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आज माता जीजाबाई और स्वामी विवेकानन्द दोनों की ही जन्म जयंती है,आप दोनों को कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से कोटि -कोटि नमन🙏
स्वामी विवेकानंद जी के ये विचार पढिये ऐसा महसूस होगा जैसे आपका पुनर्जन्म हो रहा हो।
उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये।
ब्रह्माण्ड कि सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है!
किसी की निंदा ना करें. अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं.अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।
कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है. ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है.अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।
जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिये, नहीं तो लोगो का विश्वास उठ जाता है।
उस व्यक्ति ने अमरत्त्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता।
जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते।
जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये – आप यकीन कर सकते है की आप गलत रस्ते पर सफर कर रहे है।
यह जीवन अल्पकालीन है, संसार की विलासिता क्षणिक है, लेकिन जो दुसरो के लिए जीते है, वे वास्तव में जीते है।
हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा , और परमात्मा उसमे बसेंगे।
बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।
जिस क्षण मैंने यह जान लिया कि भगवान हर एक मानव शरीर रुपी मंदिर में विराजमान हैं , जिस क्षण मैं हर व्यक्ति के सामने श्रद्धा से खड़ा हो गया और उसके भीतर भगवान को देखने लगा – उसी क्षण मैं बन्धनों से मुक्त हूँ , हर वो चीज जो बांधती है नष्ट हो गयी , और मैं स्वतंत्र हूँ।
भला हम भगवान को खोजने कहाँ जा सकते हैं अगर उसे अपने ह्रदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते।
पहले हर अच्छी बात का मज़ाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है, और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है।
किसी चीज से डरो मत। तुम अद्भुत काम करोगे। यह निर्भयता ही है जो क्षण भर में परम आनंद लाती है।
प्रेम विस्तार है , स्वार्थ संकुचन है। इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत है। वह जो प्रेम करता है जीता है , वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो , क्योंकि जीने का यही एक मात्र सिद्धांत है , वैसे ही जैसे कि तुम जीने के लिए सांस लेते हो।
सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना। स्वयं पर विश्वास करो।
शक्ति जीवन है , निर्बलता मृत्यु है . विस्तार जीवन है , संकुचन मृत्यु है . प्रेम जीवन है , द्वेष मृत्यु है।
बस वही जीते हैं ,जो दूसरों के लिए जीते हैं।
शारीरिक , बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से जो कुछ भी आपको कमजोर बनाता है – , उसे ज़हर की तरह त्याग दो।
एक समय में एक काम करो , और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे। यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो , तुम कमजोर हो जाओगे ; अगर खुद को ताकतवर सोचते हो , तुम ताकतवर हो जाओगे।
धन्य हैं वो लोग जिनके शरीर दूसरों की सेवा करने में नष्ट हो जाते हैं।
जीवन का रहस्य केवल आनंद नहीं है बल्कि अनुभव के माध्यम से सीखना है।
स्त्रियो की स्थिति में सुधार न होने तक विश्व के कल्याण का कोई भी मार्ग नहीं है।
आज्ञा देने की क्षमता प्राप्त करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को आज्ञा का पालन करना सीखना चाहिए।
प्रसन्नता अनमोल खजाना है छोटी -छोटी बातों पर उसे लूटने न दे।
जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी।
अगर आप ईश्वर को अपने भीतर और दूसरे वन्य जीवो में नहीं देख पाते, तो आप ईश्वर को कही नहीं पा सकते।
आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम, ईमानदारी और उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता।
पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान।ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है।
संभव की सीमा जानने केवल एक ही तरीका है असम्भव से आगे निकल जाना।
विश्व में अधिकांश लोग इसलिए असफल हो जाते है, क्योंकि उनमे समय पर साहस का संचार नही हो पाता। वे भयभीत हो उठते है।
किसी मकसद के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह, गिरो तो बीज की तरह। ताकि दुबारा उगकर उसी मकसद के लिए जंग कर सको।
जब तक लाखो लोग भूखे और अज्ञानी है तब तक मै उस प्रत्येक व्यक्ति को गद्दार मानता हुँ जो उनके बल पर शिक्षित हुआ और अब वह उसकी और ध्यान नही देता।
मन की एकाग्रता ही समग्र ज्ञान है।
यही दुनिया है! यदि तुम किसी का उपकार करो तो लोग उसे कोई महत्व नहीं देंगे, किन्तु ज्यो ही तुम उस कार्य को बंद कर दो, वे तुरंत तुम्हे बदमाश साबित करने में नहीं हिचकिचाएंगे।
दुनिया मज़ाक करे या तिरस्कार, उसकी परवाह किये बिना मनुष्य को अपना कर्त्तव्य करते रहना चाहिये।
जिंदगी का रास्ता बना बनाया नहीं मिलता है, स्वयं को बनाना पड़ता है, जिसने जैसा मार्ग बनाया उसे वैसी ही मंज़िल मिलती है।
कर्म का सिद्धांत कहता है – ‘जैसा कर्म वैसा फल’. आज का प्रारब्ध पुरुषार्थ पर अवलम्बित है। ‘आप ही अपने भाग्यविधाता है’. यह बात ध्यान में रखकर कठोर परिश्रम पुरुषार्थ में लग जाना चाहिये।
इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरूरी है।

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यह सैफई महोत्सव का खर्च है भौजी..

2012 - ₹195 Crores
2013 - ₹216 Crores
2014 - ₹256 Crores
2015 - ₹271 Crores
2016 - ₹300 Crores

Total - ₹ 1238 Crores

इस खर्च में घर-घर घी ही नहीं पहुँचता बल्कि, गाँव-गाँव घी की टोंटीया लग जाती.. 😂

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विश्व में भारतीय संस्कृति को स्थापित करने वाले, महान आध्यात्मिक गुरु और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।

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बड़े भाई आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं भोले बाबा आपको ताकत दे आप देश समाज और पार्टी की ऐसे ही सेवा करते रहे..

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200 गोली नशा तस्करों द्वारा नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले के घर चलाया जाना मंदभागी घटना.
अरे भाई इतनी गोली तो पंजाब पुलिस की किसी चौकी में भी नहीं होगी.. सोचा होगा पंजाब पुलिस को और सरकार को..

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Connect with PM Shri Narendra Modi, directly!

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