VishalPandey missing ShivaniKumari on "Rakhshabandhan"
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VishalPandey missing ShivaniKumari on "Rakhshabandhan"
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सुबह होते ही
न जाने कौन
आसमान के सारे चमकते हुए सितारे
समेट कर रख देता है ।
न जाने कौन है
जो बिन बताए
बादलों में बारिशें भर देता है ।
मैंने कई बार सोचा है
पूछूं उससे
कि मेरी आंखों में चमकते सितारे समेट
उनमें बारिशें भरने वाले
तुम ही तो नहीं ??
~गुंजन
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सुहानी भटनागर, एक चमकता हुआ सितारा, जो 14 जून 2004 को दिल्ली में जन्मी थी, अपने अभिनय से हर किसी के दिल में जगह बनाने में कामयाब हुईं। 🌟 मात्र 10 साल की उम्र में, उन्होंने फिल्म दंगल में युवा बबीता कुमारी फोगाट की भूमिका निभाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। 🎥
सुहानी की प्रतिभा ने उन्हें एक बाल कलाकार के रूप में प्रसिद्धि दिलाई। उनकी मासूमियत और अभिनय की सहजता ने उन्हें एक खास मुकाम तक पहुंचाया। 🎭 उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), फरीदाबाद से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, और इसी दौरान उन्होंने विभिन्न कपड़ों के ब्रांड्स के लिए मॉडलिंग करना भी शुरू किया। उनका अभिनय सफर दंगल से एक नई ऊंचाई पर पहुंचा, और इसके लिए उन्हें 2018 के स्टार स्क्रीन अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता का पुरस्कार भी मिला। 🏆
लेकिन, इस चमकते सितारे की जिंदगी में अचानक एक काला साया आ गया। सुहानी को एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी, डर्माटोमायोसाइटिस, से पीड़ित पाया गया। यह बीमारी उनके हाथों में सूजन के साथ शुरू हुई और धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल गई। 😔
डर्माटोमायोसाइटिस जैसी बीमारी ने सुहानी की जिंदगी को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में ले लिया। 🥺 16 फरवरी 2024 को, AIIMS, दिल्ली में इस नन्हीं कलाकार ने अंतिम सांस ली। उनकी असामयिक मृत्यु ने न केवल उनके परिवार, बल्कि उनके प्रशंसकों और फिल्म इंडस्ट्री को भी गहरे सदमे में डाल दिया। 💔
उनकी मृत्यु के बाद, दंगल फिल्म के सह-कलाकारों और अन्य फिल्मी हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। उनके परिवार ने भी सुहानी की उपलब्धियों पर गर्व जताया। 🌹 उनकी मां ने कहा, "सुहानी ने अपनी छोटी उम्र में ही बहुत कुछ हासिल किया था। वह न केवल एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री थी, बल्कि एक अद्वितीय इंसान भी थी, जिसने अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया।"
सुहानी भटनागर की कहानी एक प्रेरणा की तरह है, जो यह दिखाती है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियां क्यों न हों, हमें हर परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए। ✨
उनकी यादें और उनकी मुस्कान हमेशा हमारे दिलों में बनी रहेंगी। 💖🙏
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आज बात भारत के पहलवान योगेश्वर दत्त की, जिन्होंने साबित किया कि इस दुनिया में मानवता सर्वोपरि है। योगेश्वर दत्त ने 2012 लंदन खेलों में 60 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीता था। उन्हें सेमीफइनल में रूसी पहलवान बेसिक कुदुखोव से हार मिली थी। बाद में कुदुखोव डोपिंग टेस्ट में फेल हो गए थे, जिस वजह से योगेश्वर दत्त का पदक रजत में अपडेट किया जाना था। लेकिन तबतक कुदुखोव की मौत हो चुकी थी। ऐसे में सिल्वर मेडल को लेने से मना करते हुए योगेश्वर दत्त ने कहा था कि "अगर हो सके तो ये मेडल उन्हीं के पास रहने दिया जाए। उनके परिवार के लिए भी सम्मानपूर्ण होगा। मेरे लिए मानवीय संवेदना सर्वोपरि है।" आज जब खेलों में नैतिकता की बात होती है, तब ऐसे नेक दिल खिलाड़ी पर सारा भारत गर्व करता है। योगेश्वर दत्त की दरियादिली पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए। ♥️