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लाहौर में सेठ सुंदर दास ने अपनी पत्नी राम प्यारी के लिए 1918 में ₹300000 में शानदार रामप्यारी पैलेस का निर्माण कराया।

सेठ सुंदर दास इस बात से अनजान थे कि सिर्फ कुछ ही दशकों के बाद क्या होगा और उन्हें यह शानदार पैलेस लुटेरों के लिए छोड़ कर दर दर भटकने के लिए कहीं और जाना पड़ेगा।

आज इस राम प्यारी पैलेस में कोई हबीब मियां रहते हैं और सेठ सुंदर दास और उनके परिवार बंटवारे के बाद कहां चला गया किसी को पता नहीं है, सबक लेना चाहिए।

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लाहौर में सेठ सुंदर दास ने अपनी पत्नी राम प्यारी के लिए 1918 में ₹300000 में शानदार रामप्यारी पैलेस का निर्माण कराया।

सेठ सुंदर दास इस बात से अनजान थे कि सिर्फ कुछ ही दशकों के बाद क्या होगा और उन्हें यह शानदार पैलेस लुटेरों के लिए छोड़ कर दर दर भटकने के लिए कहीं और जाना पड़ेगा।

आज इस राम प्यारी पैलेस में कोई हबीब मियां रहते हैं और सेठ सुंदर दास और उनके परिवार बंटवारे के बाद कहां चला गया किसी को पता नहीं है, सबक लेना चाहिए।

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लाहौर में सेठ सुंदर दास ने अपनी पत्नी राम प्यारी के लिए 1918 में ₹300000 में शानदार रामप्यारी पैलेस का निर्माण कराया।

सेठ सुंदर दास इस बात से अनजान थे कि सिर्फ कुछ ही दशकों के बाद क्या होगा और उन्हें यह शानदार पैलेस लुटेरों के लिए छोड़ कर दर दर भटकने के लिए कहीं और जाना पड़ेगा।

आज इस राम प्यारी पैलेस में कोई हबीब मियां रहते हैं और सेठ सुंदर दास और उनके परिवार बंटवारे के बाद कहां चला गया किसी को पता नहीं है, सबक लेना चाहिए।

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अपना ही आदमी है ये शोएब

इसको हमने ध्रुवीकरण करने के लिए सैलरी पे रखा हुआ है

इसको बोला गया था शाहीन बाग आंदोलन को खड़ा करने के लिए..उसने इस काम को सही से अंजाम दिया..अगर इसने अपनी मर्जी से किया होता तो इसका इलाज दिल्ली पुलिस कर देती..लेकिन शाहीन बाग आंदोलन को पूर्ण सुरक्षा दी गई

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इसको बोला गया था शाहीन बाग आंदोलन को खड़ा करने के लिए..उसने इस काम को सही से अंजाम दिया..अगर इसने अपनी मर्जी से किया होता तो इसका इलाज दिल्ली पुलिस कर देती..लेकिन शाहीन बाग आंदोलन को पूर्ण सुरक्षा दी गई

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