित मर्दो ! औरत दिल से कमजोर नहीं होती, वो तो बस 'माँ' होती है
साभार सोशल मीडिया 👏

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गजब का संदेश 🥺🥺
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जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उनहोंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’ हमने आखें बंद कर लीं,,, जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’

इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और हमारे पास आजादी और निजता थी।

उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है।’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।
जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।
“ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”

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औरत आदमी से क्या चाहती है?
पाँँच बरस पहले की कहानी है।

हमारे घर के सामने एक लोहार
अपनी बीवी के साथ रहने आया था।
मतलब उसने एक झोपडी जैसा तंबू
खडा किया था।

कुछ दिन बाद मैंने देखा कि उस तंबू के
सामने कुछ लड़के वहाँँ खड़े रहते थे।

हर रोज वो वहाँँ आके खड़े रहने लगे।

मैंने उनका निरीक्षण किया तो मैंने
देखा कि वो लड़के बहुत अमीर थे।

उनके गले में सोने के गहने,
हाथ में सोने की अंगूठियां थीं।
उनके पास गाड़ियां थींं।

मै सोचने लगा कि,
ये लोग हर रोज वहाँँ
आके क्यूँँ खड़े रहते हैं?

एक दिन मैंने उस लोहार
की बीवी को देखा।

लोहार की बीवी,
बहुत ही सुंदर थी।

अवर्णनीय!

अब मुझे समझ में आया कि
ये लड़के वहाँँ हर रोज क्यूँँ खड़े
रहते हैं।

मैं अब हर रोज
निरीक्षण करने लगा।

मैंने देखा कि लोहार की बीवी इन
लड़कों की तरफ देखती भी नहीं थी।

वो और उसका पति,दोनों लोहे
कि वस्तुओ को तैयार करते थे।

पास में ही उसका
छोटासा बच्चा था।

लोहार की बीवी काम करते
करते अपने बच्चे की तरफ
देखकर हंसती थी।
कभी कभी अपने पति के
साथ हंसी मज़ाक करती थी।

लेकिन वो उन लडकों को कोई भी
रिस्पाॅन्स या सिग्नल नहीं देती थी।

उनकी तरफ वो देखती भी नहीं थी।

वो अपने पति के साथ बहुत
खुश और समाधानी थी।

मै सोच रहा था कि उस लोहार
की बीवी को अपने पति से ऐसा
क्या मिल रहा था कि वो अपने
पति के साथ इतनी खुश और
समाधानी थी।

उसका पति उसको रहने के लिए
अच्छा सा घर नहीं दे सकता।

पहनने के लिए सोने
के गहने नहीं दे सकता।

वो उसे फिल्म देखने के लिए
टाॅकीज में या खाने के लिए
होटल मे लेकर नहीं जा सकता।

घूमने के लिए उसे लेकर जाने
के लिए उसके पास कोई गाड़ी
भी नहीं है।
वो उसे अच्छे से कपड़ नहीं दे
सकता।
फिर भी उसकी बीवी उसके साथ
कितनी खुश और समाधानी होकर
रहती है।

मैने ऐसी कई स्त्रि‌‌याँँ देखी हैं,
जो हररोज अपने पति को
कुछ न कुछ माँँगती रहती हैंं।

अगर पति ने नहीं दिया तो फिर
उसके साथ झगड़ा करती हैंं।

किसी पहचान वाली महिला ने
कुछ घर मे लाया तो ये भी अपने
पती को लाने को बोलती है।

अगर उनकी मांगे पूरी नहीं की,
तो समाज के सामने अपने पति
को बेइज्जत करती हैंं।

लेकिन ये लोहार की बीवी इतनी
सुंदर होते हुये भी,इस गरीब लोहार
के साथ खुश है।

अगर वो चाहती तो,
किसी भी पुरुष की तरफ देखकर
हंसती और उसके साथ बातेंं करती
तो भी वो पुरुष उसके लिये इतना
पागल हो जाता कि उसको घर,गाडी,
सोने के गहने,घूमना,होटल मे जाना,
फिल्म देखना ये सब कुछ करता।

एक बात तो सही थी कि ये लोहार
की बीवी उन अमीर लडकों के सोने
के गहने,गाड़ियों इनसे आकर्षित
होकर उनको रिस्पाॅन्स नहीं देती थी।

एक दिन मुझको एक लोहे
की बडी छुरी बनवानी थी।
इसलिए मैंं उस लोहार के
पास गया।

लोहार की बीवी को मैने पूछा कि
दीदी मुझे ऐसी बड़ी छुरी बनवानी है।

कितने पैसे होंगे?

उसने कहा कि,
एक डेढ़ घंटा लगेगा दादा,
आप बैठ जाइए।

मैं उस लोहार और उसकी
बीबी के साथ बाते करने लगा।

मैने उनको पूछा कि,
ये लड़के हर रोज इधर
क्यूं खड़े रहते हैं?

लोहार की बीवी बोली,
दादा जैसे आप हररोज आपके
घर से हमें देखते हैं,वैसे ही ये
लड़के भी हमे देखते हैं।

मैंंने हड़बड़ाकर उसकी तरफ देखा।

तो वो बोली कि आपने मुझे दीदी
बोला,आपकी नजर अलग है और
उन लड़कों की नजर अलग है।

उसका पति बोला,

हम जहां‌ जाते है,
वहां ऐसे ही होता है।
लेकिन मैं ऐसे लोगों की
तरफ देखता भी नहीं।

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