84 ज़ख्मों से सुसज्जित महाराणा सांगा, जिनको मानवों का खंडहर भी कहा जाता है। इतने ज़ख्मों के बावजूद भी खानवा के युद्ध के बाद बाबर से फिर लड़ना चाहते थे, पर विश्वासघात की भेंट चढ़ गए।
देश में नागरिकता संसोधन क़ानून 2019 की तरह कोई भी क़ानून बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जबकि देश में सभी लोग मिलजुलकर भाईचारे के साथ रहने को तैयार हैं। तो ऐसे क़ानून की क्या ज़रूरत है? : विजय थलापति