image

image

• Today's the best Photo ♥️
• Miss You Sidhu Moose Wala 💔😭 #justiceforsidhumossewala #balkorsingh #charnkaur #trend #jattmind #sidhumoosewala #instagram #photo #photochallenge2024 #photographers #photographylife #photoday #photographychallengechallenge #photooftheday #photographychallenge #mouniroy #kuldeepyadav #academyawards #academyawards #rcbvsmi

image

ये हैं #इंदौर की चंद्रिका दीक्षित।लॉकडाउन के बाद इनकी जॉब चली गई।जॉब ना होने के कारण उन्हें पैसों की तंगी का सामना करना पड़ा।
जब इन्होंने रिश्तेदार और दोस्त से पैसा मांगा पर किसी ने इनकी हेल्प नहीं कई।तब इन्होंने ये वाड़ापाव का ठेला शुरू किया। शुरुवाती दिनों में कुछ खास रिस्पॉन्स नहीं मिला पर धीरे धीरे उनका ये बिज़नेस चलना शुरू हुआ।
आज के दिन ये इस ठेले से डेली 10 से 10 हजार रूपए कमाकर आपने परिवार को खुश रखती है।इनके काम को हर लड़की को सीखना चाहिए।♥️
अगर आपको उनका काम अच्छा लगा तो एक लाइक और शेयर जरूर करे।👏👍🏻

image

ये हैं #इंदौर की चंद्रिका दीक्षित।लॉकडाउन के बाद इनकी जॉब चली गई।जॉब ना होने के कारण उन्हें पैसों की तंगी का सामना करना पड़ा।
जब इन्होंने रिश्तेदार और दोस्त से पैसा मांगा पर किसी ने इनकी हेल्प नहीं कई।तब इन्होंने ये वाड़ापाव का ठेला शुरू किया। शुरुवाती दिनों में कुछ खास रिस्पॉन्स नहीं मिला पर धीरे धीरे उनका ये बिज़नेस चलना शुरू हुआ।
आज के दिन ये इस ठेले से डेली 10 से 10 हजार रूपए कमाकर आपने परिवार को खुश रखती है।इनके काम को हर लड़की को सीखना चाहिए।♥️
अगर आपको उनका काम अच्छा लगा तो एक लाइक और शेयर जरूर करे।👏👍🏻

image

ये हैं #इंदौर की चंद्रिका दीक्षित।लॉकडाउन के बाद इनकी जॉब चली गई।जॉब ना होने के कारण उन्हें पैसों की तंगी का सामना करना पड़ा।
जब इन्होंने रिश्तेदार और दोस्त से पैसा मांगा पर किसी ने इनकी हेल्प नहीं कई।तब इन्होंने ये वाड़ापाव का ठेला शुरू किया। शुरुवाती दिनों में कुछ खास रिस्पॉन्स नहीं मिला पर धीरे धीरे उनका ये बिज़नेस चलना शुरू हुआ।
आज के दिन ये इस ठेले से डेली 10 से 10 हजार रूपए कमाकर आपने परिवार को खुश रखती है।इनके काम को हर लड़की को सीखना चाहिए।♥️
अगर आपको उनका काम अच्छा लगा तो एक लाइक और शेयर जरूर करे।👏👍🏻

imageimage

जरूर देखें #सावरकर

image

जरूर देखें #सावरकर

image

जरूर देखें #सावरकर

imageimage

॥ૐ॥
*हर दिन पावन*
*रानी अवंतीबाई बलिदान दिवस 20 मार्च 1858 प्रथम स्वतंत्र संग्राम 1857 की प्रथम शहीद वीरांगना महिला*
मध्य भारत के रामगढ की रानी थी. 1857 की क्रांति में ब्रिटिशो के खिलाफ साहस भरे अंदाज़ से लड़ने और ब्रिटिशो की नाक में दम कर देने के लिए उन्हें याद किया जाता है. उन्होंने अपनी मातृभूमि पर ही देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था.
*वीरांगना रानी अवंतीबाई*
1857 की क्रांति के समय रानी अवंतीबाई ब्रिटिशो के मुख्य दुश्मनो में से एक थी. अवंतीबाई लोधी रामगढ के राजा विक्रमादित्य सिंह की रानी थी. जब विक्रमादित्य स्वास्थ समस्याओ के चलते राज्य के कारोभार को संभाल नही पाये तब अवंतीबाई ने राज्य की बागडोर अपनी हाथो लेकर ब्रिटिश राज के खिलाफ लढने लगी थी.
जब 1857 की क्रांति चरम पर थी तभी रानी अवंतीबाई ने अपनी विशाल सेना का निर्माण किया. अपना पहला एनकाउंटर उन्होंने खेरी नामक ग्राम में अंग्रेजो के खिलाफ किया था.
महारानी अवंतीबाई लोधी ने सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रेंजो से खुलकर लोहा लिया था और अंत में भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी थी.
20 मार्च 1858 को इस वीरांगना ने रानी दुर्गावती का अनुकरण करते हुए युध्द लडते हुए अपने आप को चारो तरफ से घिरता देख स्वयं तलवार भोंक कर देश के लिए बलिदान दे दिया.
उन्होंने अपने सीने में तलवार भोकते वक्त कहा की हमारी दुर्गावती ने जीते जी वैरी के हाथ से अंग न छुए जाने का प्रण लिया था. इसे न भूलना बडों. उनकी यह बात भी भविष्य के लिए अनुकरणीय बन गयी वीरांगना अवंतीबाई का अनुकरण करते हुए उनकी दासी ने भी तलवार भोक कर अपना बलिदान दे दिया और भारत के इतिहास में इस वीरांगना अवंतीबाई ने सुनहरे अक्षरों में अपना नाम लिख दीया.
कहा जाता है की वीरांगना अवंतीबाई लोधी 1857 के स्वाधीनता संग्राम के नेताओं में अत्यधिक योग्य थीं कहा जाए तो वीरांगना अवंतीबाई लोधी का योगदान भी उतना ही है जितना 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का था.
प्रस्तुतकर्ता ✍ योगेश पारेख

image