image
2 yrs - Translate

श्रद्धेय डॉक्टर
@DrbBrijesh
, सनातनी नवजात शिशु जो उनके अस्पताल में जन्म लेता है के माता-पिता से पूछकर, नवजात शिशु के कान में जय-सिया राम और समय होता है तो हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं !! उनके अस्पताल में आज तक किसी मुस्लिम बच्चे का जन्म नहीं हुआ...

इसके वाबजूद... कुछ कट्टर किस्म के तास्सुबी फ़र्ज़ी नामों वाले ट्वीटरबाज़ों को डॉक्टर ब्रिजेश जी का यह पवित्र कार्य बर्दाश्त नहीं हुआ... और यह कहते हुए की "डॉक्टर बृजेश सभी नवजात बच्चों के कानों में जयश्रीराम बोलते हैं"... ट्वीटर (X) के माध्यम से इन पर्दे में छुपे हुए कट्टर वादियों ने बरेली पुलिस से शिकायत कर दी!

डॉक्टर साहब तो क्या ही डरेंगे, लेकिन विधर्मी इकोसिस्टम और विक्टिम कार्ड का सामयिक प्रयोग खेलने का सफल प्रयोग तो देखिये... इससे पूर्व भी नई पीढ़ी को जागरूक करने के लिए अपने संसाधनों से डॉक्टर ब्रिजेश ने डेढ़ हजार लोगों को कश्मीर फाइल्स और केरला स्टोरी फ़िल्म PVR में दिखवाई थी ! तब भी डॉक्टर साहब के खिलाफ इन्ही लोगों ने असफल अभियान चलाया था !

साथियों ! धर्मानुरागियों की रास्ता कितनी विषम है... स्वयं महसूस कीजिये... समय है कि हम डॉक्टर साहब के साथ तन कर खड़े हों...

image

बाबरी मस्जिद के लिए सारी जिंदगी
लडने वाले इकबाल अंसारी को बाबर की औलादों ने मस्जिद के अंदर पीटा, कपड़े फाड़े व दबे मुंह सूचना है कि कुकर्म करने की कोशिश की...

इकबाल अंसारी को न्याय दो ✊

#noida घर में घुसकर KNC लाइव न्यूज़ टीवी पत्रकार पर जानलेवा हमला, ऑफिस से घर पहुंचे ही अज्ञात बदमाशों द्वारा जान से मारने की नीयत से हमला। थाना फेस 2 का मामला

image

योगी आदित्यनाथ जी ने एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए मदरसा बोर्ड को खत्म कर मदरसों के 17 लाख स्टूडेंट्स और 10 हजार टीचर को राज्य के स्कूल सिस्टम में एडजस्ट करने का फैसला किया था.

मदरसे में क्या क्या पढ़ाया जाता है आप सब लोगों को पता ही है,

पर सुप्रीम कोर्ट ने एक पोंगापंथी फैसला करते हुए इसे रोक दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद द्वारा निरस्त किया जाना चाहिए.

ये मिलॉर्डस आखिर चाहते क्या हैं ??

image

बात 90 के दशक की है, जब कांग्रेस अपने चरम पर थी,

वर्ष 1998 का, महीना मार्च का, स्थान कांग्रेस मुख्यालय,

कहानी कांग्रेस के उस अध्यक्ष की जिसे बेइज्जत कर पद से हटाया था।

धोती खोल कर उन्हें बाथरूम में बंद कर दिया गया था।

कहानी सीताराम केशरी की जो एक वक्त कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुआ करते थे।

कहानी शुरू होती है नरसिम्हा राव से, वर्ष था 1996 का, महीना सितंबर, जब उस वक्त के कांग्रेस अध्यक्ष पी वी नरसिम्हा राव को हटाने के लिए गांधी परिवार द्वारा साजिश रची जाने लगी। उस समय गांधी परिवार को किसी ऐसे भरोसेमंद और वफादार कांग्रेसी की तलाश थी को कांग्रेस अध्यक्ष बनकर गांधी परिवार के इशारे पर चल सके। ऐसे में गांधी परिवार की नजर गयी केंद्रीय मंत्री रहे दिग्गज कांग्रेसी सीताराम केसरी पर।

बिहार के दिग्गज कांग्रेस नेता केसरी महज 13 साल की उम्र से ही स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने लगे थे। 1930 से 1942 के बीच सीताराम केसरी स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते कई बार जेल गए। साल 1973 में बिहार कांग्रेस समिति के अध्यक्ष बने और 1980 में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष बने। 1967 में सीताराम केसरी कटिहार लोकसभा सीट से सांसद बने। इसके बाद केसरी 1971 से 2000 तक पांच बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए। गांधीवादी विचार के समर्थक सीताराम केसरी इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में मंत्री भी रहे। केसरी अक्सर कहा करते थे पार्टी ही मेरा परिवार है।

