image
2 años - Traducciones

मिल्खा सिंह 80 प्रतियोगिताओ में हिस्सा लिए थे जिनमें से 77 जीते थे। आज इनका नाम भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हैं।

image
2 años - Traducciones

पूर्व भारतीय कबड्डी प्लेयर दीपक निवास हुड्डा व भारतीय बॉक्सर गोल्ड मेडल चैम्पियन स्वीटी को शादी की सालगिरह कि हार्दिक शुभकामनाए ❣️❣️
Deepak Niwas Hooda

image
2 años - Traducciones

मात्र 14 साल की ओडिशा की रहने वाली तेजस्वनी प्रियदर्शनी ने बनाई एयर बाइक मात्र 10 Kg कंप्रेस्ड हवा से 60 किलोमीटर चलने में सक्षम है चलिये इनके इस आविष्कार को थोड़ा फेमस करें।
#viralshots #viral #viralpost #fact #dailyfact

image
2 años - Traducciones

आज फिर उत्तराखंड के पांच नौनिहाल भारत माता की एकता और अखंडता के लिए शहीद हुए हैं। मैं उनके बलिदान को प्रणाम करता हूं और उनके शोक संतृप्त परिवारों तक अपनी संवेदना संप्रेषित करता हूं। आज से 21 साल पहले इसी तरीके की परिस्थितियों में मेरे बड़े दामाद जो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में उसी सप्ताह पदोन्नत होने वाले थे, अपने पुत्र तुषार के नामकरण से सीधे फ्रंट पर पहुंचे और शहीद हो गये। आतंकवाद न जाने कितने परिवारों को अश्रुपूर्ण स्थिति में छोड़ रहा है। आज भी जब कहीं इस तरीके की शहादत के समाचार आते हैं तो मुझे अपने उस पारिवारिक दुखद स्थिति का स्मरण हो आता है। जब भी मैं अपनी बेटी को, अपने नातनियों को जो अब डॉक्टर भी हो गई हैं या नाती तुषार को देखता हूं तो मुझे अपने दामाद के बलिदान के समाचार का स्मरण हो आता है और हृदय चीखने लगता है, आंसू थामने कठिन हो जाते हैं, मैं आतंकवाद के हाथों शहीद हो रहे परिवारों के दुःख को समझता हूं, न जाने कब कश्मीर में आतंकवाद थमेगा? हमें पूरी शक्ति के साथ इस आतंकवाद को कश्मीर में कुचलना है और इसके लिए सारे देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट है।

#uttrakhand

image
2 años - Traducciones

आज फिर उत्तराखंड के पांच नौनिहाल भारत माता की एकता और अखंडता के लिए शहीद हुए हैं। मैं उनके बलिदान को प्रणाम करता हूं और उनके शोक संतृप्त परिवारों तक अपनी संवेदना संप्रेषित करता हूं। आज से 21 साल पहले इसी तरीके की परिस्थितियों में मेरे बड़े दामाद जो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में उसी सप्ताह पदोन्नत होने वाले थे, अपने पुत्र तुषार के नामकरण से सीधे फ्रंट पर पहुंचे और शहीद हो गये। आतंकवाद न जाने कितने परिवारों को अश्रुपूर्ण स्थिति में छोड़ रहा है। आज भी जब कहीं इस तरीके की शहादत के समाचार आते हैं तो मुझे अपने उस पारिवारिक दुखद स्थिति का स्मरण हो आता है। जब भी मैं अपनी बेटी को, अपने नातनियों को जो अब डॉक्टर भी हो गई हैं या नाती तुषार को देखता हूं तो मुझे अपने दामाद के बलिदान के समाचार का स्मरण हो आता है और हृदय चीखने लगता है, आंसू थामने कठिन हो जाते हैं, मैं आतंकवाद के हाथों शहीद हो रहे परिवारों के दुःख को समझता हूं, न जाने कब कश्मीर में आतंकवाद थमेगा? हमें पूरी शक्ति के साथ इस आतंकवाद को कश्मीर में कुचलना है और इसके लिए सारे देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट है।

#uttrakhand

image
2 años - Traducciones

आज फिर उत्तराखंड के पांच नौनिहाल भारत माता की एकता और अखंडता के लिए शहीद हुए हैं। मैं उनके बलिदान को प्रणाम करता हूं और उनके शोक संतृप्त परिवारों तक अपनी संवेदना संप्रेषित करता हूं। आज से 21 साल पहले इसी तरीके की परिस्थितियों में मेरे बड़े दामाद जो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में उसी सप्ताह पदोन्नत होने वाले थे, अपने पुत्र तुषार के नामकरण से सीधे फ्रंट पर पहुंचे और शहीद हो गये। आतंकवाद न जाने कितने परिवारों को अश्रुपूर्ण स्थिति में छोड़ रहा है। आज भी जब कहीं इस तरीके की शहादत के समाचार आते हैं तो मुझे अपने उस पारिवारिक दुखद स्थिति का स्मरण हो आता है। जब भी मैं अपनी बेटी को, अपने नातनियों को जो अब डॉक्टर भी हो गई हैं या नाती तुषार को देखता हूं तो मुझे अपने दामाद के बलिदान के समाचार का स्मरण हो आता है और हृदय चीखने लगता है, आंसू थामने कठिन हो जाते हैं, मैं आतंकवाद के हाथों शहीद हो रहे परिवारों के दुःख को समझता हूं, न जाने कब कश्मीर में आतंकवाद थमेगा? हमें पूरी शक्ति के साथ इस आतंकवाद को कश्मीर में कुचलना है और इसके लिए सारे देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट है।

