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देव रतूड़ी एक भारतीय उद्यमी और अभिनेता हैं, जो भारत के उत्तराखंड के केमरिया सौड़ गाँव से चीन में एक सफल व्यवसायी बनने की अपनी प्रेरक यात्रा के लिए जाने जाते हैं। टिहरी गढ़वाल जिले के नागथात में जन्मे, उन्हें शुरू में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, उनके गाँव में बुनियादी ढाँचे की कमी थी। बेहतर भविष्य की चाहत से प्रेरित होकर, रतूड़ी अपने बीसवें दशक में दिल्ली चले गए, जहाँ उन्होंने एक रेस्तरां में डिशवॉशर के रूप में काम किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद, उन्होंने इसे सीखने के अवसर के रूप में देखा और लगातार आगे बढ़ते हुए, अंततः एक वेटर और फिर आतिथ्य उद्योग में प्रबंधक बन गए। 2005 में, उन्होंने भाषा या संस्कृति को न जानने की चुनौतियों के बावजूद चीन में एक साहसिक कदम उठाया। उन्होंने शेन्ज़ेन में एक भारतीय रेस्तरां में काम करना शुरू किया, जहाँ उन्हें बहुमूल्य अनुभव प्राप्त हुआ। उनकी उद्यमशीलता की भावना ने उन्हें भारतीय रेस्तरां की अपनी श्रृंखला "रेड फ़ोर्ट" स्थापित करने के लिए प्रेरित किया, जो अपने प्रामाणिक स्वाद और सेवा के लिए लोकप्रिय हो गया। यह श्रृंखला चीन के कई शहरों में फैल गई, जिसने रतूड़ी की सफलता को मजबूत किया। अपने व्यावसायिक उपक्रमों के साथ-साथ, उन्होंने अभिनय करियर भी अपनाया, चीनी फिल्मों और टीवी शो में दिखाई दिए, अक्सर भारतीय किरदार निभाते रहे। व्यवसाय और अभिनय दोनों में उनकी उपलब्धियों ने उन्हें महत्वपूर्ण पहचान दिलाई। रतूड़ी अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं, क्योंकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढाँचे में पहल का समर्थन करके अपने गाँव को वापस देना जारी रखते हैं। डिशवॉशर से लेकर सफल उद्यमी और अभिनेता तक का उनका सफ़र दृढ़ता, महत्वाकांक्षा और इस विश्वास का प्रमाण है कि समर्पण के साथ, कोई भी व्यक्ति किसी भी बाधा को पार कर सकता है और अपने सपनों को प्राप्त कर सकता है।

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उत्तराखंड की पहली महिला रेलवे असिस्टेंट लोको पायलट अंजलि शाह ने इतिहास रच दिया है। पौड़ी गढ़वाल के रिखणीखाल की रहने वाली अंजलि ने बचपन में ही यह सपना देख लिया था कि वह एक दिन ट्रेन चालक बनेंगी। 2019 में अंजलि ने 6 महीने की बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद हरिद्वार-ऋषिकेश रूट पर बतौर असिस्टेंट लोको पायलट अपनी सेवाएं शुरू कीं।
अंजलि की यह उपलब्धि यह दिखाती है कि पहाड़ों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बनाई गई नकारात्मक धारणा गलत है। अंजलि ने अपनी पढ़ाई पहाड़ में ही की और आज वह लोको पायलट बनने का सपना पूरा कर रही हैं। कई पहाड़ी युवाओं ने भी सेना में उच्च पदों पर पहुँचकर देशभर में अपनी सेवाएं दी हैं। फिर भी शिक्षा के नाम पर पलायन का सिलसिला जारी है। अंजलि शाह की यह कहानी पहाड़ के युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो उन्हें अपने सपनों की ओर बढ़ने का हौसला देती है।

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शाहरुख खान ने अपनी छवि सुधारने के लिए असली सच्चाई छिपाई, अनु कपूर..पूरा पढ़े..कमेंट सेक्शन में..

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उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध युवा लोक गायक सौरभ मैठाणी और सुप्रसिद्ध ब्लॉगर प्रियंका योगी तिवारी एक साथ आए नजर।।
#priyankayogitiwari #saurabhmaithani

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बनाकर "दीये मिट्टी" के ज़रा सी "आस" पाली है !
मेरी "मेहनत" ख़रीदो लोगों"मेरे घर भी "दीवाली" है.❣
आप सभी से आग्रह करता हूं इस दिवाली पर अपने भारत देश की मिट्टी से बने दीपक ही खरीदे ताकि इनके घर भी दीवाली मनाई जाए
#दिवाली #deepawali2024 #facebookpost #facebookpage

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जम्मू कश्मीर के अखनूर में LOC के पास सेना की गाड़ी पर। एम/एल

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क्या इस खबर को किसी मीडिया ने दिखाया 😳🤭

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हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें रामभद्राचार्य जी ने अभिनव अरोड़ा को मंच से उतार दिया था,

अब इस वायरल वीडियो पर रामभद्राचार्य जी ने कहा है कि

"वह लड़का मूर्ख है, वह कहता है कि श्री कृष्ण उसके साथ पढ़ते हैं, यह दुर्भाग्य है"

यहां रामभद्राचार्य जी गलत हैं क्योंकि अभिनव अरोड़ा मूर्ख नहीं है बल्कि उसके मां बाप बहुत ही ज़्यादा चालाक हैं।

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