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हम है भारत का इतिहास ,हमारा बल कमजोर नही पडा राजघरानों का आत्मबल लालच ने तोड दिया :-
शूरवीर महाराणा प्रताप के दो मीठे बोल पर भील समुदाय मेवाड़ की रक्षा के लिए युद्ध के मैदान में कूद पड़े.
हल्दीघाटी युद्ध के कई वर्षों बाद महाराणा प्रताप के बेटे अमर सिंह ने मुग़ल सरपरस्ती को स्वीकार कर लिया.
1818 में मेवाड़ के राजा भीम सिंह ने मासिक वेतन पर मेवाड़ को ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन किया.
मुग़लों और अंग्रेज़ो से लड़ने वाले भील समुदाय और अन्य अनगिनत घुमंतू जातियों को ब्रिटिश हुकूमत ने 1873 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट बनाकर उन्हें अपराधी घोषित कर उनके आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया.
भील अपना विकास नही कर पाए, नाच गाना तमाशा, खिलौने बनाना, मजदूरी करना यहां तक भीख मांगने पर मजबूर हैं.
आज़ाद भारत में महाराणा प्रताप के जाति के लोग अफसर, सांसद, उद्योगपति, डीएम और मुख्यमंत्री तक हैं.
क्रिमिनल्स ट्राइब्स झेले हर समाज की हम बात करते हैं।
कमला रावत की पोस्ट से लिया गया