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Big Alert🚨
लखनऊ में एक व्यवसायी के घर पर काम करने वाले दानिश ने बाथरूम में चुपके से कैमरा लगाया और उसकी बेटी की नहाने की वीडियो बनाई।
और फिर दानिश वीडियो का इस्तेमाल लड़की को ब्लैकमेल करने और बलात्कार करने के लिए करने लगा 😳
आरोपी दानिश को काम पर रखने वाले व्यवसायी ने उसे अपने घर में एक कमरा और मुफ़्त खाना मुहैया कराया था।
अब फ़िलहाल यूपी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पूजा की शादी साजिद शेख से परसों 23 तारीख को होने वाली थी, एक़ महीने पहले पूजा और साजिद शेख़,शादी के लिए नोटिस दे चुके थे, पोस्ट में नोटिस भी आपको दिखा रहा हूं, नोटिस लड़की के मां बाप तक नहीं पहुंचने दिया गया, लेकिन हमेशा की तरह, गुप्त सूत्र से मुझ तक सूचना, कल शाम पहुंच गई।
मैं अपने वकील को लेकर पहुंचा, लड़की को सैकड़ों उदाहरण देकर समझाया, लड़की मान गई, मैरिज रजिस्ट्रार कोर्ट में लड़की ने, साजिद शेख से, शादी नहीं करने का एफिडेविट अभी प्रस्तुत कर दिया।
लड़की के मां बाप की आंखों में आंसू थे, जो यह बोलना चाह रहे थे कि हमारी बेटी की जिंदगी आपने बचा दी। लेकिन मैंने लड़की के मां बाप के पैर छुए, और आशीर्वाद लेकर अगली मुहिम की तरफ निकल लिया।
कितनी लड़कियों की जिंदगी आज तक बचाई है, यह नहीं बताऊंगा, लेकिन आप सभी जो मेरा साथ दे रहे हैं, इतना विश्वास रखिए, अपनी जान पर खेलकर भी सनातन धर्म के लिए आखरी सांस तक लडूंगा 🙏
एक बात और KERELA फिल्म का भी प्रभाव युवतियों पर पड़ा है, धन्यवाद निर्माता निर्देशक को 🙏🏻🙏🏻
सुबह वाली राम राम मित्रों
समय है #नित्य_मानस_पाठ का
श्रीरामचरितमानस
प्रथम सोपान बालकाण्ड
आज दोहा क्रमांक 205/361
चौपाई :
* बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई॥
पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी॥1॥
भावार्थ:-श्री रामचन्द्रजी भाइयों और इष्ट मित्रों को बुलाकर साथ ले लेते हैं और नित्य वन में जाकर शिकार खेलते हैं। मन में पवित्र समझकर मृगों को मारते हैं और प्रतिदिन लाकर राजा (दशरथजी) को दिखलाते हैं॥1॥
* जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सुरलोक सिधारे॥
अनुज सखा सँग भोजन करहीं। मातु पिता अग्या अनुसरहीं॥2॥
भावार्थ:-जो मृग श्री रामजी के बाण से मारे जाते थे, वे शरीर छोड़कर देवलोक को चले जाते थे। श्री रामचन्द्रजी अपने छोटे भाइयों और सखाओं के साथ भोजन करते हैं और माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हैं॥2॥
* जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा॥
बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई॥3॥
भावार्थ:-जिस प्रकार नगर के लोग सुखी हों, कृपानिधान श्री रामचन्द्रजी वही संयोग (लीला) करते हैं। वे मन लगाकर वेद-पुराण सुनते हैं और फिर स्वयं छोटे भाइयों को समझाकर कहते हैं॥3॥
* प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥
आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥4॥
भावार्थ:-श्री रघुनाथजी प्रातःकाल उठकर माता-पिता और गुरु को मस्तक नवाते हैं और आज्ञा लेकर नगर का काम करते हैं। उनके चरित्र देख-देखकर राजा मन में बड़े हर्षित होते हैं॥4॥
दोहा :
* ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।
भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप॥205॥
भावार्थ:-जो व्यापक, अकल (निरवयव), इच्छारहित, अजन्मा और निर्गुण है तथा जिनका न नाम है न रूप, वही भगवान भक्तों के लिए नाना प्रकार के अनुपम (अलौकिक) चरित्र करते हैं॥205॥
क्रमशः
🚩श्रीरामचरितमानस🚩
गीताप्रेस गोरखपुर से साभार
वटपौर्णिमेच्या सर्व माता-भगिनींना हार्दिक शुभेच्छा!
वटवृक्षाची पूजा करून आपल्या पतीच्या दीर्घायुष्यासाठी, कौटुंबिक उत्कर्षासाठी महिला-भगिनी प्रार्थना करत असतात. त्यांची प्रार्थना सफल होवो हीच कामना..
