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पिछले एक दो सालों से काशी में धर्म का जितना छिछालेदर होना था हो रहा है ,और काशी वासी न चेते तो इससे ज्यादे होना बाकी है !
काशी विश्वनाथ कोरिडोर के बाद काशी में लोगो का आना शुरू हुआ ,आते पहले भी थे लेकिन दर्शन और तीर्थ के लिए ,अब आते है वीडियो ,फोटो, रील और मौज मस्ती के लिए !
ये सब भी ठीक है ,काशी तीर्थ है तो बनारस मस्तियों का शहर !
लेकिन यहां के मस्ती की परिभाषा तब अलग थी अब अलग है ,अब में दारू, गांजा,चिलम,भाड़पन ज्यादे है |
काशी में पहले धर्म के विद्वान थे साथ ही साथ वो धर्म के लिए लड़ने वाले थे और गलत का डटकर सामना करने वाले भी , अब सब मौन है |
काशी विद्वत परिषद में काशी के विद्वानों/पंडितों से ज्यादे सरकार और शासन के चाहने वालो का बोलबाला है !
खैर बहुत क्या ही लिखना
ताजा मामला देखिए और समझिए
बाबा काल भैरव के गर्भगृह में केक काटकर जन्मदिन मनाया गया ,कल्पना करिए गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर | यही कल्पना किसी और धर्म के लिए करिए कि क्या वहा ऐसा हो सकता है ?
दूसरे पक्ष को देखे तो कुछ साल पहले आम काशीवासी बाबा के गर्भगृह में जाकर आराम से दर्शन करते हुए निकलते थे लेकिन बाहरी भीड़ के चलते अब उनको भी गर्भगृह में प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है |
बाबा के श्रृंगार और अन्य दिनों में आप एक तस्वीर बाबा की नहीं ले सकते आपको नियमों का हवाला दे दिया जाएगा लेकिन कोई आराम से गर्भगृह में जाकर फोटो/वीडियो शूट करे तब उन्हें कोई दिक्कत नहीं !
यहां साला दिन रात शांतिप्रिय कौम के लोग हिंदू धर्म को टारगेट करने में लगी है,
धर्म प्रिय लोग सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक लड़ रहे,FIR और मुकदमे झेल रहे और यहां चंद पैसों की लालच में धर्म को अपने ही बर्बाद कर रहे है 😢
हमारी लड़ाई और पोस्ट इसलिए भी होती रही है कि हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण न हो लेकिन ऐसी तस्वीरें देखकर मन विचलित हो जाता है और लगता है कम से कम वहा ऐसा कुछ हुआ तो सरकार का खुलकर विरोध तो कर सकते है ,यहां तो अपने ही लोग है |
बाबा विश्वनाथ एक बार दया कर सकते है
लेकिन ये भैरव है "भैरव यातना" जरूर देंगे और भैरव की यातना "यम यातना"से कई गुणी ज्यादे होती है !
वक्त है माफी मांगकर संभल जाओ 😄🙏
जय बाबा काल भैरव
पिछले एक दो सालों से काशी में धर्म का जितना छिछालेदर होना था हो रहा है ,और काशी वासी न चेते तो इससे ज्यादे होना बाकी है !
काशी विश्वनाथ कोरिडोर के बाद काशी में लोगो का आना शुरू हुआ ,आते पहले भी थे लेकिन दर्शन और तीर्थ के लिए ,अब आते है वीडियो ,फोटो, रील और मौज मस्ती के लिए !
ये सब भी ठीक है ,काशी तीर्थ है तो बनारस मस्तियों का शहर !
लेकिन यहां के मस्ती की परिभाषा तब अलग थी अब अलग है ,अब में दारू, गांजा,चिलम,भाड़पन ज्यादे है |
काशी में पहले धर्म के विद्वान थे साथ ही साथ वो धर्म के लिए लड़ने वाले थे और गलत का डटकर सामना करने वाले भी , अब सब मौन है |
काशी विद्वत परिषद में काशी के विद्वानों/पंडितों से ज्यादे सरकार और शासन के चाहने वालो का बोलबाला है !
खैर बहुत क्या ही लिखना
ताजा मामला देखिए और समझिए
बाबा काल भैरव के गर्भगृह में केक काटकर जन्मदिन मनाया गया ,कल्पना करिए गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर | यही कल्पना किसी और धर्म के लिए करिए कि क्या वहा ऐसा हो सकता है ?
