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"लाड़नू की धरती महाप्रज्ञ श्री तुलसी जी की धरती है। इस पवित्र धरा पर ऐसी विभूतियां विराजित हैं जो राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाने का काम भी करती हैं। जैन विश्व भारती के पवित्र स्थान पर 2026 में आचार्य श्री महाश्रमण जी प्रवास करेंगे। यह पूरे प्रदेश के लिए मंगलकारी होगा।"

📍जैन विश्व भारती के सुधर्मा सभा प्रवचन स्थल का शिलान्यास कार्यक्रम, लाडनूं

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यह हैं देवरिया की DM दिव्या मित्तल जी, ये बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने गईं हुईं थीं तो

ADM ने धूप का हवाला देते हुए छांव में बैठकर बात करने का आग्रह किया तो इसपर दिव्या मित्तल ने कहा कि

"अरे यार धूप ही तो है, रुको पिघल थोड़ी जाएंगे"

सभी अधिकारी एक जैसे नहीं होते, कुछ को देखकर सबको एक जैसा समझना कहीं की भी बुद्धिमत्ता नहीं है।

दिव्या मित्तल जैसे भी अधिकारी होते हैं जो जनता की मजबूरियों को अपनी ज़िम्मेदारी समझकर कर्तव्य कर हैं।

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यह हैं देवरिया की DM दिव्या मित्तल जी, ये बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने गईं हुईं थीं तो

ADM ने धूप का हवाला देते हुए छांव में बैठकर बात करने का आग्रह किया तो इसपर दिव्या मित्तल ने कहा कि

"अरे यार धूप ही तो है, रुको पिघल थोड़ी जाएंगे"

सभी अधिकारी एक जैसे नहीं होते, कुछ को देखकर सबको एक जैसा समझना कहीं की भी बुद्धिमत्ता नहीं है।

दिव्या मित्तल जैसे भी अधिकारी होते हैं जो जनता की मजबूरियों को अपनी ज़िम्मेदारी समझकर कर्तव्य कर हैं।

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यह हैं देवरिया की DM दिव्या मित्तल जी, ये बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने गईं हुईं थीं तो

ADM ने धूप का हवाला देते हुए छांव में बैठकर बात करने का आग्रह किया तो इसपर दिव्या मित्तल ने कहा कि

"अरे यार धूप ही तो है, रुको पिघल थोड़ी जाएंगे"

सभी अधिकारी एक जैसे नहीं होते, कुछ को देखकर सबको एक जैसा समझना कहीं की भी बुद्धिमत्ता नहीं है।

दिव्या मित्तल जैसे भी अधिकारी होते हैं जो जनता की मजबूरियों को अपनी ज़िम्मेदारी समझकर कर्तव्य कर हैं।

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असम में मुस्लिम जनसंख्या 40% पर पहुंच चुकी है।

1952 में हमारे असम में केवल 12% मुसलमान थे।

कई जिले हम खो चुके हैं, उनमें मुस्लिम बहुसंख्यक हो चुके हैं।

ये मेरे लिए राजनीति का मुद्दा नहीं है, अब मेरे लिए जीवन-मृत्यु का सवाल पैदा हो गया है।

असम एक बॉर्डर राज्य है, मैं रोज घुसपेठियों से लड़ रहा हूँ।

: हिमंता बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री, असम

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,🚩🚩🚩🚩 जय श्री सीताराम 🚩🚩🚩🚩

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महावीर फोगाट हरियाणा के एक छोटे से गाँव बलाली से आते हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन महावीर ने अपने जुनून को कभी नहीं छोड़ा। उन्हें अपने गाँव में पारंपरिक कुश्ती का प्रशिक्षण मिला, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वह राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान नहीं बना पाए।
महावीर फोगाट ने अपनी बेटियों गीता और बबीता को कुश्ती की ट्रेनिंग देने का निश्चय किया, जो उस समय एक क्रांतिकारी विचार था। उनके इस फैसले का समाज ने कड़ा विरोध किया, लेकिन महावीर ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी बेटियों को लड़कों के साथ ट्रेनिंग दिलवाई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की।
गीता फोगाट ने 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। बबीता ने भी इसी तरह से विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की। महावीर की कठिन मेहनत और अटूट विश्वास ने उनके परिवार को भारतीय कुश्ती के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया।
महावीर फोगाट की कहानी केवल एक खेल की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, समर्पण और अडिग विश्वास की कहानी है। उनके जीवन में सस्पेंस और कठिनाइयों का सामना करते हुए उन्होंने अपने परिवार को एक नए मुकाम पर पहुँचाया, जो हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।❤❤🙏

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कविता...
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मैंने कई बार ये सोचा
क्यों लिखती हूँ मैं कविता?
जब मेरी कविताएँ भर नही पाती
फुटपाथ पर बैठे
किसी भूखे बच्चे का पेट
जब कोई कविता बन नहीं पाती छत
किसी गरीब के लिए
जहाँ मिल सके
सर्दी,गर्मी और बारिश में उसे आश्रय
क्या जरूरत है फिर इन कविताओं की!
एक रात फुटपाथ के जरा नज़दीक से
गुजरते हुए सुना मैंने
एक माँ को अपने भूख बिलखते हुए
बच्चों से कहते हुए–
"सुनो,मैं तुम्हें एक कविता सुनाती हूँ
तुम्हें नींद आ जाएगी।"
उस रात घर लौट कर
मैंने लिखी एक और कविता ।
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🙏🙏🚩🚩सभी लोगो को राधे राधे 🚩🚩🚩🙏

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पिअक्रास के लिए अच्छी खबर
अब होगी शराब की होम डिलीवरी

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