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एक लड़के के लिए इससे ज़्यादा शर्मनाक हालत शायद ही हो।
एक म्यूज़िक शो में AP Dhillon गाना गा रहे थे। वहाँ तारा सुतारिया अपने बॉयफ्रेंड वीर पहारिया के साथ आई थीं।
वीर नीचे भीड़ में खड़ा रहा और तारा स्टेज पर जाकर हद से ज़्यादा नज़दीकियाँ दिखाती रहीं, यहाँ तक कि खुलेआम सब कुछ किश भी होता रहा।
अगर कोई लड़की अपने सामने अपने बॉयफ्रेंड को ऐसा करता देखे, तो क्या वह चुप रह पाएगी?
गलती यहाँ साफ़ है, शो, फेम या माहौल के नाम पर अपने पार्टनर की बेइज़्ज़ती करना बिल्कुल भी सही नहीं है।
एक लड़के के लिए इससे ज़्यादा शर्मनाक हालत शायद ही हो।
एक म्यूज़िक शो में AP Dhillon गाना गा रहे थे। वहाँ तारा सुतारिया अपने बॉयफ्रेंड वीर पहारिया के साथ आई थीं।
वीर नीचे भीड़ में खड़ा रहा और तारा स्टेज पर जाकर हद से ज़्यादा नज़दीकियाँ दिखाती रहीं, यहाँ तक कि खुलेआम सब कुछ किश भी होता रहा।
अगर कोई लड़की अपने सामने अपने बॉयफ्रेंड को ऐसा करता देखे, तो क्या वह चुप रह पाएगी?
गलती यहाँ साफ़ है, शो, फेम या माहौल के नाम पर अपने पार्टनर की बेइज़्ज़ती करना बिल्कुल भी सही नहीं है।
एक लड़के के लिए इससे ज़्यादा शर्मनाक हालत शायद ही हो।
एक म्यूज़िक शो में AP Dhillon गाना गा रहे थे। वहाँ तारा सुतारिया अपने बॉयफ्रेंड वीर पहारिया के साथ आई थीं।
वीर नीचे भीड़ में खड़ा रहा और तारा स्टेज पर जाकर हद से ज़्यादा नज़दीकियाँ दिखाती रहीं, यहाँ तक कि खुलेआम सब कुछ किश भी होता रहा।
अगर कोई लड़की अपने सामने अपने बॉयफ्रेंड को ऐसा करता देखे, तो क्या वह चुप रह पाएगी?
गलती यहाँ साफ़ है, शो, फेम या माहौल के नाम पर अपने पार्टनर की बेइज़्ज़ती करना बिल्कुल भी सही नहीं है।

मिर्जापुर के तौकीर अहमद की कहानी आज समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है...!🤔
वह एक आम मुस्लिम युवक हैं, लेकिन उनकी सोच आम नहीं है। तौकीर खुले तौर पर कहते हैं कि वे देश की सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों से प्रभावित हैं। उनका मानना है कि देश का विकास और कानून का राज सबसे ऊपर होना चाहिए धर्म से पहले इंसान और राष्ट्र।
इसी सोच के कारण उन्हें भारी सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। तौकीर बताते हैं कि उनकी बेटी की शादी अब तक तीन बार तय होकर टूट चुकी है। वजह सिर्फ़ इतनी रही कि कुछ लोग उन्हें मुसलमान होकर दूसरी सोच रखने वाला कहकर बदनाम करते हैं और लड़के वालों पर दबाव बनाते हैं।
यह स्थिति उन्हें अंदर से तोड़ देती है, लेकिन फिर भी वे अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटते।
लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री को देखने पहुँचे तौकीर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वे किसी धर्म या समुदाय के विरोधी नहीं हैं, बल्कि देश, संविधान और कानून के साथ खड़े रहने वाले नागरिक हैं। उनका कहना है कि विचारों की वजह से किसी को डराया या अलग-थलग किया जाना गलत है।
तौकीर ने प्रशासन से यह भी अपील की है कि उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक भेदभाव और मानसिक दबाव से सुरक्षा मिले, ताकि वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जी सकें।
उनकी कहानी सिर्फ राजनीति की नहीं है, बल्कि उस सच्चाई की है जहाँ आज भी कई लोग अपनी सोच खुलकर रखने की कीमत सामाजिक तिरस्कार के रूप में चुकाते हैं।
तौकीर अहमद उन लोगों में से हैं जो चुप रहने के बजाय अपने विश्वास के साथ खड़े रहना चुनते हैं चाहे हालात कितने ही मुश्किल क्यों न हों।