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कुछ नशा तिरंगे की आन का है
कुछ नशा मातृभूमि की शान का है
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा
नशा ये हिन्दुस्तान का है !

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ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई, मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता, नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं कई, मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता..

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