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ओशो ने मांसाहार और शाकाहार पर बहुत सटीक बातें कही हैं।
उन्होंने कहा है कि फल और सब्जियाँ रंगदार और खुशबूदार होती हैं, वो आपको मोहक लगती हैं जबकि मांस देखने में भद्दा और बदबूदार होता है।
किसी फल के बगीचे में चले जायें तो मन खिल जाता है। एक दो फल तोड़ कर खाने का मन करता है, वहीं किसी कत्लगाह में चले जाएँ तो अच्छा खासा स्वस्थ मन भी खराब हो जाए।
फल या सब्ज़ी तोड़ने या काटने पर आपको कोई ग्लानि नहीं होती, उनकी पीड़ा, उनका रोना और चीखना आपको सुनाई या दिखाई नहीं देता, वहीं किसी पश
अगर आपके पास गांव में 2-4 बीघा जमीन भी है तो कभी उसे भूलकर भी मत बेचना आपकी नौकरी या सर्विस सेक्टर कितना भी अच्छा क्यों ना हो कब ध्वस्त हो जाएगा पता नही चलेगा जिस स्पीड से टेक्नोलॉजी चेंज हो रही है Food Sector को छोड़कर किसी का भी कोई भरोसा नही
हर 15 दिन में कोई नही इनोवेशन होती है और वो हमेशा पुरानी को रिप्लेस करने ही आती है और साथ-साथ पुरानी टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए जो लोग होते है वो या तो बेरोजगार होते है या फिर नही लाइन पकड़ने के लिए भटकते रहते है
आप सिर्फ 10-15 साल का इंतजार करो
क्योंकि जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ रही है उससे खाद्यान्न की डिमांड ओर बढ़ेगी और उसकी सप्लाई कम होगी एक दिन ऐसा समय आएगा जब खूब पैसा देने के बाद भी अनाज नहीं मिलेगा तब सबको किसान नजर आएगा क्योंकि जीना सबसे पहली जरूरत है इंसान की
मैं भारत के सभी युवाओं से यही कहूंगा इस भ्रम में मत रहना कि राहुल गांधी या कांग्रेस तुम्हारे हितैषी है।
युवाओं का जितना शोषण कांग्रेस ने किया है उतना शोषण किसी ने भी नहीं किया
आज राहुल गांधी यह जो मजदूर युवाओं शोषण अग्निवीर की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं उनकी खुद की झारखंड सरकार ने 15000 से ज्यादा युवाओं को जिसमें ज्यादातर आदिवासी है उनका शोषण नहीं दिखता ??
पूरे झारखंड में पुलिस सहायक आंदोलन पर है लेकिन राहुल गांधी को इन युवाओं का युवकों की पीड़ा क्यों नहीं दिख रही?