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जगदीश्वरश्रीकृष्ण कहते हैं!
मृत्यु दुख नही है। इससे जुड़ा हुआ मोह दुख है।
नही तो इस संसार में कितनी मृत्यु हो रही है। हम दुखी सभी पर नही होते। जो सम्बंधी होता है, उसी पर दुख होता है।
भगवान गीता में सबसे अधिक आघात मोह पर ही करते हैं। वास्तव में मोह ही इस भौतिक
संसार के संचालन कि प्रमुख ऊर्जा है।
यह मोह ही सबको जला रहा है।

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आज भाईसाहब के लैब में ...
देखा तो भाईसाहब मांस काट (Grossing) कर रहे थे, देख कर बड़ा अच्छा लगा , अपना लैब अब धीरे धीरे आगे बढ़ रहा है , अब भाईसाब हार्मोन्स की भी नई मशीन भी लगवा लिये है।

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