केसरी को नरसिम्हाराव की जगह कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया गया। केसरी के अध्यक्ष बनते ही पार्टी के कई पुराने नेता माधवराव सिंधिया, एन डी तिवारी जैसे दिग्गज कांग्रसी जो कांग्रेस छोड़कर जा चुके थे, वो वापस आ गए।

इसी बीच 1998 का लोकसभा चुनाव आ गया, इस चुनाव में कांग्रेस 141 सीटों पर सिमट गई, यहां तक कि कांग्रेस अपना गढ़ अमेठी भी हार चुकी थी। इसके बाद ही कांग्रेस अध्यक्ष केसरी को पद से हटाने की साजिश रची जाने लगी।

इसपर केसरी ने कहा कि "जब सोनिया और 10 जनपथ के सारे आदेश मैं मान ही रहा हूं तो मुझे अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को क्यों कहा जा रहा है।"

लेकिन इतने सबके बावजूद पार्टी के कुछ नेता केसरी को हटाने के लिए षड्यंत्र करने लगे। षड्यंत्र सोनिया गांधी तक पहुंचा। हार से बौखलाई सोनिया इस बयान के बाद बात और भी तिलमिला उठीं।

सीताराम केसरी सार्वजनिक मंचों से कहने लगे थे कि साधारण परिवार से आने वाला और कम पढ़ा लिखा नेता भी कांग्रेस के अंदर सर्वोच्च पद पर पहुंचा है। यह बात गांधी परिवार खासकर सोनिया गांधी को खटकने लगी।

14 मार्च 1998 ही वह तारीख है जिस दिन कांग्रेस के नेताओं ने सीताराम केसरी को बेइज्जत किया और उन्हें पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाया। 5 मार्च 1998 को CWC की बैठक बुलाई गई। इसमें फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी पार्टी के कार्यों में ज्यादा सक्रिय हों और संसदीय दल का नेता चुनने में हेल्प करें। उस वक्त संसदीय दल के नेता सीताराम केसरी ही थे। प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी के कानून में बदलाव कर तय कराया था कि पार्टी का नेता संसदीय दल का नेता हो सकता है, चाहे वह लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य हो या नहीं।

पार्टी में अपने खिलाफ इस तरह की गतिविधियों को देखते हुए 9 मार्च 1998 को सीताराम केसरी ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। कुछ ही मिनट बाद उनका मन बदल गया और कहा कि उन्होंने केवल मंशा जाहिर की है, इस्तीफा नहीं दिया है। सीताराम केसरी ने तय किया कि वह AICC की आम सभा में कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कुर्सी छोड़ेंगे। इसके बाद 14 मार्च 1998 को CWC से करीब 13 नेता प्रणब मुखर्जी के घर पर जुटे और CWC की बैठक बुलाकर सीताराम केसरी को अपने इस्तीफे पर फैसला करने की मांग रख दी।

11 बजे CWC की बैठक हुई। इसमें प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण में सीताराम केसरी के पार्टी के लिए किए गए कार्यों के लिए धन्यवाद कहा और कहा कि सोनिया गांधी पार्टी में अध्यक्ष पद संभालें। इस बात पर सीताराम केसरी नाराज हो गए। महज 8 मिनट में ही केसरी ने बैठक स्थगित कर दी और हॉल से सटे अपने दफ्तर चले गए। मनमोहन सिंह के साथ कुछ और नेता उन्हें मनाने पहुंचे लेकिन वह नहीं माने और दोबारा बैठक में नहीं आए। इसके बाद पार्टी के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में दोबारा बैठक शुरू की गई। यहां औपचारिक रूप से सोनिया गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। तत्काल सीताराम केसरी का नेमप्लेट उखाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया गया। इतनी बेइज्जती के बाद सीताराम केसरी 24 अकबर रोड को छोड़कर जा रहे थे तभी यूथ कांग्रेस के कुछ उदंड कार्यकर्ताओं ने उनकी धोती खींच दी और उन्हें बाथरूम में बंद कर दिया।

image

अपराधी मुख्तार की मौत से “सपा में मातम”

कार्यालय पर मुख्तार की होर्डिंग लगी, कार्यकर्ताओं से ईद-बकरीद पर मौन होकर फूल माला चढ़ाने का निवेदन किया गया है।

अखिलेश कल कब्र पर जाकर दुःख मनाएंगे?
बताओ सपा सत्ता में होती तो क्या-क्या करती?

जिहादी मौलाना 'तौकीर रजा' पर निदा खान का खुलासा।

तौकीर के पास न बिजनेस न फैक्ट्री, न कोई काम, फिर भी करोड़ों की फंडिंग कहाँ से आती है? बेटा ऑस्ट्रेलिया में पढ रहा।

इसी फंडिंग से नफरत फैलाई जाती है, ‘मैं मांग करती हूं ED की जांच होनी चाहिये, मुझे धमकी मिल रही हैं।

"दोस्त बनकर डॉ फैजान ने बेटे को कलमा पढ़ा दिया, इस्लाम अपनाने मजबूर कर दिया"
अपने बेटे को खो चुकी एक माँ का दर्द सुनिए और सावधान रहिए