#uttrakhand

image
2 años - Traducciones

आज फिर उत्तराखंड के पांच नौनिहाल भारत माता की एकता और अखंडता के लिए शहीद हुए हैं। मैं उनके बलिदान को प्रणाम करता हूं और उनके शोक संतृप्त परिवारों तक अपनी संवेदना संप्रेषित करता हूं। आज से 21 साल पहले इसी तरीके की परिस्थितियों में मेरे बड़े दामाद जो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में उसी सप्ताह पदोन्नत होने वाले थे, अपने पुत्र तुषार के नामकरण से सीधे फ्रंट पर पहुंचे और शहीद हो गये। आतंकवाद न जाने कितने परिवारों को अश्रुपूर्ण स्थिति में छोड़ रहा है। आज भी जब कहीं इस तरीके की शहादत के समाचार आते हैं तो मुझे अपने उस पारिवारिक दुखद स्थिति का स्मरण हो आता है। जब भी मैं अपनी बेटी को, अपने नातनियों को जो अब डॉक्टर भी हो गई हैं या नाती तुषार को देखता हूं तो मुझे अपने दामाद के बलिदान के समाचार का स्मरण हो आता है और हृदय चीखने लगता है, आंसू थामने कठिन हो जाते हैं, मैं आतंकवाद के हाथों शहीद हो रहे परिवारों के दुःख को समझता हूं, न जाने कब कश्मीर में आतंकवाद थमेगा? हमें पूरी शक्ति के साथ इस आतंकवाद को कश्मीर में कुचलना है और इसके लिए सारे देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट है।

#uttrakhand

image
2 años - Traducciones

आज फिर उत्तराखंड के पांच नौनिहाल भारत माता की एकता और अखंडता के लिए शहीद हुए हैं। मैं उनके बलिदान को प्रणाम करता हूं और उनके शोक संतृप्त परिवारों तक अपनी संवेदना संप्रेषित करता हूं। आज से 21 साल पहले इसी तरीके की परिस्थितियों में मेरे बड़े दामाद जो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में उसी सप्ताह पदोन्नत होने वाले थे, अपने पुत्र तुषार के नामकरण से सीधे फ्रंट पर पहुंचे और शहीद हो गये। आतंकवाद न जाने कितने परिवारों को अश्रुपूर्ण स्थिति में छोड़ रहा है। आज भी जब कहीं इस तरीके की शहादत के समाचार आते हैं तो मुझे अपने उस पारिवारिक दुखद स्थिति का स्मरण हो आता है। जब भी मैं अपनी बेटी को, अपने नातनियों को जो अब डॉक्टर भी हो गई हैं या नाती तुषार को देखता हूं तो मुझे अपने दामाद के बलिदान के समाचार का स्मरण हो आता है और हृदय चीखने लगता है, आंसू थामने कठिन हो जाते हैं, मैं आतंकवाद के हाथों शहीद हो रहे परिवारों के दुःख को समझता हूं, न जाने कब कश्मीर में आतंकवाद थमेगा? हमें पूरी शक्ति के साथ इस आतंकवाद को कश्मीर में कुचलना है और इसके लिए सारे देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट है।

#uttrakhand

image
2 años - Traducciones

आज फिर उत्तराखंड के पांच नौनिहाल भारत माता की एकता और अखंडता के लिए शहीद हुए हैं। मैं उनके बलिदान को प्रणाम करता हूं और उनके शोक संतृप्त परिवारों तक अपनी संवेदना संप्रेषित करता हूं। आज से 21 साल पहले इसी तरीके की परिस्थितियों में मेरे बड़े दामाद जो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में उसी सप्ताह पदोन्नत होने वाले थे, अपने पुत्र तुषार के नामकरण से सीधे फ्रंट पर पहुंचे और शहीद हो गये। आतंकवाद न जाने कितने परिवारों को अश्रुपूर्ण स्थिति में छोड़ रहा है। आज भी जब कहीं इस तरीके की शहादत के समाचार आते हैं तो मुझे अपने उस पारिवारिक दुखद स्थिति का स्मरण हो आता है। जब भी मैं अपनी बेटी को, अपने नातनियों को जो अब डॉक्टर भी हो गई हैं या नाती तुषार को देखता हूं तो मुझे अपने दामाद के बलिदान के समाचार का स्मरण हो आता है और हृदय चीखने लगता है, आंसू थामने कठिन हो जाते हैं, मैं आतंकवाद के हाथों शहीद हो रहे परिवारों के दुःख को समझता हूं, न जाने कब कश्मीर में आतंकवाद थमेगा? हमें पूरी शक्ति के साथ इस आतंकवाद को कश्मीर में कुचलना है और इसके लिए सारे देश सरकार के प्रयासों के साथ एकजुट है।

#uttrakhand

image
image
image
image
image