#वटपौर्णिमा #vatsavitri #purnima #vatsavitri2024 #vatsavitripooja
20 नवम्बर, 1659 ई. - अफजल खां का वध :- बीजापुर की तरफ से अफजल खां को छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ भेजा गया। अफजल खां 10 हज़ार की फौज समेत रवाना हुआ। अफ़ज़ल खां ने सौगंध खाई कि "मैं घोड़े पर बैठे-बैठे ही शिवाजी को बांध कर लाऊंगा"।
शिवाजी महाराज और अफजल खां के बीच पत्र व्यवहार हुआ, जिसके तहत दोनों ने मिलकर समझौता करना स्वीकार किया। शिवाजी महाराज ने पेशवा और सेनापति नेताजी पालकर के नेतृत्व में 2 बड़ी फ़ौजों को प्रतापगढ़ के जंगलों में छिपे रहने का आदेश दिया। कृष्णजी भास्कर ने अफजल खां की योजना पहले ही शिवाजी महाराज को बता दी।
अफ़ज़ल खां के डेरे के निकट जाने के बाद शिवाजी महाराज ने संदेशा भिजवाकर कहलवाया कि "भेंट की जगह से सैयद बांदा को हटाना होगा।" फिर वैसा ही किया गया। शिवाजी महाराज भीतर गए, जहां दोनों पक्षों के 4-4 लोग थे। खुद नेता, 2-2 शरीर रक्षक और 1-1 ब्राम्हण दूत।
जब दोनों पक्षों में मुलाकात हुई, तब शिवाजी महाराज दिखने में शस्त्रहीन लग रहे थे, परन्तु अफ़ज़ल खां ने तलवार लटका रखी थी। शामियाने के बीच में चबूतरे के ऊपर अफ़ज़ल खां बैठा था। शिवाजी महाराज चबूतरे पर चढ़े। शिवाजी महाराज का कद अफ़ज़ल खां के कंधे तक ही पहुंचता था।
जब गले मिलने का वक्त आया तो अफजल खां ने बाएं हाथ से शिवाजी महाराज का गला जोर से दबाया और दाहिने हाथ से कटार निकालकर शिवाजी महाराज की बाई बगल में भोंक दी, लेकिन शिवाजी महाराज ने पहले ही अन्दर एक कवच पहन रखा था, जिससे अफजल खां का वार खाली गया।
शिवाजी महाराज ने बाघनखा से उसकी आँतें चीर डालीं और दूसरे हाथ से बिछवा निकालकर अफजल खां की बगल में घोंप दिया। अफ़ज़ल खां कराह उठा और चिल्लाकर कहने लगा कि "मार डाला, मार डाला, मुझको धोखा देकर मार डाला"।
शिवाजी महाराज मंच से कूदकर अपने आदमियों की तरफ दौड़े। तभी सैयद बांदा ने हमला कर शिवाजी महाराज के तुरबन (पगड़ी) के 2 टुकड़े कर दिए। शिवाजी महाराज ने पहले ही पगड़ी के भीतर लोहे की एक टोपी पहन रखी थी, इसलिए सिर में घाव नहीं लगा। इतने में जीव महाला ने सैयद बांदा का एक हाथ काट दिया और अगले ही वार में सैयद बांदा कत्ल हुआ।
अफजल खां के आदमियों ने जख्मी अफजल खां को पालकी में बिठाया और ले जाने लगे, लेकिन शम्भूजी कावजी ने अनुचरों के पैरों पर चोट करके पालकी गिरा दी और अफजल खां का सिर काटकर शिवाजी महाराज के पास हाजिर हुए। शिवाजी महाराज ने प्रतापगढ़ किले में जाकर तोप चलाकर अपने सैनिकों को संकेत दिया, जिससे मोरो त्रिम्बक और नेताजी पालकर ने हजारों की फौज समेत बीजापुर की फौज को घेर लिया।
बीजापुरी फौज के कईं ऊँट, हाथी व 3000 सैनिक कत्ल हुए। शिवाजी महाराज की सेना ने 65 हाथी, 4000 घोड़े, कई ऊँट, 2000 कपड़ों के गट्ठर, 10 लाख का धन और जेवर छीन लिए। अफजल खां के 2 बेटे, 2 मददगार मराठा ज़मीदार और एक बड़े ओहदे के सिपहसलार कैद हुए।
अफ़ज़ल खां की स्त्रियां और उसका बड़ा बेटा फ़ज़ल खां भागने में सफल रहे। ये शिवाजी महाराज की अब तक की सबसे बड़ी विजय थी और इस विजय ने समूचे भारतवर्ष में शिवाजी महाराज का रुतबा फैला दिया। उन्होंने विजेताओं और वीरगति को प्राप्त होने वालों के परिवार वालों को धन, इनाम आदि दिए।
हमारी संस्कृति हमारी धरोहर
छत्रपति शिवाजी महाराज
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