दूसरे पक्ष को देखे तो कुछ साल पहले आम काशीवासी बाबा के गर्भगृह में जाकर आराम से दर्शन करते हुए निकलते थे लेकिन बाहरी भीड़ के चलते अब उनको भी गर्भगृह में प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है |
बाबा के श्रृंगार और अन्य दिनों में आप एक तस्वीर बाबा की नहीं ले सकते आपको नियमों का हवाला दे दिया जाएगा लेकिन कोई आराम से गर्भगृह में जाकर फोटो/वीडियो शूट करे तब उन्हें कोई दिक्कत नहीं !
यहां साला दिन रात शांतिप्रिय कौम के लोग हिंदू धर्म को टारगेट करने में लगी है,
धर्म प्रिय लोग सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक लड़ रहे,FIR और मुकदमे झेल रहे और यहां चंद पैसों की लालच में धर्म को अपने ही बर्बाद कर रहे है 😢
हमारी लड़ाई और पोस्ट इसलिए भी होती रही है कि हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण न हो लेकिन ऐसी तस्वीरें देखकर मन विचलित हो जाता है और लगता है कम से कम वहा ऐसा कुछ हुआ तो सरकार का खुलकर विरोध तो कर सकते है ,यहां तो अपने ही लोग है |
बाबा विश्वनाथ एक बार दया कर सकते है
लेकिन ये भैरव है "भैरव यातना" जरूर देंगे और भैरव की यातना "यम यातना"से कई गुणी ज्यादे होती है !
वक्त है माफी मांगकर संभल जाओ 😄🙏
जय बाबा काल भैरव
पिछले एक दो सालों से काशी में धर्म का जितना छिछालेदर होना था हो रहा है ,और काशी वासी न चेते तो इससे ज्यादे होना बाकी है !
काशी विश्वनाथ कोरिडोर के बाद काशी में लोगो का आना शुरू हुआ ,आते पहले भी थे लेकिन दर्शन और तीर्थ के लिए ,अब आते है वीडियो ,फोटो, रील और मौज मस्ती के लिए !
ये सब भी ठीक है ,काशी तीर्थ है तो बनारस मस्तियों का शहर !
लेकिन यहां के मस्ती की परिभाषा तब अलग थी अब अलग है ,अब में दारू, गांजा,चिलम,भाड़पन ज्यादे है |
काशी में पहले धर्म के विद्वान थे साथ ही साथ वो धर्म के लिए लड़ने वाले थे और गलत का डटकर सामना करने वाले भी , अब सब मौन है |
काशी विद्वत परिषद में काशी के विद्वानों/पंडितों से ज्यादे सरकार और शासन के चाहने वालो का बोलबाला है !
खैर बहुत क्या ही लिखना
ताजा मामला देखिए और समझिए
बाबा काल भैरव के गर्भगृह में केक काटकर जन्मदिन मनाया गया ,कल्पना करिए गर्भगृह जैसे पवित्र स्थान पर | यही कल्पना किसी और धर्म के लिए करिए कि क्या वहा ऐसा हो सकता है ?
दूसरे पक्ष को देखे तो कुछ साल पहले आम काशीवासी बाबा के गर्भगृह में जाकर आराम से दर्शन करते हुए निकलते थे लेकिन बाहरी भीड़ के चलते अब उनको भी गर्भगृह में प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है |
बाबा के श्रृंगार और अन्य दिनों में आप एक तस्वीर बाबा की नहीं ले सकते आपको नियमों का हवाला दे दिया जाएगा लेकिन कोई आराम से गर्भगृह में जाकर फोटो/वीडियो शूट करे तब उन्हें कोई दिक्कत नहीं !
यहां साला दिन रात शांतिप्रिय कौम के लोग हिंदू धर्म को टारगेट करने में लगी है,
धर्म प्रिय लोग सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक लड़ रहे,FIR और मुकदमे झेल रहे और यहां चंद पैसों की लालच में धर्म को अपने ही बर्बाद कर रहे है 😢
हमारी लड़ाई और पोस्ट इसलिए भी होती रही है कि हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण न हो लेकिन ऐसी तस्वीरें देखकर मन विचलित हो जाता है और लगता है कम से कम वहा ऐसा कुछ हुआ तो सरकार का खुलकर विरोध तो कर सकते है ,यहां तो अपने ही लोग है |
बाबा विश्वनाथ एक बार दया कर सकते है
लेकिन ये भैरव है "भैरव यातना" जरूर देंगे और भैरव की यातना "यम यातना"से कई गुणी ज्यादे होती है !
वक्त है माफी मांगकर संभल जाओ 😄🙏
जय बाबा काल भैरव
