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जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ पोस्ट ३३१, बालकाण्ड दोहा ६६/४-८, पार्वती के गुण अवगुण।
होइहिं पूज्य सकल जग माहीं।
एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।
एहि कर नामु सुमिरि संसारा।
त्रिय चढिंहहिं पतिब्रत असिधारा।।
सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी।
सुनहु जे अब अवगुण दुइ चारी।।
अगुन अमान मातु पितु हीना।
उदासीन सब संसय छीना।।
भावार्थ:- नारदजी ने कहा कि पार्वती सारे जगत में पूज्य होगी और इसकी सेवा करने से कुछ भी दुर्लभ नही होगा। संसार में स्त्रियाॅंं इसका नाम स्मरण करके पतिव्रत रूपी तलवार की धार पर चढ़ जायॅंगी। तुम्हारी कन्या सुलच्छनी है। अब इसमें जो दो-चार अवगुण हैं, उन्हें भी सुन लो। गुणहीन, मानहीन, माता पिता विहीन, उदासीन, संशयहीन लापरवाह पति मिलेगा।
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